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7,8,9

सुबह के लगभग 8:30 बजे,

एक ऑटो सड़क के किनारे पर आकर रुका और उस ऑटो में से स्तुति बाहर निकली! उसके साथ ही निशांत भी था, वो निशांत को स्कूल छोड़ने के लिए आई हुई थी और यही से वो सरगम इंडस्ट्रीज भी जाने वाली थी जहां उसकी जॉब का पहला दिन था!

उसने निशांत को ऑटो से बाहर निकाला और फिर ऑटो वाले को पैसे देने लगी! अभी वो उस ऑटो वाले को पैसे दे ही रही थी कि तभी अचानक से ऐसा लगा जैसे निशांत उसके दुपट्टे को छोड़कर दूर चला गया है!

उसने तुरंत पलट कर पीछे की तरफ देखा जहां पर निशांत सड़क पर आगे की तरफ जा रहा था, स्तुति की आंखें हैरत में फैल गई!

उसके कानों में मोहिनी जी की कही हुई बातें गूंजने लगी “पहले ही मेरे सारे परिवार को खो गई, अब जो बचा है वो भी बर्बाद कर दे!”

वो बातें याद करते ही वो एकदम से होश में आई और जल्दी से निशांत के पीछे भागी! निशांत सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था, वो भागते हुए दूसरी तरफ जा रहा था!

स्तुति ने जोरों से आवाज लगाकर उसे रोकने की कोशिश की “निशांत रुको! कहां जा रहे हो तुम? प्लीज मेरी बात सुनो निशांत!” ये बोलते हुए वो लगातार उसके पीछे भाग रही थी लेकिन निशांत के कदम तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।

तभी स्तुति की नजर सामने से आ रही एक गाड़ी पर गई जो बहुत ज्यादा स्पीड में थी, स्तुति का दिल धक सा रह गया!

एक तरफ वो गाड़ी निशांत की तरफ बढ़ रही थी और दूसरी तरफ निशांत आगे की तरफ जा रहा था और फिर अचानक स्तुति ने जोरों से चिल्लाते हुए अपनी आंखें बंद कर ली! वो इस वक्त बहुत ज्यादा डर रही थी क्योंकि वो बेशक जितना मर्जी भाग जाती लेकिन उस गाड़ी को निशांत से टकराने से रोक नहीं सकती थी!

गहरी गहरी सांसे लेते हुए वो सड़क के बीचो-बीच खड़ी थी और सामने वो गाड़ी जो निशांत की तरफ बढ़ रही थी वो भी एक झटके से रुक चुकी थी! उसकी ड्राइविंग सीट पर बैठा हुआ रिदांश अपनी गहरी निगाहों से सामने निशांत की तरफ देख रहा था!

निशांत जो अब खुद डर के मारे अपनी जगह पर एकदम स्ट्रेट होकर खड़ा हो गया था, वो बुरी तरह से रोने लगा था!

उसे देखकर रिदांश अब गाड़ी से बाहर निकला और तुरंत उसके पास आया! अगले ही पल उसने निशांत की तरफ देखते हुए कहा “तुम्हारी मम्मा कहां है?”

निशांत ने तुरंत स्तुति की तरफ इशारा कर दिया! स्तुति अभी भी अपनी आंखें बंद कर सड़क पर खड़ी थी, उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसकी धड़कनें ही रुक चुकी है!

तभी उसके कानों में रिदांश की आवाज गूंजी “अगर बच्चे संभालने नहीं होते तो पैदा भी क्यों करती हो? खोई होगी तुम अपने फोन में अपने पति या फिर अपने एक्स्ट्रा पति से बात करने में और बच्चा कहां गया पता भी नहीं होता है ना?”

उसकी बातें सुनते हुए स्तुति ने अपनी आंखें खोली! एक पल के लिए उसकी नजर निशांत पर गई और फिर उसे रिदांश की बातों का एहसास हुआ!

वो तुरंत बोली "ये आप क्या बोले जा रहे हैं?”

रिदांश एकदम हार्टलेस होकर बोला "मेरे सामने तो बकवास करना ही मत, पति नहीं हूं तुम्हारा जो सती सावित्री बनकर मुझे तरह-तरह के प्रूफ देने की कोशिश करोगी! मुझे तुम्हारी बकवास नहीं सुननी लेकिन एक बात जरूर कहनी है कि अगर बच्चे संभालने नहीं होते ना तो प्लीज इन्हें पैदा भी मत किया करो! फिर तुम्हें अपनी लाइफ एंजॉय करने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी, सो एक काम करो अगर अभी भी इसे संभाल नहीं सकती तो किसी आश्रम में दे दो! वो इसका ख्याल रख लेंगे… तुम जाओ अपनी जिंदगी जियो!”

ये बोलकर वो अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया और स्तुति उसकी तरफ देखती रह गई, उसे समझ नहीं आ रहा था कि कोई इंसान इस तरह से कैसे किसी को जज कर सकता है? 1 मिनट में उसने स्तुति का पूरा कैरेक्टर जज कर लिया, पता नहीं उसके बारे में क्या-क्या सोच लिया? जबकि ऐसा कुछ नहीं था! वो किसी से फोन पर बात नहीं कर रही थी… किसी से कोई चैट नहीं कर रही थी, उसकी जिंदगी में तो कोई था ही नहीं सिर्फ निशांत और मोहिनी जी को छोड़कर… उसके खुद के मायके वालों ने उससे मुंह मोड़ा हुआ था तो वो भला क्या ही किसी से बात करेगी?

