
प्रणय और पाखी दोनों सीढ़ियां उतरते हुए नीचे आ रहे थे तो पाखी की नजर सीधा सोफे पर बैठे चिराग पर गई, हालांकि चिराग उनकी शादी के कुछ फंक्शंस में शामिल हुआ था लेकिन फिर भी पाखी उसे जानती नहीं थी! वो उसे जानती भी कैसे? प्रणय के अलावा उसका ध्यान कहीं और जाता ही नहीं था और जब प्रणय ने देखा कि पाखी अजीब सी नजरों से चिराग को देख रही है तो अचानक से ही उसने पाखी का हाथ कसकर पकड़ लिया!
पाखी का दिल जोरो से धड़क उठा और अगले ही पल वो प्रणय की तरफ देखते हुए बोली "क्या हुआ? आप मुझे वापस रूम में लेकर जाना चाहते हैं क्या? अगर ऐसा है तो जल्दी चलिए, वैसे भी नीचे काफी सारे मेहमान आए हुए हैं! अगर हम वहां जाएंगे तो मुझे फालतू में उनकी खातिरदारी करनी पड़ेगी, वैसे तो सारे सर्वेंट है काम करने के लिए लेकिन पूछना तो पड़ता ही है ना और आपको तो पता ही है मैं कितनी आलसी हूं! मुझे तो किसी से बात करने में भी आलस आता है…





















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