
रघु की बात सुनकर मधु बाई के होठों पर गहरी मुस्कुराहट आ गई थी, वो अब अपनी चारपाई से उठी और रघु की तरफ आते हुए बोली "मेरे कोठे की शान है महक! जैसा उसका नाम है वैसी ही उसकी शख्सियत भी, उसका जिस्म इस कदर महकता है कि फूल भी उसके सामने फीके पड़ जाए! अगर तुझे मैं कुछ दूंगी तो महक ही दूंगी… उसके साथ अगर तू एक रात बिता लेगा ना तो देखना हर रात तेरी इसी कोठे में बीतेगी!”
उसकी बात पर रघु झट से बोला "ज्यादा गांड मत मरवा, जो है जल्दी से बता कहां है? बाकी वो महकती है या तेरी तरह हगती है वो मैं खुद डिसाइड कर लूंगा!”




















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