
आराध्या अपने केबिन में थी और अपना दिमाग लगा रही थी कि वो कैसे दक्षम के जाल से निकले? वो कैसे उसके चंगुल से आजाद हो? लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, वो बस बार-बार अपना दिमाग इधर-उधर दौड़ा रही थी।
उसने सब कुछ सोच कर देख लिया था लेकिन उसके पास कोई भी सॉल्यूशन नहीं था, अगर वो ऑफिस से निकले और कैब में बैठकर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जाएगी तो दोबारा वही सब होगा जो कल रात हुआ था! वो एक बार फिर से दक्षम के चंगुल में फंस जाएगी और दक्षम उसका बुरा हाल कर देगा और इसके अलावा उसके पास और क्या ही ऑप्शन था?




















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