
सरगम इंडस्ट्रीज
जैसे ही स्तुति ने अंदर आने की परमिशन मांगी, सामने से रिदांश ने मना कर दिया और अब स्तुति हैरान हो रही थी कि पहले तो खुद रिदांश ने उसे कॉल करके यहां पर बुलाया और अब वो उसे अंदर आने की परमिशन भी नहीं दे रहा था!
वो रिदांश की तरफ देखते हुए बोली "पर सर आपने ही मुझे यहां पर बुलाया है!”
रिदांश बड़े एटीट्यूड से बोला "पागल नहीं हूं मैं जो 5-5 मिनट बाद ही अपनी बातें भूल जाऊंगा, मुझे सब कुछ याद रहता है मिसेज स्तुति! लेकिन जब मैंने आपको बुलाया था तब मुझे आपकी जरूरत थी और अब मुझे आपकी कोई जरूरत नहीं है इसलिए आप यहां से दफा हो सकती हैं क्योंकि अगर 1 मिनट भी आप यहां पर खड़ी रही तो मुझे नहीं पता मैं आपको कैसे और कितना जलील करूंगा, बात आपको यहां पर जॉब के लिए रखने की हुई थी! जॉब लेटर में कहीं ये नहीं लिखा कि मैं आपको कुछ बोल भी नहीं सकता…
उसकी बात पर स्तुति का चेहरा पूरी तरह से मायूस हो चुका था, वो चुपचाप वहां से चली गई और अब अपनी जगह पर आकर बैठी! वो कुछ सोचते हुए बोली "मुझे लगता है मुझे ही ये जॉब छोड़कर चले जाना चाहिए! मेरे लिए जॉब बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है लेकिन अगर सर हर बात पर मुझे यूं ही जलील करेंगे तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा, भला ये भी कोई बोलने का तरीका हुआ क्या? उन्हें सामने वाले को मौका तो देना चाहिए अपनी बात कहने का, लेकिन नहीं उन्हें तो बस वही बोलना है जो उनके दिमाग में आ रहा है! कुछ समझना तो है ही नहीं… ये बोलते हुए उसके चेहरे पर शिकायत साफ नजर आ रही थी!
कुछ पल वो यूं ही बैठी रही और फिर उसकी नजर अपने हाथ में बंधी हुई घड़ी की तरफ गई जहां पर 12 बज रहे थे! वो अभी कंफ्यूजन में थी कि वो ये जॉब कंटिन्यू करें या ना करें? लेकिन वो एक मौका जरूर देना चाहती थी रिदांश को कि शायद वो उसका नजरिया बदल पाए, पर फिलहाल तो उसे 1 बजने का इंतजार था क्योंकि 1 बजे वो निशांत को लेने उसके स्कूल जाने वाली थी!
यूं ही लगभग से आधा घंटा और बीत गया, अब रिदांश ने एक बार फिर से उसे अपने केबिन में बुलाया! वो मुंह बनाते हुए बोली "सर ने मुझे दोबारा बुलाया तो है लेकिन इस बार भी अगर उन्होंने मुझे अंदर आने की परमिशन नहीं दी तो? तो मैं क्या करूंगी? फिर तो मेरे पास एक ही ऑप्शन है, मैं उन्हें मना कर दूंगी कि मुझे ये जॉब करनी ही नहीं! वो अपनी दो सालों की सैलरी अपने पास रखें… मैं अभी इसी वक्त ये जॉब छोड़कर यहां से जा रही हूं!” ये बोलकर उसने एक गहरी सांस ली और फिर अपने केबिन से बाहर निकल कर रिदांश के केबिन में आई!
उसने हल्का सा दरवाजा खोला और अंदर की तरफ देखते हुए बोली "May I Come In?”
अभी उसका सवाल भी पूरा नहीं हुआ था कि रिदांश तुरंत बोला “हां जल्दी आओ!”
स्तुति एक पल के लिए तो हैरान हुई कि सच में रिदांश ने उसे अंदर आने के लिए ही कहा है ना? लेकिन फिर कुछ पल खामोश रहने के बाद वो अंदर की तरफ आई!
रिदांश बिना उसकी तरफ देखे ही बोला "जल्दी से मल्होत्रा की फाइल रेडी करो, हमें 1 बजे मीटिंग के लिए निकलना है!”
उसकी बात सुनकर स्तुति के होश उड़ गए! पहली बात तो वो 1 बजे की किसी मीटिंग में जा नहीं सकती थी, 1:30 बजे तो निशांत की छुट्टी हो जाती थी तो उसे 1 बजे किसी भी तरह सरगम इंडस्ट्री से निकलना था और दूसरी बात आधे घंटे में मल्होत्रा की फाइल कैसे रेडी हो सकती थी? इतना सारा काम आधे घंटे में हो ही नहीं सकता था!
