
प्रणय पाखी के ऊपर झुका हुआ उसे अपनी गहरी निगाहों से देख रहा था और पाखी के तोते उड़े हुए थे, इस वक्त उसकी आंखें पूरी तरह से खुली हुई थी लेकिन अचानक ही उसने अपनी आंखों को बंद कर लिया और बोली "मैं नींद में हूं! मैं सो रही हूं, मुझे नींद में बोलने की आदत है और मैं नींद में कुछ भी बोल सकती हूं!”
ये बोलते हुए वो ऐसे बिहेव कर रही थी जैसे वो सच में नींद में हो लेकिन प्रणय बहुत अच्छी तरह से उसकी हरकतों को समझ रहा था।





















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