
धीरे-धीरे इति पानी के अंदर की तरफ जा रही थी और उसका चीखना चिल्लाना भी कम होता जा रहा था क्योंकि अब उसमें हिम्मत ही नहीं बची थी लेकिन फिर भी आखिरी सांस तक वो लड़ रही थी, पर अब शायद वो हार मान चुकी थी। उसकी बॉडी उसका साथ छोड़ने लगी थी। वो बेहोशी के आगोश में जाने लगी थी। पानी उसकी बॉडी को निचे खींच रहा था और उसकी आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा था।






















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