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4,5,6

मोहिनी जी स्तुति से उसकी सैलरी के बारे में पूछ रही थी और स्तुति को अब समझ नहीं आ रहा था कि वो मोहिनी जी को क्या जवाब दे? क्योंकि वो अपनी जॉब लगने की वजह से इतनी ज्यादा खुश हो गई थी कि उसने जॉब लेटर में मेंशन की हुई अपनी सैलरी की तरफ देखा ही नहीं और अब उसने अपने बैग में से अपना जॉब लेटर निकाला तो अगले ही पल उसकी आंखें बड़ी हो गई!

उसमें 70000 सैलरी मेंशन की गई थी, इतनी ज्यादा सैलरी तो उसने खुद से एक्सपेक्ट भी नहीं की थी! उसके होठों पर मुस्कुराहट थी क्योंकि ये 70000 उसके लिए बहुत मायने रखते थे…

उसे मुस्कुराते हुए देख मोहिनी जी की आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई थी! वो अब तुरंत उसके पास आई और अगले ही पल उन्होंने उसके हाथों से वो जॉब लेटर खींच लिया और अगले ही पल उसे पढ़ने लगी तो वो 70000 रुपए सैलरी उन्हें अच्छे से दिखाई दी!

बेशक बाकी सब इंग्लिश में होने की वजह से उन्हें कुछ समझ नहीं आया लेकिन उनकी नजर तो बस उस 70000 पर टिकी हुई थी!

वो हैरानी से बोली "इतनी सैलरी देंगे वो लोग तुम्हें? ऐसा भी क्या काम करवाएंगे वो तुमसे? कहीं कुछ ऐसा वैसा तो नहीं करवाएंगे या फिर तुमने खुद ही उन्हें कोई ऐसा ऑफर तो नहीं दिया है?”

स्तुति चौंकते हुए बोली "कैसी बात कर रही है आप मां? आप ये सब क्या सोच रही है?”

मोहिनी जी की आईब्रो अब एक बार फिर से ऊपर की तरफ उठी और बोली "मेरे कहने से पहले ही तुम सब कुछ समझ गई कि मेरे कहने का मतलब क्या है? तो इतनी तो भोली और मासूम नहीं हो तुम और इतनी पढ़ी-लिखी भी नहीं हो जो तुम्हें ये 70000 रुपए तनख्वाह में देंगे, मेरी एक बात कान खोल कर सुन लो! अगर मुझे तुम्हारे बारे में कोई भी बात सुनने को मिली ना तो मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगी और हां ये 70000 रुपए यूं के यूं तुम मेरे हाथ पर लाकर रखोगी, अगर इनमें से एक भी पैसा फालतू खर्च किया तो अपना हिसाब लगा लेना! एक तो आते ही मेरा पूरा परिवार खा गई और अब पता नहीं कैसी नौकरी ढूंढी है? ना जाने वहां जाकर क्या ही गुल खिलाएगी?” ये बोलकर उन्होंने वो जॉब लेटर वहां पर रखा और अंदर की तरफ चली गई!

तभी वहां एक छोटी सी आवाज गूंजी “चाची!!”

वो आवाज सुनते ही स्तुति ने सामने की तरफ देखा जहां पर लगभग से 4 साल का एक छोटा सा बच्चा खड़ा था जिसका नाम था निशांत!

निशांत को देखते हुए वो मुस्कुराई! हां स्तुति उसकी चाची थी जो आज से लगभग एक महीना पहले ही इस घर में आई थी, लेकिन उसके आने के दूसरे दिन ही एक ऐसा हादसा हुआ जिसमें उस घर के तीन लोगों की जान चली गई!

अचानक से ही वो सब स्तुति की आंखों के सामने घूमने लगा था और उसकी आंखों में नमी तैरने लगी थी!

तभी निशांत आकर उसके पैरों से लिपट गया और बोला "आपको पता है चाची मैं आपको कब से मिस कर रहा था, एक्चुअली मुझे मैगी खाने का मन कर रहा है! क्या आप मेरे लिए मैगी बना दोगी? मैंने दादी से कहा था लेकिन वो काम कर रही थी तो उन्होंने कहा कि जब तुम आ जाओगी तब तुम ही मुझे मैगी बना कर दोगी!”

स्तुति ने उसे अपनी गोद में उठाया और मुस्कुराते हुए बोली "हां वो शायद काम में बिजी होगी, पर कोई बात नहीं अब मैं आ गई हूं ना! अब मैं तुम्हें मैगी बनाकर खिलाती हूं, बताओ कौन सी वाली मैगी खाओगे वेजिटेबल्स वाली या फिर चीज़ वाली?”

निशांत एक्साइटेड होकर बोला "चीज़ वाली!”

स्तुति मुस्कुराई और बोली "तुम जाओ जाकर अंदर अपना टीवी देखो, मैं अभी तुम्हारे लिए चीज़ मैगी बनाकर लेकर आती हूं!”

निशांत ने सिर हिलाया और फिर वहां से चला गया! स्तुति अब किचन में आ गई, किचन में आकर उसने गैस पर एक बर्तन रखा और उसमें मैगी बनाने लगी!

उसने एक नहीं दो पैकेट मैगी बनाई ताकि वो थोड़ी सी मैगी खुद भी खा सके और मोहिनी जी को भी खिला सके!

मैगी बनाते हुए भी उसकी आंखों में नमी ही तैर रही थी!

तकरीबन 10 मिनट बाद वो एक छोटी सी प्लेट लेकर मोहिनी जी के कमरे में आई और हल्का सा मुस्कुरा कर बोली "निशांत के लिए मैगी बनाई थी मां इसलिए सोचा आपके लिए भी थोड़ी सी बना दूं!”