वो रिदांश को जानती नहीं थी इसलिए उसकी बातें उसे इफेक्ट भी नहीं करनी चाहिए थी लेकिन फिलहाल स्तुति को बहुत बुरा लग रहा था, उसकी आंखों में लगभग से आंसू आ गए थे!

तभी निशांत उसकी तरफ देखते हुए बोला "आई एम सो सॉरी चाची मेरी वजह से वो अंकल आपको सुना कर चले गए, लेकिन मुझे वो बटरफ्लाई नजर आ गई थी! मैं बस उस बटरफ्लाई के पीछे भाग रहा था… आई प्रॉमिस आइंदा मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा, आप मुझसे नाराज तो नहीं हो ना?”

उसकी बातें सुनते हुए स्तुति अब घुटनों के बल नीचे बैठी और अगले ही पल उसने निशांत को अपने सीने से लगा लिया! वो रोते हुए बोली "ऐसा मत कहो निशांत! मैं भला तुमसे नाराज क्यों होऊंगी? लेकिन मुझसे वादा करो कि आइंदा कभी तुम मुझे छोड़कर ऐसे नहीं जाओगे, ये सब ठीक नहीं है बेटा! तुम्हें चोट लग सकती थी…

निशांत झट से बोला “प्रॉमिस चाची मैं अब ऐसे नहीं भागूंगा!”

अभी वो बोल ही रहा था कि सामने से होरन बजा! गाड़ियों का ट्रैफिक लगने लगा था!

स्तुति तुरंत अपनी जगह से उठी और अगले ही पल निशांत को अपनी गोद में उठाकर सामने की तरफ बढ़ गई, उसने ध्यान से सड़क पार की और फिर सामने बने स्कूल में लेकर निशांत को पहुंची!

उसकी धड़कने अभी भी नॉर्मल नहीं हुई थी! उसने निशांत को स्कूल में छोड़ा और फिर गार्ड की तरफ देखते हुए बोली "आप निशांत को स्कूल से बाहर मत जाने दीजिएगा, मैं 1 बजे वापस आ जाऊंगी उसे लेने के लिए!”

गार्ड ने अपना सिर हिलाया और स्तुति अब बाहर आ गई, वो ऑटो में बैठी और सरगम इंडस्ट्रीज के लिए निकल गई!

तकरीबन 15 मिनट बाद वो सरगम इंडस्ट्रीज पहुंची और सीधा अंदर की तरफ आई, उसने सामने लिफ्ट की तरफ देखा और फिर टॉप फ्लोर पर आकर उसने वैभव के बारे में पूछा क्योंकि वही उसे उसका काम बताने वाला था!

वही वैभव फिलहाल अपने केबिन में था और डर से कांप रहा था, एक तरफ सरगम के ऑर्डर्स और दूसरी तरफ उसे टेंशन ये हो रही थी कि अगर रिदांश को स्तुति पसंद ही नहीं आई तो वो तो उसे जॉब से बाहर निकाल देगा! तब वो सरगम को क्या कहेगा कि उसने उसकी मूवी स्टार्ट होने से पहले ही बंद करवा दी?

अभी वो इन सब चीजों के बारे में सोच ही रहा था कि उसका फोन बजा, सामने सरगम का नंबर देखकर डर से उसकी हालत और भी ज्यादा खराब हो गई थी।

उसने तुरंत सरगम का कॉल रिसीव किया! सामने से सरगम बोली "स्तुति वहां पर पहुंची या नहीं?”

वैभव जल्दी से बोला "वो पहुंच तो गई है मैम लेकिन प्रॉब्लम ये है कि अगर रिदांश सर को स्तुति पसंद नहीं आई तो वो तो उसे जॉब से बाहर निकाल देंगे, तब हम क्या करेंगे? आप मुझसे जो सीन क्रिएट करवाना चाहती हैं वो तो मैं फिर कभी भी कर दूंगा लेकिन पहले तो हमें स्तुति मैडम की जब कंफर्म करनी होगी ना? कहीं ऐसा ना हो जॉब के पहले ही दिन उन्हें इस ऑफिस से बाहर निकाल दिया जाए!”

सरगम उसकी बात सुनकर बोली "ये तो मैंने सोचा ही नहीं! तुम एक काम करो मुझे बस 2 मिनट दो, उसके बाद तो बेशक से स्तुति रिदांश का सिर फोड़ दे पर रिदांश उसे जॉब से निकाल नहीं पाएगा… ये बोलकर उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया!

वैभव भी सोच में पड़ गया कि आखिर अब सरगम क्या करने वाली है?

वहीं दूसरी तरफ

सरगम इंडस्ट्रीज का सीईओ बेशक से रिदांश था, लेकिन अगर उससे भी ज्यादा उस इंडस्ट्रीज पर किसी का हक था और कोई उससे भी बढ़कर डिसीजन ले सकता था वो खुद सरगम थी….

उसने मुस्कुराते हुए अपने फोन पर कुछ किया और फिर उस फाइल को वैभव के नंबर पर भेज दिया!

वैभव जो अब स्तुति के पास पहुंच चुका था और उसे समझा रहा था कि अगर गलती से बॉस ने इधर-उधर की कोई बात कह दी या फिर उसे डांट दिया तो वो बुरा ना माने, बस चुपचाप अपने काम पर ध्यान दे लेकिन अगले ही पल जब उसने वो मैसेज देखा तो वो स्तुति की तरफ देखते हुए बोला "अरे अरे आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है! अगर बॉस आपको डांट भी दे तो आगे से बराबर जवाब देना!”