उसके चेहरे का उड़ा हुआ रंग देखकर रिदांश तुरंत बोला “क्या हुआ? नहीं कर पाओगी क्या?”
स्तुति जल्दी से बोली "बात वो नहीं है सर! अगर आप मुझे आधे घंटे की जगह एक घंटा दे तो मैं ये फाइल भी बना लूंगी, लेकिन प्रॉब्लम ये है कि मुझे 1 बजे कहीं जाना है!”
रिदांश चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट लिए बोला "ओह वाओ! तो मिसेज स्तुति को 1 बजे कहीं जाना है?”
स्तुति उसके बोलने के लहजे पर समझ गई थी कि वो सारकास्टिक वे में ये सब बोल रहा है!
रिदांश अब एक बार फिर से बोला “एक्चुअली मिसेज स्तुति मुझे थोड़ा सा डाउट है तो क्या आप मेरा डाउट दूर करने में मेरी हेल्प करेंगी?”
स्तुति ने चौकते हुए पूछा “कैसा डाउट सर?”
रिदांश अब थोड़े सर्द लहज़े में बोला "क्या आप मुझे क्लियर करेंगी कि आखिर ये ऑफिस है या फिर कोई गार्डन जहां पर आप कभी भी आ सकती हैं? कभी भी जा सकती हैं? मुझे तो लगता है आपने पूरी दुनिया को ही गार्डन समझा हुआ है इसलिए अपने बच्चे को भी खेलने के लिए इधर-उधर छोड़ देती है कि जाओ खेलो, बिना ये सोचे कि जिस जगह को आप गार्डन समझ रही है वो गार्डन नहीं एक हाईवे है! जहां पर आपकी एक लापरवाही से किसी मासूम की जान जा सकती है और कोई दूसरा इंसान बुरी तरह से फंस सकता है, वो पूरी जिंदगी गिल्ट में आ सकता है कि उसकी वजह से किसी मासूम को नुकसान पहुंचा!”
उसकी बातें सुनते हुए स्तुति तुरंत बोली "एक्चुअली मुझे आपसे यही बात क्लियर करनी थी सर, जो आप सोच रहे हैं वैसा बिलकुल भी नहीं है! प्लीज आप एक बार मेरी बात सुन लीजिए, उसके बाद शायद….
इसके आगे वो कुछ कहती उससे पहले ही रिदांश बोला “You May Leave Now!”
स्तुति की आंखें बड़ी हो गई! रिदांश अब गुस्से से अपना हाथ टेबल पर पटकते हुए बोला "मैंने कहा अभी इसी वक्त यहां से दफा हो जाओ!”
स्तुति की आंखों में अब नमी तैर गई लेकिन उसने जल्दी से अपनी आंखों की नमी साफ की और रिदांश की तरफ देखते हुए बोली “एक्चुअली मैंने एक फैसला लिया है सर कि मैं ये जॉब…. ये बोलते बोलते अचानक ही वो जोर से चिल्लाई!
रिदांश ने सामने रखा हुआ कांच का पेपर वेट उठाकर सामने दीवार पर मारा!
स्तुति डर से बुरी तरह कांप रही थी, अब वो एक सेकंड भी वहां पर नहीं रुक सकती थी इसलिए वो तेजी से वहां से चली गई! उसकी सांसे बहुत गहरी और लंबी चल रही थी, वो पल जिस वक्त रिदांश ने वो पेपर वेट उठाकर सामने दीवार पर फेंका वो उसकी आंखों के सामने बार-बार चल रहा था!
वो अपने केबिन में आई और आकर सीट पर अपनी सांसों को नार्मल करने की कोशिश करने लगी, वही रिदांश का चेहरा अभी भी गुस्से से लाल था!
वही स्तुति की आंखों में अब नमी तैरने लगी थी! ना वो इस जॉब से जवाब दे पाई और ना ही अब उसे ये समझ में आ रहा था कि वो निशांत को स्कूल से लेने कैसे जाए?
वहीं दूसरी तरफ,
धड़कन का पैर अधिराज के सीने पर था और जैसे ही उसने अपना पैर पीछे की तरफ खींचना चाहा अधिराज ने उसके पैर को चूमना शुरू कर दिया था!
धड़कन के हाथ टेबल पर पूरी तरह से कस गए थे और वो अपनी आंखों को बंद कर चुकी थी, उसकी आंखों के सामने कुछ तस्वीरें चलने लगी थी जिनमें एक साथ बहुत कुछ हो रहा था!
