
प्रणय हैरानी से पाखी की तरफ देख रहा था जो उसके सामने उसके टेबल पर आकर बैठ गई थी, उसने अपने पैरों को नीचे की तरफ लटकाया हुआ था और बड़े ही आराम से वहां बैठी प्रणय को अपनी गहरी गहरी निगाहों से देख रही थी।
प्रणय गुस्से से दांत पीसते हुए बोला "ये क्या बदतमीजी है? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहां मेरे केबिन में आने की? और ऊपर से तुम मेरे केबिन में आकर इस टेबल पर ऐसे बैठी हो जैसे तुम यहां की मालकिन हो!”





















Write a comment ...