
इति यज्ञ की कमर से लिपटी हुई थी और उस से छिपकली भगाने के लिए रिक्वेस्ट कर रही थी और यज्ञ उसके गर्दन के साथ खेल रहा था।
उसकी वो सुराही सी गर्दन पर उसकी उंगलियां नाच रही थी और इस नाचने इति के रोंगटे खड़े कर दिए थे। वो जब सांसे भी ले रही थी तो उसकी गर्दन में होती हुई हलचल तक यज्ञ महसूस कर रहा था और उस हलचल को अपनी उंगलियों से छू रहा था




















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