स्तुति हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए बोली "आप क्या बोल रहे हैं सर? मैं ऐसे कैसे उन्हें जवाब दे सकती हूं? अगर मैं उन्हें जवाब दूंगी तो वो पक्का मुझे जॉब से बाहर निकाल देंगे और मेरे लिए ये जॉब बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है इसलिए मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी, खैर अब मैं अपने केबिन में चलती हूं! आपने वही मेरा केबिन बताया है ना?” ये बोलते हुए उसने रिदांश के साइड वाले केबिन की तरफ इशारा किया तो वैभव ने अपना सिर हिला दिया!

स्तुति दूसरे ही पल उस केबिन की तरफ बढ़ गई थी!

वही वैभव चेहरे पर लंबी सी स्माइल लेकर बोला "अगर तुम्हारी जगह मुझे ये ऑफर मिला होता तो अब तक मैं ना जाने बॉस को क्या क्या सुना चुका होता! लेकिन एक तरफ है हम जैसे एम्पलाई जिन्हें अगर जॉब से निकाला जाएगा तो कहीं दूसरी जगह नौकरी भी नहीं मिलेगी और एक तरफ हो तुम जिसे अगर रिदांश सर ने जॉब से निकाल भी दिया तो 20 साल की सैलरी देकर निकालना पड़ेगा! वाह सरगम मैम आपके दिमाग का तो क्या कहना? रिदांश सर फ्री में तो किसी को इतना सब कुछ नहीं देंगे!” ये बोलते हुए उसके चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई थी!

दूसरी तरफ

रिदांश ऑफिस पहुंचा! वो सीधा अपने केबिन में आ गया, अगले ही पल उसने वैभव को अपने केबिन में बुलाया!

वैभव जैसे ही उसके केबिन में पहुंचा रिदांश उसकी तरफ देखते हुए बोला "कहां है वो लड़की जिसे तुमने मेरी पर्सनल असिस्टेंट की पोस्ट के लिए सिलेक्ट किया है? बुलाओ उसे मैं देखना चाहता हूं कि वो इस पोस्ट के लायक भी है या नहीं?”

उसकी बात पर वैभव मुस्कुराया और बोला "क्यों नहीं?” ये बोलकर उसने बाहर आकर स्तुति को उसके केबिन से बुलाया और फिर वापस स्तुति के साथ रिदांश के केबिन में आया!

वही रिदांश अपने लैपटॉप पर ईमेल चेक कर रहा था! जैसे ही दरवाजा खुला उसने तुरंत नजरे उठाकर दरवाजे की तरफ देखा!

अगले ही पल उसके चेहरे पर गुस्सा झलकने लगा, वो दांत पीसते हुए बोला "जो लड़की अपने बच्चे नहीं संभाल सकती वो मेरा ऑफिस संभालेगी? सीरियसली?”

उसका बड़बड़ाना स्तुति को सुन रहा था, वो भी हैरानी से रिदांश की तरफ देख रही थी!

तभी रिदांश जोरों

से चिल्लाया “गेट आउट…

स्तुति अपनी जगह पर खड़ी-खड़ी कांप गई!

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जैसे ही रिदांश गुस्से से चिल्लाया “गेट आउट… स्तुति अपनी जगह पर खड़ी-खड़ी कांप गई, उसे तो समझ ही नहीं आया कि आखिर अब रिदांश गुस्से से चिल्लाया क्यों? लेकिन वो रिदांश को देखते ही पहचान गई थी, उसे अब एक बार फिर से डर लगने लगा था!

पहले तो उसे रिदांश पर गुस्सा आ रहा था! जब रिदांश ने उसे इतना सब कुछ सुनाया तो बाद में उसने भी सोचा कि उसने रिदांश को जवाब क्यों नहीं दिया? वो अपने घर वालों को कोई जवाब नहीं दे सकती थी लेकिन रिदांश? रिदांश की बातें उसने क्यों सुनी? पर यही तो उसमें प्रॉब्लम थी, बेशक से कोई घर वाला हो या बाहर वाला उसकी जुबान चलती ही नहीं थी! वो बस सोचती रह जाती और सामने वाला उसे सुना कर चला जाता!

रिदांश अब एक बार फिर से उसकी तरफ देखते हुए बोला "तुम यहां मेरे ऑफिस में क्या कर रही हो? अभी इसी वक्त निकलो यहां से!”

वैभव तुरंत बोला "लेकिन यही तो आपकी पर्सनल असिस्टेंट है बॉस और आप इसे यहां से बाहर नहीं निकाल सकते!”

वैभव की बात सुनकर रिदांश गुस्से से दांत पीसते हुए बोला "क्यों नहीं निकाल सकता हां? मैं इसे यहां 1 मिनट भी बर्दाश्त नहीं कर सकता, इस तरह के लापरवाह लोग मुझे अपनी कंपनी में बिल्कुल भी नहीं चाहिए! जो लोग अपने बच्चों को नहीं संभाल सकते वो मेरे ऑफिस को क्या संभालेंगे?”

वैभव चौंकते हुए बोला “बच्चा? कौन सा बच्चा? अब ये बच्चा कहां से आ गया? अभी तो आप दोनों का सीन भी नहीं बना और आपने ख्वाबों में बच्चे भी पैदा कर लिए बॉस?”

उसकी बात पर रिदांश गुस्से से गरजते हुए बोला "ओह यू जस्ट शट अप! अभी इसी वक्त इस लड़की को यहां से बाहर लेकर जाओ, वरना मैं तुम्हें इसके साथ धक्के मार कर बाहर निकालूंगा!”

