
प्रणय की नजरे इस वक्त पाखी के होठों पर थी जो गुलाब की पंखुड़ियों की तरह नजर आ रहे थे, बेशक से कमरे में डिम लाइट थी लेकिन फिर भी वो उसके चेहरे को साफ देख सकता था।
उसने आज तक कभी खुद को पाखी की तरफ इस तरह से अट्रैक्टेड नहीं महसूस किया था जिस तरह से वो अभी कर रहा था और ना जाने वो किन ख्यालों में खोया हुआ था, किस दुनिया में खोया हुआ था कि अचानक से ही वो पाखी के चेहरे पर झुकने लगा! उसके होठों ने लगभग से पाखी के होठों को टच कर लिया था…





















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