
राही की बातें सुनकर ऋषि का हंस-हंसकर बुरा हाल हो रहा था, वो चाय पी रहा था और चाय का घूंट उसके मुंह से पूरी तरह बाहर निकल चुका था और दूसरा घूंट लेने की तो उसकी हिम्मत भी नहीं हो रही थी!
वही मन्नू का मुंह उतरा हुआ था, आज उसने अपनी तारीफ सुनी थी लेकिन वो तारीफ सुनकर उसका जमीन में समा जाने का मन कर रहा था।






















Write a comment ...