
धनंजय शेखावत नैना को घसीटते हुए हवेली के अंदर लेकर आ रहा था और नैना उसे कुछ भी नहीं कह रही थी, वो बस उसके साथ चले जा रही थी! उसके पैर सीधे जमीन पर लग भी नहीं रहे थे, कभी इधर मुड़ रहे थे तो कभी उधर…
उसका हाथ धनंजय के हाथ में था और अब अंदर लाकर उसने एक झटके से नैना को छोड़ा तो नैना सीधा जमीन पर जाकर गिरी, धनंजय शेखावत उसकी हालत पर जोरों से हंसा!




















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