
प्रणय हैरानी से पाखी की तरफ देख रहा था जो अर्णव का हाथ अपने हाथ में पकड़ कर उसे आगे की तरफ लेकर जा रही थी और अर्णव ने भी अब उसके हाथ पर अपना हाथ थोड़ा सा कस लिया था!
उन दोनों को यूं देखकर प्रणय का दिमाग फटने को हो रहा था, उसे पाखी पर हद से ज्यादा गुस्सा आए जा रहा था और अर्णव के लिए तो उसका मन ऐसा कर रहा था जैसे वो जाकर अभी इसी वक्त उसका सिर फोड़ दे! उसकी हिम्मत भी कैसे हुई उसकी बीवी को छूने की और वो भी उसके ही सामने?





















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