मोहिनी जी मुंह बनाते हुए बोली "हां रोटी बनाने में तो तुम्हें आलस आ रहा होगा इसलिए सोचा बस इधर-उधर के गंद से बच्चे का पेट भर दूं! पर मेरे साथ ये सब नहीं चलेगा, मुझे खाना ही खाना है! जाओ मेरे लिए ढंग का खाना बनाओ…

स्तुति ने अपना सिर हिलाया और वहां से जाने लगी लेकिन फिर जाते-जाते अचानक से रुकी और वापस पलट कर बोली "तो फिर मैं ये वाली मैगी अपने साथ ले जाऊं?”

मोहिनी जी झट से बोली "क्यों? अपने मायके वालों को जाकर खिलाओगी?”

स्तुति ने अपनी नजरें झुका ली! मोहिनी जी मुंह बनाकर बोली "जाओ जाकर खाना बनाओ, ये यहीं पर रखी रहने दो! अब बन गई है तो खानी ही पड़ेगी, बर्बाद थोड़ी ना करूंगी… तुम्हारी तरह नहीं हूं जो हर चीज को बर्बाद कर दूं! बेशक से फिर खाने की चीज हो या फिर किसी की खुशियां, किसी का घर…

उनकी बातें सुनते स्तुति की आंखों में एक बार फिर नमी आ गई थी, अब वो चुपचाप बाहर की तरफ आ गई और किचन में आकर खाना बनाने लगी!

फिलहाल वो खुद थोड़ी थकी हुई थी इसलिए 10-15 मिनट रेस्ट करना चाहती थी, लेकिन आराम और सुकून शायद ये दो ऐसी चीजें थी जो अब उसकी जिंदगी से हमेशा के लिए जा चुकी थी।

वहीं दूसरी तरफ

शाम के लगभग से 7 बजे

वैभव डाइनिंग टेबल पर बैठा था और सरगम बिल्कुल उसके सामने बैठी थी! तभी वो सर्वेंट की तरफ देखते हुए बोली "अरे तुम्हें दिखाई नहीं देता क्या? उसका जूस खत्म हो गया, जल्दी से उसके गिलास में जूस डालो!”

वैभव तुरंत बोला "रहने दीजिए सरगम आंटी इतना काफी है, मुझे और जूस नहीं पीना! अब मैं बस चलता हूं…

सरगम तुरंत बोली "अरे ऐसे कैसे? पहले ये खीर तो खाकर जाओ, ये मैंने स्पेशली तुम्हारे लिए ही बनवाई थी! खाकर बताओ कैसी बनी है?” ये बोलते हुए उसने खुद से सामने रखी खीर की कटोरी उठाई और वैभव के सामने रख दी!

ये पहली बार नहीं था जब वैभव की ऐसी खातिरदारी हो रही थी, उसकी चौहान मेंशन में दो तरह की खातिरदारी होती थी! एक जब उसे छप्पन भोग खिलाए जाते थे और दूसरी जब उसे तरह-तरह की गालियां सुनाई जाती थी….

पर उसे छप्पन भोग खिलाने वाली हमेशा सरगम होती थी और गालियां? गालियां तो किसी से भी खा लेता था, कभी-कभी तो सरगम से भी और ज्यादातर रिदांश से!

अब सरगम अब थोड़ा सा टेबल पर झुकते हुए बोली "अच्छा मुझे ये बताओ तुम्हारे पास उस स्तुति की कोई पिक्चर वगैरा है क्या? नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मुझे बहुत जल्दी है, बस एक बार आंखों से निहार लेती तो थोड़ी दिल को तसल्ली हो जाती! अब कल को मान लो मैं बाजार जाऊं और मुझे बाजार में वो लड़की मिल जाए तो कम से कम मैं उसे पहचान तो लूंगी ना? वरना तुम तो जानते ही हो अब मेरी उम्र होने लगी है, सामने से चौहान साहब भी निकल जाए तो पता नहीं चलता!”

ये बोलते हुए उसने अचानक ही सामने की तरफ देखा जहां से अभी-अभी दरवाजे से स्वर अंदर की तरफ आया और एक पल के लिए वो हॉल में रुका और फिर सीधा अपने रूम में चला गया!

सरगम का दिल जोरो से धक-धक करने लगा मतलब आज भी स्वर का मूड खराब है!

वैभव के हाथ भी उस खीर की कटोरी पर थोड़े कस गए थे, उसने जल्दी से दो चम्मच खीर के अपने मुंह में डालें और फिर सरगम की तरफ देखते हुए बोला "सॉरी आंटी लेकिन मेरे पास उनकी कोई पिक्चर तो नहीं है, पर हां कल वो ऑफिस आएंगी तो मैं उनकी एक पिक्चर आपको भेज दूंगा!”

सरगम तुरंत अपनी जगह से उठी और बोली "हां हां ठीक है! अब तुम जाओ… ये बोलकर उसने एक नजर वैभव को देखा भी नहीं और जल्दी से सीढ़ियां चढ़ते हुए सीधा अपने रूम में आई!

वहीं स्वर अपनी शर्ट के बटन खोल रहा था, सरगम ने दरवाजा बंद किया और उसकी तरफ देखते हुए बोली "क्या हुआ चौहान साहब? आप इतने गुस्से में क्यों है?”

स्वर गुस्से से कांपते हुए बोला "गुस्सा नहीं तो और क्या नाचू मैं यहां पर? तुम्हें पता है आज क्या हुआ? वो अधिराज कपूर आज मेरी धड़कन का बिजनेस पाटनर बना है, Can you believe it? जो इंसान मुझे एक नजर नहीं पसंद मेरी बेटी उसकी बिजनेस पार्टनर बनेगी! उसके साथ काम करेगी, उसके साथ मीटिंग अटेंड करेगी और ना जाने क्या-क्या… मेरा मन तो कर रहा है कि मैं ना जाकर उस अधिराज कपूर को जिंदा जला दूं!”

