
जैसे ही सात फेरे होने के बाद अव्यांश ने अफसाना के फोरहेड पर किस किया राशिका की गुस्से से मुट्ठियां कस गई थी! वो वैसे ही उन दोनों को देखकर बुरी तरह से जल रही थी और अब तो पूरी लिमिट ही क्रॉस हो गई थी और अब पंडित जी अव्यांश और अफसाना की तरफ देखते हुए बोले “अब आप दोनों वापस अपनी जगह पर बैठ जाइए क्योंकि अब सिंदूरदान और मंगलसूत्र की रस्म होगी और ये रस्में भी उतनी ही जरूरी है जितने ये सात फेरे!”
पंडित जी की बात सुनकर अव्यांश ने अफसाना को वापस उसकी जगह पर बिठाया, अफसाना के कानों में अभी भी अव्यांश के कहे हुए सात वादे ही गूंज रहे थे! उसे ऐसा लग रहा था जैसे अव्यांश ने उन वादों में उसकी पूरी जिंदगी मांग ली हो पर उसने सोच लिया था कि वो उन वादों को पूरी तरह से निभाएगी, अव्यांश के अलावा उसकी जिंदगी में और किसी चीज की कोई इंपॉर्टेंस नहीं होगी!






















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