
अव्यांश के सवाल पर अफसाना की धड़कनें सच में रुकने की कगार पर आ गई थी, वो अपने लोअर लिप को हल्का सा दबाते हुए अव्यांश की तरफ देख रही थी और अव्यांश अब बाहर की तरफ चला गया था।
अफसाना ने अपने माथे पर अपना हाथ रखा और बोली "एक तो मुझे ये समझ में नहीं आ रहा कि मैं इनके इतने सपने क्यों देख रही हूं? ये तो पहले ही मुझे इतना परेशान करते है और जब इन्हें पता चल जाएगा कि मेरे दिल में इनके लिए कुछ है तो ये तो मुझे और भी ज्यादा परेशान करेंगे और मुझे तो समझ में ये नहीं आ रहा कि मैं इनके लिए ये सब कैसे सोच सकती हूं? पर मैं करूं तो करूं क्या? मैं तो खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही हूं लेकिन मेरे दिल पर तो ये हावी होते ही जा रहे हैं!” ये बोलते हुए उसने अपने सीने पर अपना हाथ रखा हुआ था।




















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