
जैसे ही अव्यांश ने अफसाना के होठों पर अपने होठ रखे अफसाना को जैसे दोबारा जिंदगी मिल गई हो, उसने राहत की एक लंबी सांस ली! उसकी आंखों में आंसू आ गए थे लेकिन ये आंसू तकलीफ के नहीं बल्कि शायद सुकून के थे, वो सुकून जो सिर्फ अव्यांश ही उसे दे सकता था और जब उसे लगा कि वो सुकून उससे दूर जा रहा है वो सुकून उसका है ही नहीं! शायद वही कुछ ज्यादा सोच रही है वही अव्यांश के लिए पागल है, अव्यांश के लिए तो वो कुछ मायने ही नहीं रखती इसलिए उसने खुद को खत्म करने तक का सोच लिया था पर अब तो जैसे उसकी जिंदगी और भी ज्यादा लंबी हो गई थी।
उसने अपना कांपता हुआ हाथ अव्यांश के चेहरे पर रख दिया था और अव्यांश भी अब उसके होठों को खोलते हुए धीरे-धीरे उसके होठों को चूसने लगा था, वो कभी उसके अप्पर लिप को अपने होठों में दबाकर खींचता तो कभी उसके लोअर लिप को!




















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