
दोपहर के लगभग से 12 बजे नाज़नीन की आंखें खुली, कुछ पल वो पूरी तरह से खामोश रही जैसे सोचने की कोशिश कर रही हो कि आखिर वो कहां है और किस हालत में है? और फिर अगले ही पल उसे सब कुछ याद आया! वो सब कुछ जो उसने बेहोश होने से पहले देखा था…
अब उसका चेहरा और भी ज्यादा सुन्न हो गया था, उसके चेहरे के रंग ही उड़ गए थे और वो तुरंत एक झटके से अपनी जगह पर उठकर बैठी! उसकी सांसों ने गहरा होना शुरू कर दिया था, डर से उसके रोंगटे खड़े हो चुके थे और उसकी आंखों की पुतलियां भी हिल तक नहीं पा रही थी।




















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