कुछ पल वो यूं ही गहरी गहरी सांसे लेती रही और फिर अधिराज ने उसके पैर को बेहद नाजुक्ता से वो सैंडल दोबारा पहना दिया तो धड़कन ने अब अपनी आंखों को खोला!
अगले ही पल वो टेबल से उतरी और वहां से जाने लगी, ना उसने कुछ कहा था और ना ही अधिराज ने!
जैसे ही वो दरवाजे तक पहुंची अधिराज बेहद कोल्ड वॉइस में बोला "कब तक भागोगी मुझसे?”
धड़कन ने पलट कर उसकी तरफ देखते हुए कहा “आपसे किसने कहा कि मैं आपसे भाग रही हूं?”
अधिराज ने अपनी पॉकेट में हाथ डाले और उसके करीब बढ़ने लगा, उसे अपने करीब आते हुए देख धड़कन के चेहरे पर पसीना एक बार फिर से उभरने लगा था!
वो दांत पीसते हुए बोली "बस इसीलिए मैं नहीं चाहती थी कि हम दोनों ये प्रोजेक्ट एक दूसरे के साथ करें!”
ये बोलते हुए उसने अपने कदम पीछे की तरफ लेने चाहे जहां अगले ही पल उसकी पीठ दरवाजे से लग चुकी थी!
अधिराज ने अपना एक हाथ पॉकेट में ही रखा और दूसरा दरवाजे पर रखकर उसके चेहरे पर झुका और बोला "चाहता तो मैं भी यही था कि मैं तुम्हारे साथ ये प्रोजेक्ट ना करूं पर फिर भी ये हो रहा है My Heart…
धड़कन गुस्से से बोली "धड़कन चौहान नाम है मेरा!”
अधिराज ने अब अपना हाथ उसकी गर्दन पर रखा और फिर अपनी उंगलियों को उसके बालों में उलझाते हुए बोला "लेकिन मुझे तुम्हें Heart कहना अच्छा लगता है, And you know that…
धड़कन ने उसके सीने पर अपना हाथ रखा और उसे खुद से दूर करते हुए बोली "लेकिन मुझे आपके मुंह से ये नाम सुनना बिल्कुल पसंद नहीं इसलिए आइंदा कभी मुझे इस नाम से मत बुलाइएगा!”
ये बोलकर वो वहां से जाने लगी लेकिन दरवाजा खोलने से पहले एक पल के लिए रुकी और फिर वापस अधिराज की तरफ देखते हुए बोली "और हां मैं आपसे भाग नहीं रही हूं, बस आपके पास नहीं आना चाहती क्योंकि आप इस लायक ही नहीं है कि ये धड़कन आपके पास आए!” ये बोलते हुए अब उसकी आंखों में नमी आ गई थी!
एक बार फिर से कुछ तस्वीरें उसकी आंखों के सामने चलने लगी थी और अगले ही पल उसने दरवाजा खोला और वहां से बाहर चली गई!
अधिराज का चेहरा अब गुस्से से कांपने लगा था! उसने मुट्ठियां कस ली थी!
वही धड़कन सीधा अपने केबिन में आई, जैसे ही वो अपनी चेयर पर आकर बैठी मेघा ने दरवाजा खोला और बोली "May I come in Ma’am?”
इसके आगे वो कुछ कहती उससे पहले ही धड़कन ने सामने से एक छोटा सा वास उठाया जो उसके टेबल पर ही रखा था और जोर से दरवाजे की तरफ फेंका!
अगले ही पल मेघा चिल्लाते हुए केबिन से बाहर निकल गई!
वहीं कॉरिडोर से अधिराज गुजर रहा था और अब उसके चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट थी!
वहीं दूसरी तरफ
स्तुति अब अपने हाथ में बंधी हुई घड़ी की तरफ देख रही थी जहां पर 1 बजने में सिर्फ 5 मिनट बचे थे! वो अब खुद से ही बोली "इस जॉब के लिए मैं निशांत को नुकसान नहीं होने दे सकती, मुझे उसे लेने जाना ही होगा! बेशक से फिर कोई मुझे परमिशन दे या ना दे, अगर जॉब से निकाला जाएगा तो इस कंपनी के सीईओ की मर्जी… वरना ना मुझे इस जॉब के लगने की खुशी और ना ही इसके जाने का गम!”
ये बोलकर वो अपने केबिन से बाहर निकली और फिर सीधा लिफ्ट से होते हुए बाहर की तरफ आ गई!
वैभव अपने केबिन में था और इस बात से पूरी तरह अनजान था कि अब आगे उस पर किस-किस का कहर टूटने वाला है!