स्तुति रोते हुए बोली "मेरा आपको गुस्सा दिलाने का कोई इरादा नहीं था सर, लेकिन एम सो सॉरी अगर मेरी वजह से आपको इतना गुस्सा आ रहा है तो! पर प्लीज एक आप एक बार मेरी बात…

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही रिदांश गुस्से से बोला "मैंने तुम्हें कुछ कहने के लिए कहा क्या? नहीं ना? तुम्हें बोलने की इजाजत दी क्या? नहीं ना? तो फिर अपनी जुबान क्यों चला रही हो? ये मेरा ऑफिस है मिसेज स्तुति, यहां पर सिर्फ मैं बोलता हूं और मेरी इजाजत से दूसरे बोलते हैं और जिन्हें मैं इजाजत ना दूं वो फिर भी जुबान चलाएं! उनकी जुबान तो फिर मैं कहीं और भी चलने लायक नहीं छोड़ता…

उसकी धमकी पर स्तुति अब एकदम से चुप हो गई थी! उसने नजरे उठाकर वैभव की तरफ देखा!

वैभव ने अपना सिर हिलाया और आगे की तरफ आते हुए बोला "एक्चुअली मुझे आपके साथ एक बात करनी है बॉस, आप प्लीज पहले मेरी बात सुन लीजिए!”

रिदांश बिना किसी खास एक्सप्रेशंस के बोला "पहले इसे बाहर निकालो, उसके बाद मैं तुम्हारी बात सुनूंगा भी और तुम्हें अच्छे से सुनाऊंगा भी!”

वैभव जल्दी से बोला "लेकिन आपको मेरी वो बात उनके बाहर जाने से पहले सुननी होगी क्योंकि हम इन्हें बाहर नहीं निकाल सकते!”

उसकी इस बात पर स्तुति भी हैरान थी, भला वो उसे जॉब से क्यों नहीं निकाल सकते? वैसे तो उसे इस जॉब की बहुत ज्यादा जरूरत थी और उसे बुरा भी लग रहा था कि एक गलतफहमी की वजह से उसकी जॉब जा रही है लेकिन उसके पास और ऑप्शन ही क्या था? रिदांश तो उसे कुछ बोलने भी नहीं दे रहा था!

रिदांश वैभव की तरफ देखते हुए बोला “ओह रियली? हम इन्हें जॉब से बाहर नहीं निकाल सकते तो एक काम करते हैं, आप डॉक्यूमेंट बनाईए मिस्टर वैभव अरोड़ा! हम अभी इसी वक्त इन्हें इस कंपनी का सीईओ बना देते हैं, ये तो हम कर सकते हैं ना?”

वैभव तुरंत अपना सर ना में हिला कर बोला "नहीं हम ये भी नहीं कर सकते, लेकिन सच यही है कि हम इन्हें जॉब से बाहर नहीं निकाल सकते क्योंकि इन्हें आपने नहीं बल्कि सरगम मैडम ने अप्वॉइंट किया है और इनके जॉब लेटर में ये बात मेंशन है कि अगर हम इन्हें जॉब से बाहर निकालते हैं तो हम इन्हें लगभग से 2 साल की सैलरी एडवांस में देंगे! उसी के बाद ये ऑफिस से बाहर जाएंगी, अगर हम ऐसा नहीं करते तो ये इनकी मर्जी है… ये जब तक चाहे तब तक यहां पर रह सकती है! काम करें ना करें इनकी मर्जी लेकिन हमें इन्हें बाहर निकालने का कोई हक नहीं है!”

रिदांश गुस्से से बोला “What Rubbish? ये क्या बकवास कर रहे हो तुम? और मॉम कब से ऐसे जॉब लेटर बनाने लगी? वो तो कभी जॉब लेटर बनाती भी नहीं है, ये सब काम तुम्हारा है तो ये स्पेशल केस मॉम के पास कैसे गया?”

वैभव जल्दी से बोला "अब वो तो मुझे भी नहीं पता बॉस लेकिन जो सच था वो मैंने आपको बता दिया, बाकी सब आप सरगम मैडम से ही पूछ लीजिएगा!”

उसकी बातें सुनते हुए रिदांश की गुस्से से मुट्ठियां कसी हुई थी, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि सरगम ने ये सब कुछ किया लेकिन अब उसे समझ में आ गया था कि सरगम ने ये सब किया क्यों है? वो चाहती है कि स्तुति यहां पर जॉब करें!

वो कुछ सोचते हुए तिरछा मुस्कुराया और बोला "तो अब आप मुझे ये बताइए मिस्टर वैभव अरोड़ा, हम इन्हें यहां से नहीं निकाल सकते लेकिन ये खुद तो यहां से जा सकती है ना? ऐसी तो कोई शर्त नहीं है कि ये भी यहां से नहीं जा सकती?”

वैभव ने तुरंत अपना सर ना में हिला दिया! स्तुति चुपचाप ये सब कुछ सुन रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसकी जॉब कंफर्म है या नहीं? उसे यहां पर रुकना है या नहीं? लेकिन वैभव की बात सुनकर अब रिदांश की तिरछी मुस्कुराहट और भी ज्यादा गहरी हो गई थी!

वो अब अपनी जगह से उठा और उसने अपने कदम स्तुति की तरफ बढ़ा दिए, स्तुति का दिल जोरो से धक-धक करने लगा! रिदांश को अपने पास आता हुआ महसूस कर ही उसके रोंगटे खड़े हो रहे थे और अब रिदांश ने उसके बिल्कुल करीब आकर अपना एक हाथ दरवाजे पर रखा और दूसरा दीवार पर!

