
सुबह के लगभग से 11 बजे प्रणय अपने केबिन में पहुंचा और आते ही अपनी सीट पर बैठ गया, उसकी आंखों के सामने पाखी का चेहरा घूम रहा था! उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर नाराजगी…
सब कुछ प्रणय की आंखों के सामने बार-बार आ रहा था और ऊपर से महर का रोना, उसे वो भी परेशान कर रहा था क्योंकि कहीं ना कहीं महर की आंखों में उसकी वजह से ही आंसू थे! अगर वो पाखी को इतना नहीं सुनाता तो पाखी घर से नहीं जाती और अगर पाखी घर से नहीं जाती तो आरांश महर को इतना नहीं सुनाता!





















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