वही रिदांश भी अब अपने केबिन से बाहर निकला और अपनी मीटिंग के लिए निकल गया, ना उसने वैभव को अपने साथ
लिया और ना ही स्तुति को! वो बस अपनी गाड़ी में बैठा और कुछ ही पलों में उसकी गाड़ी सड़क पर दौड़ रही थी….
स्तुति ने अपनी तरफ से तो कोशिश की थी कि वो रिदांश को बता दे कि हां उसे निशांत को लेने के लिए ऑफिस से बाहर जाना है, लेकिन रिदांश तो उसे अपने केबिन में देखकर ही राजी नहीं था तो वो उसे और क्या ही बताती? इसलिए वो अब बिना अपनी जॉब की टेंशन लिए तुरंत ऑफिस से बाहर आई और निशांत के स्कूल के लिए निकल गई!
वहीं दूसरी तरफ
रिदांश भी अपनी गाड़ी में था, वो इस वक्त मीटिंग के लिए एक होटल में जा रहा था! अभी उसे लगभग से 10 मिनट ही हुए थे कि उसकी नजर सड़क के किनारे पर गई जहां पर स्तुति खड़ी थी और किसी से बात कर रही थी!
उसके सामने एक आदमी खड़ा था और उसने अपने हाथ में फ्लावर बुके पकड़ा हुआ था, स्तुति मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देख रही थी!
रिदांश गुस्से से कांपते हुए बोला "ये तो ऑफिस में थी ना तो अब ये यहां कैसे आई? और इसके साथ ये आदमी कौन है?” ये बोलते हुए उसने एक झटके से अपनी गाड़ी की ब्रेक लगाई!
अगले ही पल उसने पलट कर पीछे की तरफ देखा जहां अब ना उसे स्तुति नजर आई और ना ही वो आदमी, उसका चेहरा गुस्से से और भी ज्यादा लाल हो गया! उसने अपनी गाड़ी स्टार्ट की और अपनी गाड़ी को वापस रिवर्स किया लेकिन अभी भी उसे स्तुति और वो आदमी नजर नहीं आया!
अब उसे समझ नहीं आया कि उसे ही गलतफहमी हुई है या फिर सच में स्तुति वहां पर खड़ी थी? और अपनी गलतफहमी दूर करने के लिए पहले उसने गाड़ी दोबारा स्टार्ट की और फिर साथ ही साथ वैभव को कॉल भी लगा दिया!
वही वैभव जो अपने कैबिन में काम कर रहा था, रिदांश का कॉल आते हुए देख उसने तुरंत कॉल रिसीव किया!
सामने से रिदांश की गुस्से भरी आवाज आई “अभी इसी वक्त मेरी स्तुति से बात करवाओ!”
वैभव मुस्कुरा कर बोला "क्या बात एक ही दिन में आप उसके लिए इतने बेचैन होने लगे कि इतनी इंपॉर्टेंट मीटिंग में भी आपको उसकी याद आ रही है बॉस? नॉट बेड! सरगम मैडम ने बिल्कुल सही कहा था, मोहब्बत की कहानी अक्सर नफरत से ही शुरू…
उसकी बात पूरी होती उससे पहले रिदांश गुस्से से दांत पीसकर बोला "अगर अभी इसी वक्त तुमने अपनी बकवास बंद नहीं की ना, तो कसम से तुम्हारी ऐसी कहानी शुरू करूंगा मैं कि पूरी जिंदगी वो कहानी खत्म नहीं होगी!”
उसकी धमकी सुनकर वैभव एकदम से चुप हो गया और तुरंत अपनी जगह से उठकर केबिन से बाहर आया और फिर स्तुति के केबिन की तरफ बढ़ गया, लेकिन जैसे ही उसने स्तुति के केबिन का दरवाजा खोला वो चौंक गया क्योंकि वहां पर स्तुति नहीं थी!
वो फोन पर रिदांश से बात करते हुए बोला "स्तुति अपनी चेयर पर तो नहीं बैठी है बॉस, शायद वो वॉशरूम गई होगी! अगर आप कहे तो मैं उसके पीछे-पीछे वॉशरूम में जाऊं?”
रिदांश गुस्से से चिल्लाते हुए बोला "ओह यू जस्ट शट अप वैभव! कभी-कभी तो मुझे समझ में नहीं आता कि मॉम ने तुम्हें मेरे सिर पर बिठाया क्यों है? काश मैं तुम्हें जॉब से निकाल सकता, I Swear तब मैं तुम्हें सिर्फ जॉब से नहीं बल्कि इस दुनिया से ही निकाल देता!” ये बोलकर उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया और अगले ही पल उसके जबड़े और भी कस गए!
