
सहजा हैरानी से नाज़नीन की तरफ देख रही थी जिसके आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे, उसने नाज़नीन के कंधे पर अपना हाथ रखा और बोली "क्या हुआ है भाभी? आप इतना ज्यादा क्यों रो रही है? कम से कम मुझे बताइए तो सही, मैं अकेली मार्केट जाने वाली थी लेकिन आखिरी वक्त पर आप भी मेरे साथ घर से निकली है! सब कुछ ठीक तो है ना? मुझे बहुत टेंशन हो रही है, भाई… भाई तो ठीक है ना? मेरा… मेरा मतलब है आपकी उनसे कोई लड़ाई…
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही नाज़नीन ने अपनी आंखों से बहते हुए आंसू साफ किए और उसे देखते हुए बोली "प्लीज़ इस बारे में कुछ सवाल मत करो सहजा क्योंकि तुम्हारे सवालों का जवाब मैं नहीं दे पाऊंगी, लेकिन बस इतना समझ लो कि आज मेरा दिल और मेरा यकीन बुरी तरह से टूटा है! कुछ बातों को भुलाकर मैंने तुम्हारे भाई पर यकीन किया था लेकिन आज? आज सब खत्म हो गया और अब शायद कभी कुछ ठीक नहीं हो पाएगा, मैं तुम्हारे भाई को उन गुनाहों के लिए कभी माफ नहीं कर पाऊंगी जो उन्होंने मेरे साथ किए हैं!”






















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