उसका गुस्सा देखते हुए सरगम के चेहरे पर भी डर झलक रहा था, मतलब आज तो स्वर के अंदर तक आग लगी हुई है क्योंकि स्वर अधिराज से कितनी नफरत करता है ये उसे बहुत अच्छी तरह से पता था लेकिन क्यों करता है ये नहीं मालूम था।

अब वो आगे की तरफ आई और उसकी चेस्ट पर अपना हाथ रखते हुए बोली "शांत हो जाइए चौहान साहब, क्यों इतना गुस्सा कर रहे हैं? अगर आपकी धड़कन ने किसी चीज को एक्सेप्ट किया है इट मींस वो इस चीज के लिए रेडी है! वरना वो इस चीज को एक्सेप्ट करती ही नहीं, ये पार्टनरशिप उसकी मर्जी के बिना तो नहीं हुई होगी? ऐसा तो नहीं कि किसी ने उसके साथ जबरदस्ती की होगी… वो अगर किसी प्रोजेक्ट में उसके साथ पार्टनर बनी है तो वो उस प्रोजेक्ट से स्टेप बैक भी कर सकती थी ना? लेकिन उसने ऐसा नहीं किया इट मींस वो इस चैलेंज के लिए पूरी तरह से रेडी है और जब आपकी धड़कन को कोई टेंशन नहीं है तो आप इतनी टेंशन क्यों ले रहे हैं?”

स्वर उसकी बातें सुनकर थोड़ा शांत हो गया था! सरगम अब कुछ सोचते हुए बोली "और मुझे तो ये समझ में नहीं आता कि आप उस अधिराज कपूर से इतनी नफरत क्यों करते है? आखिर बात क्या है चौहान साहब? जरा मुझे भी तो बताइए, आखिर मुझे पता चले कि इस अधिराज कपूर ने कांड क्या किया है? अगर सच में इसने ऐसा कुछ किया होगा जो इसे पीटने के लायक हुआ तो आपका तो पता नहीं, लेकिन मैं पक्का इसे जाकर पीट दूंगी!”

उसकी बात सुनकर स्वर की आंखों के सामने कुछ तस्वीरें चलने लगी थी लेकिन अगले ही पल उसने अपना चेहरा ना में झटकाया और बोला "कुछ नहीं! ऐसा कुछ खास नहीं है और मैं भी किन बातों में लगा हुआ हूं? तुम मेरे सामने हो और मैं बातें कर रहा हूं, अब तक तो मुझे तुम्हें लपक लेना चाहिए था… ये बोलकर उसने तुरंत उसकी कमर पर अपना हाथ रखा और उसे अपने बिल्कुल करीब खींच लिया!

सरगम झट से बोली "अरे क्या कर रहे हो आप चौहान साहब? मुझे नीचे जाना है, अभी बच्चे आने वाले होंगे उनको खाना खिलाना है! अभी आप छोड़िए मुझे…

स्वर तुरंत बोला "तुम्हारे बच्चे कोई 2 साल के नहीं है जिन्हें तुम अपने हाथों से खिलाओगी और एक नमूना तो उनमें से ऐसा है जो घर में खाता ही नहीं है! लंच डेट किसी और के साथ, डिनर डेट किसी और के साथ और बीच में स्नेक्स डेट भी किसी के साथ मार रहा होता है!”

ये बोलते हुए वो किसके बारे में बात कर रहा था ये सरगम बहुत अच्छी तरह से जानती थी! ओबवियसली रिदय के बारे में….

वो जल्दी से बोली "ऐसा कुछ नहीं है! इतना भी बिगड़ा हुआ नहीं है मेरा बच्चा, आप बेवजह उस पर इल्जाम मत लगाइए!”

स्वर तुरंत बोला "ओह रियली? अच्छा जरा उसे फोन करना और पूछना कहां है तुम्हारा प्यारा सा नन्ना मुन्ना बच्चा?”

उसकी बात पर सरगम के होश उड़ गए लेकिन अब वो मना कैसे ही कर सकती थी? इसलिए उसने साइड में रखा हुआ अपना फोन उठाया और अगले ही पल वापस स्वर के सामने आकर खड़ी हो गई! उसने अब अपने फोन से रिदय को कॉल किया…

वहीं दूसरी तरफ

रिदय जो इस वक्त क्लब में था! जैसे ही उसके फोन पर सरगम का फोन आया उसके चेहरे का रंग उड़ गया! क्लब में इतना लाउड म्यूजि

क चल रहा था और वो जानता था कि ये कॉल सिर्फ सरगम उसे नहीं कर रही, पक्का स्वर भी उसके साथ ही होगा…..


बोल्ड 18 क्लब

रिदय इस वक्त क्लब में था! तभी उसके फोन पर सरगम का फोन आया और वो बहुत अच्छी तरह से जानता था कि ये फोन सिर्फ सरगम ने उसे नहीं किया बल्कि स्वर भी उसके साथ ही होगा और फिलहाल वो क्लब में था तो वहां पर लाउड म्यूजिक तो होना ही था और ऐसे लाउड म्यूजिक में वो उनका कॉल रिसीव नहीं कर सकता था, लेकिन अगले ही पल उसके चेहरे पर एक गहरी मुस्कराहट तैर गई!

उसने अपने सामने खड़े एक शख्स की तरफ देखा, उसने भी अपनी आईब्रो ऊपर की तरफ उठाई! वो शख्स मिराज धीमी सी आवाज में बोला "क्या हुआ?”

लेकिन रिदय ने उसके सवाल का कोई जवाब नहीं दिया बल्कि मिराज के हाथ से उसका फोन लिया और फिर साइड में चला गया!

वो लिफ्ट में आया और अब तक सरगम का कॉल तो डिस्कनेक्ट हो चुका था, लेकिन उसने खुद से ही सरगम को दोबारा बैक कॉल किया!

अगले ही पल सरगम के कानों में भजन की आवाज गूंजने लगी! रिदय के हाथ में मिराज का फोन भी था जिस पर उसने भजन चला रखा था “हे माता रानी तेरे भक्त है हम….

