
अग्नि इश्क को अपनी गहरी निगाहों से देख रहा था, इस वक्त उसने इश्क के होठों पर चाकू रखा हुआ था! वही चाकू जिस पर उसका ब्लड लगा हुआ था, जिस चाकू से उसने अपने कंधे में से गोली निकाली थी!
इश्क भी अब पूरी तरह से खामोश हो गई थी और अग्नि उसकी तरफ देखते हुए बोला "माना तुम्हारी आंखों में आंसू अच्छे नहीं लग रहे हैं मुझे, लेकिन इसका मतलब ये नहीं तुम्हें चुप करवाने के लिए कुछ भी करूंगा मैं! तुम्हारी हर एक बात को मानूंगा मैं, Fire बात तो अपने दिल की नहीं मानता तुम्हारे दिल की तो वो मानेगा ही क्या? इसलिए अगर यहां पर रहना है तो चुप रहो और देखती रहो कि क्या हो रहा है और क्या नहीं? और अगर नहीं यहां पर रहना तो दरवाजा उस तरफ है, मुझे तुमसे जो चाहिए था वो मुझे मिल गया! अब तुम यहां से जा सकती हो…






















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