स्तुति उसके उन दोनों हाथों में फंसी हुई थी, बेशक से उसके हाथ स्तुति को छू नहीं रहे थे लेकिन अब वो पूरी तरह से उस घेरे में कैद थी जहां आसपास रिदांश की बाहें और उसके सामने रिदांश का सीना था! उसकी सांसों ने गहरा होना शुरू कर दिया था…

रिदांश उसकी तरफ देखते हुए बोला "वेलकम मिसेज स्तुति! आपका यहां पर वेलकम किया जाता है, आई होप आपको यहां पर कोई प्रॉब्लम नहीं होगी और आप अपना काम बहुत अच्छे से करेंगी!”

स्तुति की नज़रें झुकी हुई थी! उसकी आंखों में लगभग से नमी तैर गई थी, रिदांश की गर्म सांसों को वो अपने चेहरे पर महसूस कर सकती थी और अब जैसे तैसे उसने अपनी नजरों को ऊपर उठाया और उसकी आंखों में आंखें डालकर बोली "आप प्लीज मेरी बात एक बार सुन तो लीजिए सर, उसके बाद आप जो कहेंगे बिल्कुल वही होगा! अगर आप मुझे यहां से जाने के लिए कहेंगे तो मैं चुपचाप चली जाऊंगी… ये बोलते हुए उसकी आवाज बहुत नर्म और मासूमियत से भरी हुई थी!

रिदांश चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट लिए बोला "नहीं मिसेज स्तुति अब ऐसा नहीं होगा! अब आपको ये जॉब छोड़कर जाने की कोई जरूरत नहीं है, आप आराम से यहां पर जॉब कर सकती हैं लेकिन अगर आपको यहां पर कोई तकलीफ हो तो उसके लिए आप यहां के लोगों को ब्लेम मत कीजिएगा! आई मीन कहते हैं ना हर इंसान को अपना ख्याल खुद रखना पड़ता है, तो आप भी बस अपना ख्याल रखिएगा! इसके अलावा अब मुझे ना ही आपसे कुछ कहना है और ना ही मुझे आपसे कुछ सुनना है, आप यहां से अपने केबिन में जा सकती है… जब मुझे आपकी जरूरत होगी तो मैं आपको जरूर बुलाऊंगा!”

ये बोलते हुए वो अभी भी तिरछी मुस्कुराहट के साथ ही स्तुति को देख रहा था और स्तुति के लिए ये किसी चैलेंज से कम नहीं लग रहा था!

उसने अपना सिर हिलाया और रिदांश अब पीछे की तरफ हट गया, स्तुति की आंखों में एक बार फिर से नमी आ गई थी!

उसने दरवाजा खोला और तुरंत वहां से बाहर निकल गई! उसके जाने के बाद अब वैभव अपनी जगह पर खड़ा-खड़ा कांप रहा था क्योंकि स्तुति तो जा चुकी थी लेकिन अब रिदांश की गुस्से भरी स्तुति उससे सुननी पड़ेगी ये सोच सोच कर ही उसे डर लग रहा था!

लेकिन रिदांश मुस्कुराते हुए अपनी जगह पर वापस आकर बैठा और वैभव की तरफ देखते हुए बोला "क्या हुआ? तुम यहां पर क्यों खड़े हो? जाओ तुम भी अपने केबिन में जाओ और जाकर काम करो, अगर मुझे तुम्हारी जरूरत हुई तो मैं तुम्हें भी बुला लूंगा!”

वैभव हैरानी से बोला "आपको मुझे डांटना नहीं है क्या बॉस?”

रिदांश हंसा और बोला "बिल्कुल भी नहीं! मैं तुम्हें क्यों डाटूंगा? तुम मेरे इतने अच्छे एम्पलाई हो, मेरा सारा काम करते हो… मैं भला तुम्हें क्यों डांटने लगा? जाओ तुम जाओ जाकर अपना काम करो, डरने की जरूरत नहीं है! मैं तुम्हारा बॉस हूं कोई बॉम्ब ब्लास्ट नहीं जो तुम्हें उड़ा दूंगा?”

वैभव ने अपना सूखता हुआ गला तर किया और बड़बड़ाते हुए बोला “बॉम्ब ब्लास्ट तो बहुत छोटी चीज है, आपका गुस्सा तो वोल्कानो है वोल्कानो बॉस और जब ये वोल्कानो फटेगा तो पता नहीं किस-किस की फटेगी?” ये बोलते हुए वो बाहर की तरफ जा रहा था और उसका बड़बड़ाना रिदांश को साफ सुनाई दे रहा था।

उसके चेहरे की वो तिरछी मुस्कुराहट अभी भी उसके चेहरे पर बरकरार थी!

वहीं दूसरी तरफ

चौहान इंडस्ट्रीज

धड़कन अपने केबिन में थी और उसने अपने माथे पर अपनी दो उंगलियां रखी हुई थी! रात को वो सो गई थी लेकिन थोड़ी देर बाद ही उसकी नींद खुल गई थी और उसके बाद वो ढंग से सो ही नहीं पाई और शायद इसी वजह से अब उसका सिर दर्द हो रहा था!

तभी उसकी असिस्टेंट मेघा उसके केबिन में आई और उसकी तरफ देखते हुए बोली "सिर्फ 10 मिनट रह गए हैं मीटिंग शुरू होने में मैम, लेकिन आपकी तो तबीयत सही नहीं लग रही तो क्या मैं ये मीटिंग कैंसिल कर दूं?”

धड़कन तुरंत बोली "हां मैं भी यही सोच रही हूं! तुम एक काम करो ये मीटिंग कैंसिल ही… ये बोलते बोलते वो रुक गई!

