
आराध्या उस बच्ची की तरफ देख रही थी जो वहां स्टेशन पर बिल्कुल अकेली थी और उसके साथ कोई भी नहीं था, वो बच्ची उसे बोल रही थी कि उसका घर यही स्टेशन के पास वाली गली में है! वो उसे उसके घर पर छोड़ आए क्योंकि वो अकेली वहां पर नहीं जा सकती और आराध्या ने उसकी बात पर यकीन भी कर लिया था, वो सच में बहुत ज्यादा इनोसेंट थी और दुनिया की चालाकियां समझ नहीं पाती थी इसीलिए तो वो दक्षम रावत के जाल में फंस गई वरना शायद आज उसकी ऐसी हालत नहीं होती!
उसने उस लड़की का हाथ कसकर पकड़ा हुआ था और उसे स्टेशन से बाहर की तरफ लेकर आई, वो स्टेशन भी बहुत बड़ा था! अंदर से बाहर आने में ही उसे काफी टाइम लग गया था और उसने अपना सूटकेस भी वहीं छोड़ दिया था ये सोचकर कि उसका सूटकेस भला कौन ही वहां से लेकर जाएगा? लेकिन उसके जाते ही एक आदमी उसके सूटकेस की तरफ आया और फिर अगले ही पल वो सूटकेस वहां से गायब हो गया था लेकिन वो आदमी कोई चोर उचक्का नहीं था बल्कि दक्षम का ही भेजा हुआ आदमी था!




















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