जैसे ही सरगम ने वो भजन सुना उसकी नज़रें तुरंत स्वर की तरफ उठ गई और स्वर की भी आईब्रो ऊपर उठ गई थी, भला उसने ये कौन सा कनेक्शन कहा जोड़ दिया? आखिर ये पॉसिबल भी कैसे हो सकता है कि रिदय जैसा इंसान किसी जागरण कीर्तन में पहुंच जाए?

उसने तुरंत सरगम का फोन अपने हाथ में लिया और बोला "लगता है तुमने गलत नंबर मिला दिया!”

अभी वो बोल ही रहा था कि सामने से रिदय की आवाज आई “मॉम मैं यहां एक कीर्तन में आया हुआ हूं, एक्चुअली मेरे फ्रेंड के घर पर कीर्तन है तो मैं आपसे बाद में बात करता हूं हां! यहां पर काफी ज्यादा शोर है और मैं आपको घर आकर बताता हूं कि मुझे यहां पर कितना अच्छा लग रहा है कितना सुकून मिल रहा है, आह्ह्ह!!! उम्मम!! मजा ही आ गया… ये बोलते हुए उसके चेहरे पर सच में प्लेजर नजर आ रहा था लेकिन वो प्लेजर उसे किसी कीर्तन में नहीं बल्कि किसी लड़की के छूने की वजह से आ रहा था!

वो जिस लिफ्ट में था वहां पर एक लड़की ऑलरेडी थी और अब वो उसकी चेस्ट पर अपनी उंगलियां चला रही थी! रिदय भी अपनी नशीली सी नजरों से उस लड़की की तरफ देख रहा था!

तभी सामने से सरगम की आवाज आई “ओके बेटा तुम अपना कीर्तन एंजॉय करो, जब तुम्हारा मन करे तब घर आ जाना कोई जल्दबाजी नहीं है हां! अच्छे से इंजॉय करके आना और माता रानी से आशीर्वाद भी लेकर आना!” ये बोलकर उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया!

स्वर सरगम की तरफ देखते हुए बोला "कुछ तो गड़बड़ है वरना शेर घास खाए ऐसा हो ही कैसे सकता है?”

सरगम मुंह बनाते हुए बोली "उस शेर का तो पता नहीं लेकिन मुझे लगता है कि ये वाला शेर बूढ़ा हो गया है और इसका दिमाग घूम गया है, कोई अपने ही बच्चों के बारे में इस तरह की घटिया बातें कैसे कर सकता है? उन पर घटिया इल्जाम कैसे लगा सकता है? वो आपका ही बेटा है चौहान साहब, मैंने नेट से डाउनलोड नहीं किया है जो गलत डाउनलोड हो गया और आप अब उसकी दूसरी फाइल चाहते हैं!” ये बोलते हुए उसने मुंह बनाया हुआ था!

स्वर उसे गहरी निगाहों से देखते हुए बोला "अभी मैं तुम्हें अपना बुढ़ापा दिखाऊं क्या? जिसे देखकर तुम तुरंत बोलोगी ओह गॉड चौहान साहब आपका बुढ़ापा तो अभी भी बहुत अच्छे से मुझे सेटिस्फाई करता है! आई लव योर बुढ़ापा…

उसकी बात सुनकर सरगम ने मुंह बनाया और बोली "मैं चली नीचे! मुझे अपने बाकी बच्चों को खाना खिलाना है, धड़कन का मूड आज खराब होगा इसलिए पहले मुझे उसे संभालना है… आप अपनी ये फालतू की बातें खुद से ही करते रहिए!” ये बोलकर वो तुरंत वहां से बाहर की तरफ चली गई!

अगर स्वर चाहता तो उसे रोक सकता था लेकिन उसने धड़कन का नाम लिया तो उसने उसे नहीं रोका, सरगम सही कह रही थी! फिलहाल उसे धड़कन को संभालना था क्योंकि सच में उसका मूड काफी ज्यादा खराब होने वाला था!

वहीं दूसरी तरफ

क्लब में

रिदय उस लड़की की तरफ देखते हुए बोला "वैसे नाम क्या है तुम्हारा?” ये बोलते हुए उसने उसकी कमर पर अपना हाथ रखा और उसे अपने करीब खींच लिया!

उस लड़की ने अपने बालों को एक तरफ घुमाया और उसकी गर्दन को चूमते हुए बोली "मनीषा!”

जैसे ही उसने कहा अगले ही पल रिदय ने उसे धक्का दिया और बोला "मुझे मनीषा नाम की लड़कियों से सख्त नफरत है, बहुत गंदे वाला कांटती है ये नाम की लड़कियां… ये बोलकर वो लिफ्ट से बाहर की तरफ बढ़ गया!

उसके दरवाजे के पास पहुंचते ही दरवाजा खुल गया था, लेकिन वो बाहर निकलता उससे पहले ही मनीषा गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए बोली "हाउ डेयर यू? तुम्हारी हिम्मत भी कैसे हुई मुझे धक्का देने की? बदतमीज कहीं के!”

रिदय कोई जवाब देता उससे पहले ही उसकी नजर अपने सामने खड़ी दूसरी लड़की पर गई जो वही लड़की थी, जो उससे होटल में टकराई थी!

जैसे ही उसने उसे देखा वो हल्का सा मुस्कुरा कर बोला "ओह तो तुम यहां पर भी!”

वो लड़की उसकी तरफ देखते हुए बोली “पहले तो मुझे लगा था कि शायद तुम मेरे साथ गलती से टकराए थे, लेकिन अब तो मुझे समझ में आ गया कि शायद लड़कियों के साथ टकराना तुम्हारी आदत है ताकि तुम्हारी उनसे बातें बढ़ सके! तुम उनके करीब जा सको… उन्हें इधर-उधर टच कर सको इट मींस मैंने तुम्हें सच में बिल्कुल सही नाम दिया था झींगुर!”

उसकी बात पर रिदय के चेहरे पर अब कन्फ्यूजन भरे एक्सप्रेशन थे क्योंकि झींगुर का मतलब था हॉट सेक्सी एंड अट्रैक्टिव लेकिन उसकी बातों का मतलब तो कुछ और ही निकल रहा था!

