
आराध्या अपने पेट पर अपना हाथ रखे सोच रही थी कि वो जाए तो जाए कहां? उसे अबॉर्शन पिल्स नहीं खानी थी और दक्षम ने साफ-साफ कहा था कि जब वो वापस आएगा तो उसके आने से पहले पहले आराध्या वो दवाइयां ले ले और अपने बच्चे को अबॉर्ट कर दे, ये सोच सोच कर उसका कलेजा फटने को हो रहा था और तभी उसे एक ही शख्स याद आया और वो थी धरा…
आराध्या खुद से बात करते हुए बोली "बेशक से दादी है तो मिस्टर रावत की दादी, लेकिन है तो वो एक औरत ही ना! अगर वो मेरी तकलीफ नहीं समझेंगी तो और कौन ही समझेगा? लेकिन अगर उन्होंने मिस्टर रावत को बता दिया तो? नहीं ऐसा नहीं होगा वो बहुत अच्छी औरत है! वो बहुत प्यारी हैं, हमेशा उन्होंने मुझसे प्यार से ही बात की है मेरा साथ दिया है! वो मिस्टर रावत को कुछ नहीं बताएंगी, मुझे उनकी हेल्प लेनी ही होगी…






















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