उसे ध्यान आया कि ये कोई नार्मल मीटिंग नहीं है, ये मीटिंग उसकी अधिराज के साथ होने वाली है और अगर उसने ये मीटिंग कैंसिल की तो अधिराज को पक्का यही लगेगा कि वो उससे डर गई!

मेघा हैरानी से उसकी तरफ देख रही थी और अब धड़कन एक गहरी सांस लेकर बोली "तुम्हें ये मीटिंग कैंसिल करने की जरूरत नहीं है, इन फैक्ट मिस्टर अधिराज कपूर के साथ होने वाली कोई भी मीटिंग कैंसिल नहीं होगी! अगर उनकी तरफ से मीटिंग कैंसिल होती है तो तुम्हें पता है, तुम्हें क्या करना है?”

मेघा ने अपना सर हां में हिलाया और वहां से चली गई!

धड़कन एकदम एक्सप्रेशन लैस होकर बोली "वो धड़कन कोई और थी जो तुम्हारे सामने डरी थी मिस्टर अधिराज कपूर, ये धड़कन तुम्हारे सामने डटकर खड़ी होगी और इस बार तुम इसका कु

छ नहीं बिगाड़ पाओगे!”

ये बोलते हुए उसके चेहरे पर काफी इंटेंस एक्सप्रेशंस आ गए थे।

चौहान इंडस्ट्रीज के मीटिंग हॉल में इस वक्त गहरा सन्नाटा छाया हुआ था, वहां पर सिर्फ दो लोग मौजूद थे! एक अधिराज जो वहां चेयर पर आराम से बैठा था और दूसरा उसका पर्सनल असिस्टेंट पूर्व….

अधिराज ने अब अपने हाथों में पहनी हुई वॉच की तरफ देखा और फिर दूसरी नजर पर्व पर डाली तो पूर्व जल्दी से मेघा की तरफ देखते हुए बोला "ये सब क्या है मिस मेघा? अगर आपकी बॉस को ये मीटिंग अटेंड करनी ही नहीं थी तो आपको ये मीटिंग शेड्यूल भी नहीं करनी चाहिए थी, पहले तो आपने मेरे कहने के बावजूद भी ये मीटिंग यहां चौहान इंडस्ट्रीज में रखी जबकि मैंने आपको कहा था कि ये मीटिंग आप कपूर इंडस्ट्रीज में रखिए, लेकिन यहां आने के बाद भी आप लोग टाइम पर मीटिंग के लिए रेडी ही नहीं है! अभी तक आपकी बॉस आई नहीं…

अभी वो बोल ही रहा था कि तभी मीटिंग रूम का दरवाजा खुला और धड़कन अपनी हाई हील्स की टक टक करती हुई अंदर की तरफ आई!

अंदर आते ही उसकी नजरे अधिराज पर गई, अधिराज सामने बैठा था! उसने अपना पैर हल्का सा ऊपर की तरफ उठाया हुआ था और अपनी उंगलियों को अपनी ठोड़ी पर रखते हुए उन्हें हल्का-हल्का मसल रहा था!

धड़कन ने पूर्व की बातें सुनी थी, वो अब उसकी तरफ देखते हुए बोली "देरी के लिए मैं आपसे माफी मांगना चाहूंगी मिस्टर पूर्व लेकिन ये मीटिंग मैं तो रखना ही नहीं चाहती थी! आप लोगों की तरफ से ही प्रपोजल भेजा गया था जबकि मैंने तो कहा था कि हम ये मीटिंग कल रखते हैं क्योंकि आज मेरी तबीयत सही नहीं थी, लेकिन आपकी तरफ से बार-बार कहा गया तो हमने इस मीटिंग के लिए हां कहीं और आपको यहां पर आने के लिए कहा! अगर आप लोग ये मीटिंग अटेंड करना चाहते थे तभी आप लोग यहां पर हैं और अगर आप सच में ये मीटिंग अटेंड करना चाहते हैं तो 5 मिनट इंतजार भी तो कर ही सकते हैं, इतना इशू बनाने की क्या जरूरत है? अब हर कोई आपकी तरह फ्री तो नहीं है जो मुंह उठाकर कहीं भी चला जाए!” ये बोलते हुए उसकी नजर अधिराज पर गई और अधिराज के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट तैर गई!

अब वो धड़कन की तरफ देखते हुए बोला "अगर आपका लेक्चर हो गया हो तो हम मीटिंग शुरू करें मिस चौहान या फिर अभी भी इधर-उधर की बातें करना बाकी है? देखिए आपके पास ज्यादा टाइम होगा लेकिन मैं आपकी तरफ फ्री नहीं हूं, मेरा टाइम बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है! ये मीटिंग मेरे लिए इंपोर्टेंट है लेकिन इतनी भी नहीं कि मैं आपकी बकवास सुनूंगा…

धड़कन उसके सामने आकर बैठी और बोली "तो फिर आपके पास दूसरा ऑप्शन हमेशा है मिस्टर कपूर, मुझे बार-बार आपको वो ऑप्शन बताने की जरूरत नहीं है! आप कभी भी इस प्रोजेक्ट से आउट हो सकते हैं अपनी मर्जी से! मैं जबर्दस्ती आपको अपने साथ ये प्रोजेक्ट करने के लिए नहीं कहूंगी…

अधिराज ने अब अपने हाथ सामने टेबल पर रखे और हल्का सा टेबल पर झुकते हुए बोला "और ऐसा कभी नहीं होगा मिस चौहान, मैं इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ पीछे कभी भी नहीं लूंगा लेकिन अगर कभी आपका मूड चेंज हो तो आप मुझसे कांटेक्ट कर सकती हैं, मैं आपकी हेल्प जरुर करुंगा!”

