
पाखी अभी भी सोई हुई थी तो प्रणय ने उसे जगाया नहीं और पता नहीं क्यों पाखी के बिना शायद उसका भी डाइनिंग टेबल पर जाने का मन नहीं कर रहा था, हालांकि ये बात उसने कहीं नहीं थी! ना ही अपने दिल को कंफर्म की थी, बस दिल और दिमाग में जंग चल रही थी!
वो सोफे पर बैठा अपना काम कर रहा था, तभी पाखी अंगड़ाई लेते हुए बिस्तर पर उठकर बैठी और फिर प्रणय की तरफ हैरानी से देखते हुए बोली “सुबह-सुबह काम क्यों कर रहे हो आप ओ जी? सारा दिन तो आप काम करते रहते हो, कम से कम सुबह-सुबह तो कुछ और कर लीजिए!”





















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