अब उसने अपने सिर पर अपना हाथ रख लिया था, मतलब उसे गलतफहमी नहीं हुई थी! उसने सच में स्तुति को वहां पर देखा था लेकिन शायद स्तुति ने भी उसे देख लिया था इसीलिए वो वहां से गायब हो गई, फिलहाल तो उसके दिमाग में यही ख्याल आ रहा था!
वो दांत पीसते हुए बोला "भाग कर जाओगी कहां मिस स्तुति? अब तक तो मैं तुम्हें बर्दाश्त कर रहा था ना लेकिन अब तो तुम्हें मुझे बर्दाश्त करना पड़ेगा! मुझे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही हो तुम, मेरे साथ चालाकी करने की कोशिश कर रही हो… वैसे तो मुझे तुम में रत्ती भर इंटरेस्ट नहीं है लेकिन तुम्हारी ये हरकतें देखकर लग रहा है कि मुझे तुम में इंटरेस्ट लेना ही पड़ेगा! अब तो अगर तुम ये जॉब छोड़कर भी जाना चाहोगी तब भी मैं तुम्हें नहीं जाने दूंगा… ये बोलते हुए उसके चेहरे पर बड़े ही इंटेंस एक्सप्रेशन थे!
वहीं दूसरी तरफ
स्तुति जिस आदमी से बात कर रही थी अब वो आदमी अपनी वाइफ के साथ खड़ा था, उसने वो फ्लावर बुके अपनी वाइफ के लिए ही लिया था लेकिन जहां से उसने अपनी वाइफ के लिए फ्लावर बुके लिया था वहां पर खड़ी स्तुति निशांत के लिए चॉकलेट ले रही थी! उसने तो बस ₹20 की चॉकलेट ली थी लेकिन चॉकलेट लेने के लिए उसने ₹500 का नोट दिया था और वो इतनी ज्यादा जल्दबाजी में थी कि वो दुकानदार से पैसे वापस लेना ही भूल गई थी इसलिए जैसे ही उस दुकानदार ने उसे जाते हुए नोटिस किया उसने तुरंत अपने सामने खड़े उस आदमी को ही वो पैसे थमा दिए और बोला कि वो वो पैसे जाकर स्तुति को दे दे क्योंकि जब तक वो अपना काउंटर छोड़कर निकलता तब तक तो स्तुति बहुत दूर चली जाती और वो आदमी स्तुति को उस वक्त वही पैसे लौटा रहा था जब रिदांश ने उन दोनों को देखा!
स्तुति अब स्कूल में आ गई थी और निशांत को लेकर वो बाहर निकली, निशांत उस चॉकलेट को एंजॉय करते हुए बोला "थैंक यू सो मच चाची मुझे ये चॉकलेट देने के लिए, लेकिन आपने तो कहा था कि चॉकलेट सिर्फ तभी खाते हैं जब कोई खुशी का मौका हो तो अब ऐसा क्या हुआ जो आपने मुझे ये चॉकलेट दी?”
स्तुति मुस्कुरा कर बोली "मैंने आपको बताया था ना कि मेरी जॉब लग गई तो बस ये उसी की खुशी में है!”
निशांत झट से बोला "अभी तो जॉब लगी है और आपने मुझे चॉकलेट दी, जब आपको अपनी पहली सैलरी मिलेगी तो आप मुझे और क्या-क्या दिलाओगी?”
स्तुति ने उसके गाल पर अपना हाथ रखा और बोली "जो तुम कहोगे!”
उसकी बात पर निशांत उसके गाल को चूमते हुए बोला "थैंक यू सो मच चाची, आप बहुत अच्छी हो!”
वही स्तुति भी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देख रही थी, जहां उसकी इस दुनिया में निशांत और मोहिनी जी के अलावा और कोई नहीं था वही निशांत का भी तो कोई नहीं था! मोहिनी जी उससे कितना प्यार करती थी ये तो वो बहुत अच्छी तरह से जानती थी, ऐसे में उसका ही फर्ज बनता था कि वो निशांत को हर एक खुशी दे… अब उसके मां-बाप तो इस दुनिया में थे नहीं!
अचानक ही उसकी आंखों में नमी आ गई! निशांत अपने छोटे-छोटे हाथों से उसकी नमी साफ करते हुए बोला "क्या हुआ चाची? आप रोने क्यों लगी?”
स्तुति ने अपना चेहरा ना में हिलाया और बोली "कुछ नहीं वो बस यूं ही!”
निशांत हंस कर बोला "मुझे लगता है आपका बॉस बहुत ज्यादा खड़ूस है, जिसने आपसे पहले ही दिन बहुत सारा काम करवा लिया इसलिए आप थक गई है ना? जैसे दादी आपसे बहुत सारा काम करवाती है और फिर बाद में आप रोने लग जाती हो, वैसे ही अभी भी आप थकावट की वजह से ही रो रही हो ना?” उसकी बात पर स्तुति खामोश हो गई!