वो उसकी तरफ देखते हुए बोला "देखो एक तरफ तुम मुझे बुरा भला कह रही हो और एक तरफ मेरी तारीफ भी कर रही हो, तो पहले खुद सोच लो कि तुम्हें करना क्या है?”

उस लड़की की आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई, भला उसने रिदय की तारीफ कब की?

वही पीछे से मनीषा रिदय को अपनी तरफ खींचते हुए बोली "मनीषा नाम की लड़कियों का तो पता नहीं, लेकिन तुम हद से ज्यादा बदतमीज और बेहूदा किस्म के इंसान हो! मैं तुम्हें छोडूंगी नहीं… दोबारा कभी मुझे मिल मत जाना, मैं तुम्हारा सिर फोड़ दूंगी!”

ये बोलकर वो बाहर आई और फिर उस लड़की का हाथ पकड़ कर बोली "चलो यहां से!” ये बोलकर वो उसे वहां से ले गई थी और वो लड़की भी उसके साथ चली गई थी लेकिन पलट कर वो पीछे रिदय की तरफ भी देख रही थी और रिदय की गहरी नजरे भी उस पर थी!

वो अभी भी कंफ्यूजन में था कि वो लड़की उसकी तारीफ कर कर गई या फिर उसकी बेइज्जती? उसने गुस्से से मुंह बनाया हुआ था….

वहीं दूसरी तरफ

धड़कन अपने रूम की तरफ जा रही थी! वो अभी-अभी घर वापस लौटी थी, तभी सरगम जो सीढ़ियां उतर रही थी वो उसकी तरफ देखते हुए बोली "1 मिनट रुको!”

धड़कन उसकी बात सुनकर रुक गई और हल्का सा मुस्कुराई! सरगम अब उसके पास आई और उसके गाल पर अपना हाथ रख कर बोली "कैसा रहा तुम्हारा आज का दिन?”

धड़कन खुश होते हुए बोली "कैसा रहेगा मॉम? जैसे नॉर्मल दिन होते हैं बिल्कुल वैसा ही, थोड़ा अच्छा था थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड था थोड़ी टेंशन भी थी लेकिन आफ्टर ऑल पूरा दिन बीत गया और फाइनली मैं घर हूं! थकी हुई हूं और अब बस सोना चाहती हूं, आप एक काम कीजिएगा मेरा खाना मेरे रूम में ही भिजवा दीजिएगा!”

सरगम झट से बोली "नहीं मैं रूम में तुम्हारा खाना नहीं भेजूंगी, कल भी मैंने तुम्हारा खाना तुम्हारे रूम में भिजवाया था लेकिन तुमने जरा सा भी नहीं खाया इसलिए आज तुम मेरे सामने बैठकर डिनर करोगी! चलो जल्दी से फ्रेश होकर आ जाओ, मैं तब तक तुम्हारे लिए डिनर लगवाती हूं… शायद रिदांश भी अब तक आ चुका होगा!”

धड़कन एक बार फिर से बोली "सॉरी मॉम मैं आपके साथ बैठकर जरूर डिनर करती, लेकिन सीरियसली मैं बहुत ज्यादा थक गई हूं! कल तो मैं प्रोजेक्ट की वजह से टेंशन में थी इसलिए मैंने खाना नहीं खाया लेकिन आज मैं पक्का खा लूंगी, आप मेरे रूम में खाना भिजवा दीजिएगा और आई लव यू!” ये बोलकर अब वो मुस्कुराई और अगले ही पल उसने सरगम के गाल को बड़े ही प्यार से चूम लिया!

सरगम को जैसे सुकून मिल गया! धड़कन ही तो थी वो जिसने उसे ममता का एहसास करवाया, उसके सामने तो अब वो सब कुछ भूल गई!

धड़कन मुस्कुराते हुए अपने रूम की तरफ बढ़ गई और सरगम कुछ देर यूं ही अपनी जगह पर खड़ी रही, शायद सच में धड़कन बहुत ज्यादा थक गई होगी और डिनर के लिए बाहर आने का उसका मन नहीं होगा ये सोचकर अब उसने उसके लिए डिनर प्रिपेयर करवाया और रूम में ही भिजवा दिया!

सर्वेंट टेबल पर खाना रख कर चली गई थी लेकिन धड़कन बालकनी में खड़ी थी और उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठा हुआ था!

उसने एक नजर उस खाने को देखा भी नहीं था और उसकी आंखों के सामने अधिराज का चेहरा घूम रहा था, अगले ही पल उसका चेहरा गुस्से से कांपने लगा…

वो बेहद गुस्से और फ्रस्ट्रेशन भरी आवाज में बोली "जिस इंसान की मुझे शक्ल देखना भी पसंद नहीं, मुझे उस इंसान के साथ अब काम करना पड़ेगा! आई डोंट नो मॉम मैं ये सब कैसे करूंगी? लेकिन मैं आपकी और डैड की बेटी हूं जिसने आज तक कभी हार नहीं मानी तो आज कैसे हार मान जाऊंगी? आप लोग हो ना मेरे साथ तो मैं सब कुछ हैंडल कर लूंगी, अपनी सारी प्रॉब्लम्स को भी और मिस्टर अधिराज कपूर को भी लेकिन उसे खुद से जीतने तो मैं बिल्कुल नहीं दूंगी! I just hate this man, I just hate this man… ये बोलते हुए उसकी आंखों में अधिराज के लिए अब एक अलग ही नफरत नजर आ रही थी!

उसने पूरा दिन अच्छे से बिताया लेकिन ऐसा नहीं था कि वो बिल्कुल नॉर्मल थी, पर उसे लोगों के सामने नॉर्मल रहने की आदत थी! वो यूं ही किसी के सामने अपना दिल खोलकर नहीं रखती थी पर अब वो अपने दिल की बातें बोलकर अंदर की तरफ आई!