धड़कन व्यंग्य से हंसकर बोली "धड़कन चौहान को किसी की हेल्प की जरूरत नहीं और अधिराज कपूर? ये तो उस लिस्ट में कहीं भी नहीं जहां धड़कन के वो क्लोज पर्सन हो, जिनसे वो कभी हेल्प की उम्मीद कर सकती है!”

अधिराज अब सीट पर पीछे की तरफ हुआ और आराम से बैठते हुए धड़कन की तरफ देखकर बोला "इतना भी गुमान नहीं करना चाहिए और इतनी जल्दी इतने बयान भी नहीं देने चाहिए मिस चौहान क्योंकि लाइफ का कोई पता नहीं होता! कभी किसी इंसान के साथ नफरत हो और फिर बाद में उस इंसान के साथ शिद्दत वाली मोहब्बत हो जाए!”

धड़कन अब एक बार फिर से हंसी और बोली "नफरत और मोहब्बत ये दोनों अलग-अलग चीजें होती हैं मिस्टर कपूर और जब दो चीजें अलग है तो इंसान एक कैसे हो सकता है? जिससे नफरत हो उससे कभी मोहब्बत हो ही नहीं सकती और अगर किसी से मोहब्बत हो तो उससे नफरत नहीं हो सकती, खैर ये बातें तो यूं ही चलती रहेगी! अब हम मीटिंग शुरू करें?”

अधिराज चेहरे पर इंटेंस स्माइल लिए बोला "आपकी मर्जी! मैं तो यहां पर मीटिंग के लिए ही आया हूं लेकिन आपकी बातें खत्म नहीं हो रही तो अब इसमें मैं क्या ही कर सकता हूं?”

धड़कन ने अब तुरंत उस पर से अपनी नज़रें हटा ली और सामने मेघा की तरफ देखा, मेघा अब सामने प्रोजेक्टर की तरफ गई और फिर प्रोजेक्ट को लेकर डिटेल में ब्रीफ देने लगी!

अधिराज कभी सामने की तरफ देख रहा था तो कभी धड़कन की तरफ, धड़कन उसकी नजरों को खुद पर महसूस कर सकती थी लेकिन वो कुछ भी रिएक्ट नहीं कर रही थी!

अचानक ही उसने अपनी गर्दन पर अपना हाथ रखा, उसे खांसी आने लगी थी! वैसे भी उसकी तबीयत सही नहीं थी तो उसे थोड़ी वीकनेस सी फील हो रही थी और ऊपर से अब उसे और भी ज्यादा अजीब लग रहा था! वो लगातार खांस रही थी और अपनी खांसी को रोकने की कोशिश भी कर रही थी और इस चक्कर में उसका गला और भी ज्यादा चौक हो गया! वो बुरी तरह से खांसने लगी…

मेघा और पूर्व हैरानी से उसकी तरफ देख रहे थे! अधिराज तुरंत अपनी जगह से उठा और अगले ही पल धड़कन के पास आकर उसने उसके सामने रखा हुआ पानी का गिलास उठाया और उसकी तरफ बढ़ाते हुए बोला "जब तबीयत सही नहीं थी तो यहां आने की जरूरत क्या थी?”

धड़कन खांसते हुए ही बोली "आपको मेरी इतनी फिक्र करने की जरूरत नहीं है मिस्टर कपूर, आप अपनी जगह पर बैठ जाइए मैं ठीक हूं!”

अधिराज गुस्से से बोला “पानी पियो!”

धड़कन ने तुरंत उसका हाथ दूर झटकाया और बोली "नहीं पीना!” ये बोलते हुए वो और भी बुरी तरह से खांस रही थी, अब तो लगभग से उसकी सांसे भी चौंक होने लगी थी! 

अधिराज एक बार फिर गुस्से से बोला "मैंने कहा पानी पियो!”

धड़कन भी गुस्से से चिल्लाई “नहीं पीना मुझे पानी!”

अधिराज अब और भी ज्यादा गुस्से से चिल्ला कर बोला "एवरीबॉडी आउट…

उसका चिल्लाना सुनकर मेघा और पूर्व तुरंत वहां से जाने लगे, धड़कन मेघा को रोकते हुए बोली "तुम यहां से कहीं नहीं जाओगी!”

अधिराज ने गुस्से से मेघा की तरफ देखा तो मेघा जल्दी से बोली "आई एम सो सॉरी मैडम लेकिन मुझे लगता है अभी फिलहाल मुझे बाहर ही जाना चाहिए!” ये बोलकर वो तुरंत वहां से चली गई!

धड़कन को अब और भी ज्यादा गुस्सा आया, उसने अधिराज की तरफ देखा और बोली "लोगों को मेनूप्लेट करना तो आप बहुत अच्छी तरह से जानते हैं! बिना कुछ कहे भी आप लोगों का दिमाग कंट्रोल कर लेते हैं, वफादार वो किसी और के होते हैं लेकिन बातें आपकी मानते हैं!”

ये बोलते हुए उसकी खांसी अभी भी रुकी नहीं थी और अगले ही पल अधिराज ने वो पानी का गिलास टेबल पर रखा और फिर दूसरे ही पल धड़कन को उसकी कमर से पकड़ा और सीधा ऊपर की तरफ उठाते हुए टेबल पर बिठा दिया!

धड़कन हैरानी से उसकी तरफ देखती रह गई, अधिराज अब एक बार फिर से उसके करीब हुआ तो धड़कन ने तुरंत अपना पैर ऊपर की तरफ उठाया जहां उसकी हाई हील अब सीधा अधिराज के सीने पर थी!