वो निशांत को लेकर ऑटो में बैठी और कुछ ही देर में वो अपनी बिल्डिंग में पहुंची, उसने निशांत को घर में छोड़ा!
मोहिनी जी उस वक्त अपने कमरे में ही थी! उसने मोहिनी जी की तरफ देखते हुए कहा “मैंने निशांत को खाना डालकर दे दिया है मां!”
मोहिनी जी ने कुछ नहीं कहा, स्तुति अब वहां से बाहर जाने लगी!
मोहिनी जी अचानक से बोली "कितने बजे छुट्टी होती है तेरी?”
स्तुति ने पलट कर उनकी तरफ देखा और बोली "सात… सात बजे मां!”
मोहिनी जी अब थोड़ा अकड़ कर बोली "7:15 पर अगर तू घर नहीं पहुंची तो कल से कहीं भी जाने की जरूरत नहीं है!”
स्तुति ने अपना सिर हिला दिया और एक गहरी सांस लेकर बाहर की तरफ आ गई!
जॉब लेटर में तो उसका टाइम 6:45 तक का ही लिखा हुआ था, लेकिन फिर भी उसने मोहिनी जी को 7:00 बजे का बताया था ताकि अगर उसे 10-15 मिनट की देरी हो भी जाए तो मोहिनी जी ज्यादा नाराज ना हो! अब वो ऑटो में बैठकर एक बार फिर से सरगम इंडस्ट्रीज की तरफ निकल गई थी!
वहीं दूसरी तरफ
रिदांश होटल हयात में पहुंचा जहां पर उसकी आज की मीटिंग होने वाली थी, अभी वो मीटिंग के लिए टॉप फ्लोर की तरफ जा ही रहा था कि उसकी नजर उस आदमी और उस औरत पर गई!
वही आदमी जिसे उसने स्तुति के साथ देखा था और अब वो अपनी वाइफ के साथ था, वो दोनों हंसते हुए होटल के अंदर की तरफ ही आ रहे थे!
वो औरत अपने आदमी से बोली "थैंक यू सो मच जान जो आपने मुझे इतना बड़ा सरप्राइज दिया, मैं बहुत खुशकिस्मत हूं जिसे आप जैसा पति मिला! आपको पाकर तो मुझे ऐसा लगता है जैसे मुझे पूरी दुनिया की खुशियां मिल गई…
उन दोनों की बातें रिदांश को साफ सुनाई दे रही थी और अब वो बेहद इरिटेशन भरे एक्सप्रेशंस के साथ बोला "ओह तो मैडम का अफेयर भी मैरिड मैन के साथ चल रहा है? ओह गॉड ये लड़की इतनी गिरी हुई होगी ये मैंने सोचा नहीं था, ना तो अपने पति से प्यार करती है ना अपने बच्चे से और ऊपर से दूसरों का घर भी तोड़ने में लगी हुई है! ऐसी लड़कियां इज्जत डिजर्व ही नहीं करती लेकिन मेरे सामने नाटक तो ये ऐसे करती है जैसे ना जाने कितनी इज्जतदार हो, तुम्हारी इज्जत की धज्जियां तो अब मैं खुद उड़ाऊंगा मिसेज स्तुति वर्मा!”
ये बोलकर अब वो टॉप फ्लोर की तरफ बढ़ गया! वो मीटिंग अटेंड तो कर रहा था लेकिन कहीं ना कहीं उसके दिमाग में स्तुति ही घूम रही थी।
वहीं दूसरी तरफ
कॉलेज में
रिदय कैंटीन में बैठा था और अपने फ्रेंड्स के साथ Chill आउट कर रहा था, तभी उसकी नजरे उस लड़की पर गई जो पहले उसे तब मिली थी जब वो धड़कन के साथ लंच पर गया था और फिर तब वो क्लब में अपने दोस्तों से साथ एंजॉय कर रहा था और अब वो लड़की सामने कैंटीन के काउंटर पर खड़ी वहां कैंटीन वाले से बहस कर रही थी!
रिदय अपनी जगह से उठा और उसकी तरफ जाने लगा! तभी उसका दोस्त पियूष उसे रोकते हुए बोला "कहां जा रहे हो तुम?”
रिदय उस लड़की की तरफ देखते हुए बोला "झींगुर का मतलब जानने!”
पियूष के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशंस आ गए और रिदय अब उस लड़की के सामने आकर खड़ा हुआ, वो लड़की कैंटीन वाले की तरफ देखकर गुस्से से बोली "जब मैंने आपको एक बार कह दिया कि मैंने आपको 500 का नोट दिया है तो आपको समझ में नहीं आ रहा क्या? मुझे मेरे पैसे वापस कीजिए वरना ये जो बर्गर आपने मुझे दिया है ना, यही मैं आपके मुंह पर मारूंगी!”