अगले ही पल उसकी नजर खाने पर गई, उसने सरगम से प्रॉमिस किया था कि वो खाना खायेगी पर उसका खाना खाने का बिल्कुल भी मन नहीं था इसलिए उसने सारा खाना उठाया और डस्टबिन में डाल दिया ताकि सरगम को पता ही ना चले! कल वाली मिस्टेक वो दोबारा नहीं करना चाहती थी और कल भी उसने इसलिए नहीं खाना खाया था क्योंकि उसे प्रोजेक्ट को लेकर टेंशन हो रही थी, कल भी वो अधिराज के बारे में सोच सोच कर ही परेशान हो रही थी!

अब वो आकर बिस्तर पर लेटी और कुछ ही देर में गहरी नींद में भी चली गई!

वहीं दूसरी तरफ

रिदांश की गाड़ी पार्किंग एरिया में आकर रुकी और वो भी अब अंदर की तरफ आया, उसकी आंखें इस वक्त गहरी लाल नजर आ रही थी जिसका मतलब साफ था कि वो ड्रिंक करके आया है!

सरगम जो किचन की तरफ जा रही थी, जैसे ही उसने रिदांश के कदमों की आहट सुनी उसके खुद के कदम एक पल के लिए रुक गए थे!

वही रिदांश की नजरे भी उस पर थी, लेकिन शायद सरगम को पता ही ना लगे ये सोचकर वो अब अपने धीमे-धीमे कदमों से अपने रूम की तरफ जा रहा था!

वो ऑलमोस्ट सीढ़ियों तक पहुंच चुका था, तभी पीछे से सरगम ने उसे आवाज लगाई “मुझे पता है तुम घर में आ चुके हो रिदां

श और ये भी पता चल चुका है कि तुम ड्रिंक करके आए हो!”

उसकी बात सुनकर रिदांश ने एक गहरी सांस ली!

सरगम की बात सुनकर रिदांश ने एक गहरी सांस ली!

वही सरगम अब उसके पास आई और उसकी तरफ देखते हुए बोली "तुमने मुझसे वादा किया था रिदांश कि तुम अब ड्रिंक नहीं करोगे लेकिन फिर भी तुम आज ड्रिंक करके आए! अगर तुमने अपना वादा निभाना ही नहीं था तो तुमने मुझसे वादा किया क्यों?”

उसकी बात पर अब रिदांश उसकी तरफ घुमा और बोला "क्योंकि मैं आपका दिल नहीं तोड़ना चाहता था!”

सरगम ने तुरंत पूछा “और जो वादा तोड़ा उसका क्या?”

रिदांश एक गहरी सांस लेकर बोला "क्योंकि मैं खुद को भी नहीं रोक सकता, मुझे अपने हिसाब से जीना है मॉम! अब मैं कोई छोटा बच्चा नहीं हूं जो आपके हिसाब से जिऊंगा, आपके हिसाब से चीज करूंगा… अगर मैं आपकी बात मान रहा हूं तो इसलिए क्योंकि मैं आपसे प्यार करता हूं, लेकिन मैं हर चीज आपके हिसाब से करूंगा इसका मतलब ये हुआ कि मैं खुद से प्यार नहीं करता और रिदांश चौहान खुद से बहुत प्यार करता है! इन फैक्ट वो सबसे ज्यादा प्यार खुद से ही करता है और हर इंसान को करना भी चाहिए और एक चीज और जो हर इंसान को करनी चाहिए, वो ये है कि उसे कभी भी दूसरों को अपने अकॉर्डिंग जीने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए! आई होप आप मेरी बात समझ रही होंगी?”

सरगम हल्का सा मुस्कुराई और बोली "कुछ ज्यादा ही बड़े हो गए हो तुम!”

रिदांश ने कुछ नहीं कहा!

सरगम ने अब एक नजर डाइनिंग टेबल की तरफ देखा और बोली "सब लोगों ने डिनर ऑलरेडी कर लिया है, मैं तुम्हारा वेट कर रही थी! आओ डिनर कर लो…

रिदांश उसके पास आया और उसका हाथ पकड़ कर बोला "मुझे भूख नहीं है मॉम लेकिन आपके लिए मैं दो निवाले खा सकता हूं क्योंकि जानता हूं अगर मैं ऐसे सोऊंगा तो नींद आपकी भी डिस्टर्ब होगी! आप प्यार जो करती है मुझसे लेकिन किसी से इतना भी प्यार नहीं करना चाहिए मॉम कि उस इंसान की वजह से आपकी लाइफ इफेक्ट हो, केयर करना और प्यार करना एक अलग बात है लेकिन सामने वाले के लिए अपनी पर्सनल लाइफ को डिस्टर्ब करना बहुत गलत बात है!”

सरगम हंसकर बोली "मैं तो यूं ही बोल रही थी कि तुम बहुत बड़े हो गए, लेकिन अब तुम्हारी बातों से लग रहा है कि तुम तो अपनी मॉम से भी बड़े हो गए! हां मैं जानती हूं अगर तुम खाना नहीं खाओगे तो मेरी नींद डिस्टर्ब होगी, मेरा दिल तुम्हारे लिए बेचैन रहेगा लेकिन मैं कैसे रोकूं खुद को हां? किसी दिन जब मेरी जगह पर तुम रहोगे तब तुम्हें पता चलेगा कि अपने बच्चों की लाइफ डिस्टर्ब हो तो पेरेंट्स की लाइफ खुद ब खुद डिस्टर्ब…

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही रिदांश बेहद कड़क आवाज में बोला "किसने कहा आपसे कि मेरी लाइफ डिस्टर्ब है? नो मॉम बिल्कुल भी नहीं! मेरी लाइफ बिल्कुल भी डिस्टर्ब नहीं है, I am the happiest person on earth… Believe me! अगर आपको मेरी बातों पर ट्रस्ट नहीं होता तो ये आपकी चॉइस है, इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता लेकिन मैं जैसा हूं जहां हूं जो हूं खुश हूं और मुझे किसी दूसरे की कोई जरूरत नहीं और हां अब तक तो मैं दो निवाले खाने की बात कर रहा था लेकिन अब मुझसे वो भी नहीं खाया जाएगा मॉम सो गुड नाइट!”