दूसरे ही पल अब अधिराज ने उसके पैर पर अपना हाथ रखा और उसकी हील को एक सेकंड में उसके पैर से अलग कर दिया, धड़कन का पैर अब यूं ही उसने अपने सीने पर रख लिया था!

धड़कन अब तुरंत अपना पैर उसके सीने पर से हटाने लगी, लेकिन अधिराज ने अचानक से ही उसके पैरों को चूमना शुरू कर दिया था! धड़कन ने टेबल पर अपने हाथ कस दिए, एक पल के लिए उसकी आंखें भी बंद हो गई थी!

वहीं दूसरी तरफ

स्तुति इस वक्त अपने केबिन में थी! उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसे करना क्या है? वैभव उसे काम बताने की बजाय और ज्यादा कंफ्यूज करके चला गया था, उसने उसे दो अलग-अलग फाइल्स दी थी जिन पर उसे काम करना था!

तभी उसका फोन बजा, उसका पर्सनल फोन नहीं बल्कि वहां काउंटर पर रखा हुआ फोन जो रिदांश की पर्सनल असिस्टेंट को इस्तेमाल करना था! उसने तुरंत कॉल रिसीव किया…

सामने से रिदांश की आवाज आई “मेरे केबिन में आओ!”

स्तुति की आंखें बड़ी हो गई, वो तो पहले ही डर रही थी कि कहीं रिदांश उसे अपने केबिन में बुला ना ले और अब फाइनली रिदांश ने उसे अपने केबिन में बुला ही लिया!

वो जल्दी से बोली "लेकिन मैं थोड़ा काम…

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही रिदांश बोला "हां हां तुम अपना काम करो मैं तो फ्री हूं, तुम्हारा इंतजार करता रहूंगा! जब तुम फ्री हो जाओ… ऑलमोस्ट दो-तीन जन्मों बाद तो आराम से आ जाना!”

ये बोलकर उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया और स्तुति अपने फोन की तरफ देखती रह गई, अब उसने वो फोन टेबल पर रखा और फिर धीमे-धीमे कदमों से रिदांश के केबिन की तरफ आई!

उसने दरवाजा खोला और सीधा अंदर की तरफ जाकर रिदांश के सामने खड़ी हो गई! वो अपना चेहरा झुका कर बोली "जी कहिए सर, आपने मुझे बुलाया?”

रिदांश उसकी तरफ देखते हुए थोड़ी एटीट्यूड भरी वॉइस में बोला "पहले तो तुम मुझे ये बताओ कि तुम्हारे अंदर बेसिक मैनर्स भी नहीं है क्या? आई मीन तुम्हारे अंदर अकल और समझदारी तो मैं जानता हूं नहीं है, वरना अपने ही बच्चे को कोई रोड पर नहीं छोडता पर अब मुझे लगता है तुम्हारे अंदर बेसिक मैनर्स भी नहीं है! अपने बॉस के केबिन में कैसे जाना है और कैसे नहीं ये भी तुम्हें नहीं पता…

स्तुति हैरानी से बोली "मैं आपकी बात समझी नहीं सर!”

रिदांश दांत पीसते हुए बोला "अभी इसी वक्त बाहर जाओ और दरवाजे पर खड़ी होकर मुझसे परमिशन लो और फिर अंदर आओ और वो भी तब जब मैं तुम्हें परमिशन दे दूं, Otherwise वापस अपने केबिन में चली जाना!” ये बोलते हुए उसकी आवाज काफी दर्द थी!

स्तुति ने अपना सिर हिलाया और बाहर की तरफ चली गई, कुछ पल वो बाहर खड़ी रही और फिर दरवाजा खोलकर अंदर की तरफ आते हुए बोली "May I Come In Sir?”

सामने से रिदांश की आवाज आई “नहीं!”

इस एक शब्द के अलावा उसने और कुछ नहीं कहा, स्तुति को लगा शायद उसने कुछ गलत सुन लिया! वो एक बार फिर से बोली "मैं अंदर आने की परमिशन मांग रही हूं सर!”

रिदांश ने उसकी तरफ देखा और बोला "और मैं कह रहा हूं कि तुम्हें ये परमिशन नहीं है, अभी फिलहाल मैं बिजी हूं इसलिए गेट आउट!”

स्तुति का चेहरा एकदम फीका सा पड़ गया, उसने दरवाजा बंद किया और वापस अपने केबिन की तरफ बढ़ गई लेकिन अब उसके चेहरे पर हल्की नाराजगी और मायूसी झलक रही थी!

जैसे तैसे वो वापस अपने केबिन में आई और आकर सीट पर बैठते हुए बोली "एक तो पता नहीं मैं सर की मिसअंडरस्टैंडिंग कैसे दूर करूं? वो पता नहीं क्या-क्या सोचे जा रहे हैं? जबकि ऐसा कुछ…

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही उसका फोन एक बार फिर से बजा और इस बार भी रिदांश का कॉल था…

उसने कॉल रिसीव किया लेकिन वो कुछ कहती उससे पहले ही रिदांश बोला "अभी इसी वक्त मेरे केबिन में आओ!”

स्तुति झट से बोली "ओके सर!” ये बोलकर उसने फोन रखा और वापस रिदांश के केबिन की तरफ आ गई!

उसने अब दरवाजे पर खड़े होकर अच्छे से

परमिशन मांगी “May I Come In Sir?”

सामने से रिदांश की आवाज एक बार फिर से आई “नहीं!”

स्तुति चौक गई…

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