
नैना की इस वक्त डर से हालत खराब हो रही थी, सबसे ज्यादा डर उसे इस वक्त तेंदुए से लग रहा था! धनंजय शेखावत को अपने सामने देखकर भी उसकी बुरी तरह से फट चुकी थी, वो नहीं चाहती थी कि वो दोबारा धनंजय के हाथ लगे क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो फिर उसकी जिंदगी को नर्क बनने से कोई नहीं रोक सकता! कोई भी उसे धनंजय से बचा नहीं पाएगा और अब तो रघु भी उसके साथ नहीं है, रघु उसके साथ होता तो शायद फिर भी वो धनंजय से बच पाती लेकिन यहां तो रघु ने खुद से उसे दूर कर दिया था और अब नैना को खुद ही खुद को बचाना था!
किसी तरह वो धनंजय के सामने से तो भाग कर आ गई थी लेकिन यहां जंगल में आकर वो बुरी तरह से फंस चुकी थी, उसके सामने ही तेंदुआ था जो उसे ही घूर घूर कर देख रहा था और नैना को अब उस तेंदुआ से बचना था!




















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