ये बोलकर वो उसके बिल्कुल करीब आया और अगले ही पल उसने सरगम का माथा हल्का सा चूम लिया!

सरगम की आंखें नमी से भर गई थी लेकिन उसने कुछ कहा नहीं और रिदांश अब अपने रूम की तरफ बढ़ गया!

सरगम उसे जाते देख बोली "तुम्हें लगता है रिदांश कि तुम्हें किसी की जरूरत नहीं, लेकिन अगर मेरी निगाहों से देखोगे तो तुम्हें समझ में आएगा कि तुम्हें किसी की बहुत ज्यादा जरूरत है एंड आई होप तुम्हारी लाइफ में जल्दी ही कोई आए और उस जरूरत को पूरा करें क्योंकि मैं तुम्हें ऐसे बिल्कुल नहीं देख सकती!” ये बोलते हुए उसने अपनी आंखों से बहते आंसू साफ किए!

अब वो दूसरी तरफ घूमी, उसने सामने सर्वेंट की तरफ देखते हुए पूछा “बाकी सब ने खाना खा लिया था ना?”

एक सर्वेंट ने अपना सर हां में हिलाया!

सरगम ने एक गहरी सांस ली और बोली "तो ठीक है! मेरे और मिस्टर चौहान के लिए खाना बना दो, ऊपर ले जाऊंगी… उसकी बात सुनकर वो सर्वेंट तुरंत अंदर की तरफ चली गई!

तकरीबन 5 मिनट बाद खाने की एक ट्राली लेकर वो सर्वेंट बाहर आई और अब वो ट्रॉली लेकर सरगम अपने रूम में आ गई थी!

स्वर उसका ही इंतजार कर रहा था, जब उसने सरगम को ट्रॉली के साथ देखा तो वो हल्का सा फीका मुस्कुरा कर बोला "मतलब आज भी उसने खाना नहीं खाया?”

सरगम को ऐसा लगा जैसे उसके जख्म एक बार फिर से हरे हो गए! वो सोफे पर खाना लगाते हुए बोली "शायद बाहर से कुछ खा कर आया होगा!”

स्वर एक गहरी सांस लेकर बोला "हां वैभव से पता चला शाम के 7 से लेकर रात के 9 बजे तक वो क्लब में था, अब ड्रिंक के साथ कुछ खाया भी तो होगा ही…. पर शायद वो ड्रिंक के साथ स्नैक्स लेता ही नहीं!” उसकी बात पर सरगम का चेहरा मायूस हो गया!

स्वर अब उसकी तरफ आया और बोला "अब तक मैं चुप था हार्टबीट क्योंकि मुझे लग रहा था तुम उसे संभाल लोगी, लेकिन अब मुझे लगता है कि मुझे ही कुछ करना होगा बिकॉज उसे मैं भी यू नहीं देख सकता!”

सरगम की आंखों में एक बार फिर से नमी तैर गई लेकिन अगले ही पल उसके चेहरे पर गुस्सा था!

वो दांत पीसते हुए बोली "ये सब मेरी वजह से है! अगर मैंने उसके बचपन में आपकी बात मानी होती तो ये सब नहीं होता लेकिन नहीं, मुझे तो बस आपसे अपनी बात मनवानी थी और आज मेरी एक गलती की वजह से…

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही स्वर ने उसे अपने सीने से लगाया और बोला "इट्स ओके! उसकी उम्र ही ऐसी थी कि ये सब कुछ नॉर्मल है, लेकिन अब उसे समझना होगा कि किसी एक इंसान की वजह से तुम्हारी लाइफ रुक नहीं जाती! एक वक्त ऐसा था मेरी लाइफ में जब मैंने भी खुद को रुका हुआ महसूस किया था, निहारिका की वजह से मैं सब चीजों से दूर हो गया था लेकिन तुम मेरी लाइफ में आई तो मैं दोबारा जीने लगा! पर उसके लिए अब मैं इंतजार नहीं कर सकता कि कब उसकी लाइफ में कोई आएगा और वो दोबारा अपनी जिंदगी जिएगा, मुझे कुछ ना कुछ करना होगा हार्टबीट और अब मैं और इंतजार नहीं करूंगा!” उसकी बात पर सरगम ने अपना सिर हिलाया!

स्वर ने अब उसका हाथ पकड़ा और उसे लेकर सोफे पर बैठ गया, बेशक से उन दोनों का ही खाने का मन नहीं था लेकिन वो जानते थे कि अपने बच्चों को संभालने के लिए उन्हें पहले खुद को संभालना होगा क्योंकि रिदय तो बेशक से अभी अपनी लाइफ किसी मस्त मौला की तरह जी रहा था लेकिन धड़कन और रिदांश दोनों को ही उनकी बहुत जरूरत थी! बेशक से वो दोनों कुछ कहते नहीं थे लेकिन उन दोनों के अंदर ही अंदर एक तूफान चल रहा था, ऐसा तूफान जो अब अपना विकराल रूप लेने वाला था…

सुबह का वक्त,

लगभग से 7 बजे

Apex Building,

स्तुति किचन में थी और जल्दी-जल्दी अपने हाथ चला रही थी! उसे निशांत के लिए टिफिन बनाना था, निशांत को कुछ दिन पहले ही उसने प्री नर्सरी में डाला था! उसका स्कूल फ्लैट से ज्यादा दूर नहीं था, बस बिल्डिंग से बाहर निकलते ही कुछ कदमों की दूरी पर था जहां पैदल भी जाया जा सकता था लेकिन सुबह तो वो उसे छोड़ने जा सकती थी… पर अब स्तुति को टेंशन दोपहर की हो रही थी! पहले तो वही उसे लेने जाती थी लेकिन अब तो वो अपनी जॉब पर होगी तो वो भला निशांत को लेने कैसे ही जाएगी?

