
अपनी बात कहने के बाद रणधीर सुरूर के ऊपर से हटा और फिर गुस्से से कांपते हुए वहां से चला गया जबकि सुरूर अभी भी अपनी जगह पर लेटी हुई थी और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे थे! उसे रणधीर का गुस्सा बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था और ऊपर से रणधीर का इस तरह से चले जाना तो और भी ज्यादा बुरा लग रहा था।
अब तो उसे ऐसा लग रहा था जैसे सच में रणधीर को सिर्फ अपनी फिजिकल डिजायर ही मैटर करती है, इसके अलावा तो उसे सुरूर से कोई लेना देना ही नहीं! जब उसे रोमांस करने का मन होता है तब वो सुरूर के पास आ जाता है और जब सुरूर उसे खुद के साथ रोमांस करने से मना कर देती है तो वो सुरूर को यूं ही छोड़ कर चला जाता है लेकिन बात ऐसी बिल्कुल भी नहीं थी!




















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