वो कैंटीन वाला भी तुरंत बोला “अरे अगर आपने मुझे 500 दिए होते तो वो 500 मेरे पास ही होते, कहीं हवा में तो नहीं उड़ जाते ना? जब मैं कह रहा हूं कि आपने मुझे 500 नहीं दिए तो….
अभी वो बोल ही रहा था कि वो लड़की गुस्से से दांत पीसते हुए बोली "अरे झींगुर इंसान मेरे साथ बहस करने से बेहतर है तुम जाकर अपने कैमरा में चेक करो, अगर मैंने तुम्हें 500 का नोट नहीं दिया हुआ ना तो कसम से! अभी इसी वक्त तुम्हें दो 500 के नोट दूंगी लेकिन अगर मैंने सच में तुम्हें 500 का नोट दिया हुआ तो तुम्हारा तो मैं वो हाल करूंगी जो तुम कभी जिंदगी में नहीं भूलोगे, झींगुर इंसान कहीं के!”
उसकी बात पर अब रिदय का मुंह बन गया था, वो कैंटीन वाले को देख रहा था जो एकदम काला कलूटा और पसीने से लगभग भरा हुआ था! भला वो हॉट एंड सेक्सी कहां
से हो गया? मतलब झींगुर सही शब्द तो बिल्कुल भी नहीं है और अब उसके चेहरे पर गुस्सा झलकने लगा था!
रिदय गुस्से से अपने सामने खड़ी उस लड़की की तरफ देख रहा था जिसने पहले उसे झींगुर बुलाया और अब वो कैंटीन वाले लड़के को भी झींगुर बुला रही थी! धड़कन ने उसे झींगुर का मतलब हॉट और सेक्सी बताया था लेकिन वो कैंटीन वाला लड़का तो कहीं से भी हॉट एंड सेक्सी नहीं था, मतलब धड़कन ने उसे गलत मतलब बताया था! ये सोचकर अब उसे धड़कन पर नहीं बल्कि उस लड़की पर ही हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था क्योंकि उसे झींगुर बोलने वाली तो वही थी!
वही उस लड़की ने भी अब रिदय की तरफ देखा और मुंह बनाते हुए बोली "तुम यहां? तुम यहां क्या कर रहे हो?”
रिदय गुस्से से बोला "तुमने अभी-अभी इस आदमी को क्या कहा?”
वो लड़की दांत पीसते हुए बोली "इसे? इसे मैंने अभी-अभी ये कहा कि मैंने इसे ₹500 का नोट दिया है, लेकिन ये झींगुर आदमी मुझे बोल रहा है कि मैंने इसे ₹500 का नोट नहीं दिया! कितना बड़ा चोर है ये… मेरा मन तो कर रहा है कि इसका सिर फोड़ दूं लेकिन नहीं वो तो मैं नहीं फोड़ूंगी क्योंकि फिर तो मुझे जेल की सजा हो जाएगी, पर हां इसका कबर तो मैं निकाल कर रहूंगी! मैं अभी पुलिस को फोन करती हूं, जब वो आकर इसकी कैंटीन की फुटेज चेक करेंगे ना तब इसे अकल आएगी कि मान्यता श्रीवास्तव के साथ पंगा लेकर इसने कितनी बड़ी गलती की है! मुझे पागल बना रहा है झींगुर आदमी कहीं का…
रिदय ने अपनी पॉकेट से अपना वॉलेट निकाला और उसमें से 500 का नोट निकाल कर कैंटीन वाले की तरफ बढ़ाते हुए बोला "अगर तुम सच में झींगुर आदमी नहीं हो ना तो ये ₹500 का नोट लो और इस लड़की के मुंह पर मारो!”
वो आदमी हैरानी से रिदय की तरफ देखने लगा! रिदय जल्दी से बोला "मुझे इसके मुंह से झींगुर आदमी नहीं सुनना, ना तुम्हारे लिए और ना ही मेरे लिए लेकिन इसे सुनाना बहुत कुछ है! पहले तुम इसके मुंह पर ये ₹500 का नोट मारो… मैं फिर इसे सुनाऊंगा!”