कुछ सोचते हुए उसने चाय का कप अपने हाथ में लिया और फिर मोहिनी जी के रूम में आई जहां वो आराम से बिस्तर पर बैठी अपना फोन इस्तेमाल कर रही थी!

स्तुति ने नजरे झुकाते हुए प्रणाम मां कहा और चाय का कप साइड टेबल पर रख दिया, उसने अपने बालों को टॉवल में बांधा हुआ था और ग्रीन कलर की साड़ी में वो इस वक्त काफी प्यारी भी लग रही थी।

मोहिनी जी ने एक नजर उठाकर उसकी तरफ देखा और बोली "क्या हुआ? यहां क्यों खड़ी हो?”

स्तुति थोड़ा परेशान होते हुए बोली "वो मां मुझे आपसे कुछ कहना था, मेरा… मेरा मतलब है वो निशांत को जाते-जाते स्कूल तो मैं छोड़ जाऊंगी लेकिन उसकी छुट्टी तो दोपहर के 1 बजे हो जाती है तो मैं सोच रही थी कि क्या आप उसे लेने…. ज्यादा दूर नहीं है स्कूल बस थोड़ी दूर है, मुश्किल से 5 मिनट लगेंगे!”

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही मोहिनी जी गुस्से से बोली "तुझे पता है ना मेरे घुटनों में दर्द रहता है, जानबूझकर तुम मुझे ये सब काम बोल रही हो ताकि किसी दिन मेरे घुटने बिल्कुल बेकार हो जाए और फिर मैं अपनी जगह से उठ भी ना पाऊं और तुम? तुम अपनी जिंदगी में जो चाहे वो कर सको! पहले मेरे पूरे परिवार को खा गई और अब मुझे भी अपाहिज करना चाहती हो?”

उनकी बात सुनकर स्तुति का चेहरा एकदम से उतर गया, उसकी आंखों में नमी तैर गई! उसने तुरंत अपना चेहरा नीचे झुकाया और बोली "कोई बात नहीं मां मैं एडजस्ट कर लूंगी! या तो दिन के वक्त कुछ देर के लिए छुट्टी ले लूंगी या फिर किसी ऑटो वाले को बोल दूंगी, वो निशांत को घर छोड़ जाया करेगा! आप फिक्र मत कीजिए और आपके घुटनों का दर्द भी जल्दी ठीक हो जाएगा…

उसकी बात पर मोहिनी जी ने कुछ नहीं कहा, बस मुंह बनाते हुए चाय का कप अपने हाथ में उठा लिया!

स्तुति अब बाहर की तरफ आ गई लेकिन उसके कानों में मोहिनी जी की कही हुई बातें अभी भी गूंज रही थी “पहले मेरे पूरे परिवार को खा गई और अब मुझे भी अपाहिज करना चाहती है!”

उसकी नजर अब सामने दीवार की तरफ गई जहां पर एक तस्वीर लगी हुई थी और तस्वीर पर फूलों की माला चढ़ी हुई थी! उस तस्वीर में एक नहीं बल्कि तीन लोग एक साथ थे, दो लड़के और एक लड़की…

अगले ही पल स्तुति ने अपनी आंखों की नमी साफ की और वापस किचन की तरफ आ गई!

वहीं दूसरी तरफ

सरगम अपने रूम में थी और फोन पर वैभव से बात कर रही थी! सामने से वैभव की आवाज आई “लेकिन मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं मैम? अगर मैं ऐसा करूंगा तो रिदांश सर को शक हो जाएगा!”

सरगम मुंह बनाते हुए बोली "मुझे नहीं पता लेकिन उनकी आज की पहली मुलाकात एकदम मजेदार होनी चाहिए, जैसे किसी रोमांटिक मूवी का पहला सीन! या तो उन दोनों की कोई टक्कर हो जाए या कुछ ऐसा जिसमें रिदांश खुद स्तुति को अपनी गोद में उठाएं, मुझे नहीं पता कुछ भी करो लेकिन मुझे एक ऐसा सीन चाहिए और तुम वो सीन रिकॉर्ड करके मुझे मेरे फोन पर भी भेजोगे और मुझे नहीं पता ये तुम कैसे करोगे? लेकिन अगर तुमने ये नहीं किया तो तुम्हारे सारे सीक्रेट्स मैं तुम्हारे रिदांश सर को बता दूंगी और फिर वो तुम्हारा क्या हाल करेंगे ये तुम सोच सकते हो!”

उसकी बात सुनकर वैभव की आंखें फटी की फटी रह गई और अब सरगम ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया!

स्वर जो आईने के सामने खड़ा तैयार हो रहा था वो उसकी तरफ देखते हुए बोला "अगर तुम कहो तो मैं एक मूवी प्रोड्यूस कर दूं क्या? जिसमें डायरेक्टर का काम तुम करोगी क्योंकि आजकल मुझे तुम में एक डायरेक्टर नजर आने लगा है!”

सरगम चेहरे पर स्माइल लिए बोली "जब अपने बोरिंग से बेटे की जिंदगी को थोड़ा रोमांटिक बनाना हो तो खुद मां को डायरेक्टर बनना ही पड़ता है! अब तो इंतजार है कि कब स्तुति ऑफिस में आए और कब मेरा ये खडूस बेटा भी ऑफिस जाए, फिर कुछ तो ऐसा धमाका हो कि बस दोनों के बीच चुम्मा चाटी वाला सीन बन जाए!”

उसकी बात सुनकर स्वर उसकी तरफ देखता ही रह गया! उसकी हार्टबीट ने तो 5

G की स्पीड पकड़ रखी थी…. पर क्या सच में ऐसा होना पॉसिबल है? अब ये तो वक्त ही बताने वाला था!

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