
यज्ञ के इस तरह करीब आने से इति कांपने लगी और उसकी सांसे भी तेज हो गई और उसकी सांसों की आवाज अब यज्ञ को शावर के पानी के बीच भी साफ सुनाई दे रही थी। उसने अपने दूसरे हाथ को उसकी पीठ पर रखा और यूं ही उसकी गर्दन को sniff करते हुए बोला " यहां छुआ था उसने तुम्हें...??? "
" हाँ..हाँ... हाँ.." इति कांपती और लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली.. तो यज्ञ ने अपने होंठ उसकी गर्दन पर उसी जगह रख दिए । उसके होंठो को अपनी गरदन पर महसूस कर इति ने भी अपने हाथ उसकी कमर पर रख दिए।




















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