
जैसे ही दक्षम ने अपनी कलाई पर वो चाकू दोबारा चलाया आराध्या की जोरों से चीख निकल गई थी, उसकी आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे! उसके सामने दक्षम का हाथ था जो बुरी तरह से कांप रहा था क्योंकि कहीं ना कहीं दक्षम को भी दर्द तो हो रहा था लेकिन शायद जो वो कर रहा था उसे बहुत अच्छी तरह से पता था, उसे कितना दर्द होगा कब तक होगा? और उसे इस दर्द को हैंडल कैसे करना है?
उसकी निगाहें सिर्फ और सिर्फ आराध्या पर टिकी हुई थी और उसे रोते हुए देख उसे अपना दर्द कम महसूस हो रहा था।




















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