
सुहानी बाहर की तरफ जा रही थी ताकि सबको बता सके कि अद्वय को होश आ चुका है, लेकिन वो वहां से जाती उससे पहले ही अद्वय ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया था।
सुहानी की धड़कन भी एक पल के लिए रुक गई, वो अद्वय की तरफ पलट कर देखना नहीं चाहती थी क्योंकि वो जानती थी अगर अद्वय ने उसे कुछ कहा और उन दोनों के बीच जरा सी भी बात हुई तो शायद वो हार जाएगी! शायद वो एक बार फिर से अद्वय की बातों में बह जाएगी इसलिए वो ना उसकी तरफ देखना चाहती थी और ना ही उसकी बातें सुनना चाहती थी।




















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