मान्यता चौकते हुए बोली "अरे तुम पागल हो क्या? तुम अपनी तरफ से ₹500 क्यों दे रहे हो? तुम्हारे घर पर पैसों का पेड़ लगा है क्या? अगर लगा है तो बता दो, मैं पैसे तोड़ने आ जाया करूंगी! दिमाग के पैदल इंसान कहीं के…
रिदय गुस्से से बोला “खबरदार अगर अब मुझे कुछ भी कहा तो, एक बार तुम मुझे पागल बना चुकी हो लेकिन अब दोबारा नहीं बना सकती और पागल मैं नहीं पागल तुम हो जो जहां जाती हो वहीं पर लड़ती रहती हो! लड़ने के अलावा और तुम्हें कुछ आता नहीं है क्या? पहले मेरे साथ लड़ी फिर अब इस आदमी के साथ लड़ रही हो, पहले मुझे भी झींगुर बोला और अब इस आदमी को भी झींगुर बोल रही हो! सबसे बड़ी झींगुर तो तुम खुद हो…
मान्यता का मुंह बन गया, रिदय उसकी तरफ देखते हुए बोला "और हां कोई ₹500 का नोट नहीं दिया तुमने इसे आई बड़ी! ₹500 का नोट कभी देखा भी है क्या अपनी जिंदगी में? ₹500 का नोट देखोगी ना तो बेहोश हो जाओगी, चार आदमी लगेंगे तुम्हें उठाने में! आई बड़ी मुझे झींगुर बोलने वाली… ये बोलकर वो वहां से जाने लगा!
मान्यता गुस्से से दांत पीस रही थी, जैसे ही रिदय वहां से जाने लगा अब उसने तुरंत उसका हाथ पकड़ कर उसे वापस अपनी तरफ खींचा और फिर अगले ही पल अपने हाथों में पकड़ी हुई कोल्ड कॉफी का गिलास सीधा उसके चेहरे पर उड़ेल दिया!
रिदय की आंखें एक झटके से बंद हो गई, जैसे ही वो कोल्ड कॉफी उसके चेहरे से नीचे हुई उसने अपनी आंखों को खोला और अपने चेहरे को साफ करते हुए बोला "हाउ डेयर यू? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझ पर ये कॉफी गिराने की? समझती क्या हो तुम खुद को? पहले मैंने तुम्हें कुछ नहीं कहा तो अब तुम्हारी हिम्मत बढ़ गई, तुम्हें तो अब मैं छोड़ूंगा नहीं!” ये बोलकर उसने मान्यता की कलाई को कसकर पकड़ा और मरोड़ते हुए उसकी पीठ से लगा दिया!
मान्यता गुस्से से मुंह बनाते हुए बोली "तो तुम्हें क्या लगा कि मैं तुम्हारी बकवास बाजी चुपचाप सुनूंगी? पागल मैं नहीं पागल तुम हो, तुम हो तुम हो तुम हो!”
रिदय गुस्से से जबड़े कसते हुए बोला "मेरा मन कर रहा है मैं तुम्हारा मूंह नोच लूं!”
मान्यता भी तुरंत बोली "नोच कर तो दिखाओ! अगर मैंने भी तुम्हारा मुंह नहीं तोड़ दिया तो मैं भी मान्यता श्रीवास्तव नहीं!”
रिदय को अब हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था, तभी पियूष वहां पर आया और रिदय को पीछे खींचते हुए बोला "अरे यार छोड़ ना, लड़की है जाने दे!”
मान्यता गुस्से से बोली "क्यों? लड़कियां कुछ कर नहीं सकती क्या? तुम लड़कों के कुछ अलग लगा होता है क्या?”
रिदय तुरंत बोला “लगा तो होता है, अगर कहो तो दिखाऊं?”
मान्यता की आंखें बड़ी हो गई! पीयूष ने अपना माथा पीट लिया!
रिदय अब मान्यता की तरफ देखते हुए बोला "मैंने आज तक तुमसे ज्यादा बदतमीज लड़की अपनी जिंदगी में नहीं देखी, रिदय चौहान हूं मैं! मेरे आगे पीछे लड़कियां घूमती है और तुम मेरे सामने जुबान चला रही हो? तुम्हें तो अब मैं सच में नहीं छोडूंगा… इस कॉलेज में पढ़ती हो ना तुम? अब तुम मुझे पढ़ कर दिखाओ, अगर तुम्हें तुम्हारी औकात ना दिखा दी तो मैं भी कुछ नहीं!”
मान्यता हैरानी से उसकी तरफ देख रही थी लेकिन अगले ही पल वो मुस्कुराई और बोली "तुमसे जो होता है तुम कर लो और अगर तुमने मुझे जरा सा भी परेशान करने की कोशिश की ना तो कसम से, तुम्हारी ऐसी बैंड बजाऊंगी ना मैं तुम याद रखोगे! मैं कोई बेचारी नारी नहीं हूं, मैं मान्यता…
इसके आगे वो कुछ कहती रिदय उसकी बात पूरी करते हुए बोला "मान्यता श्रीवास्तव हो तुम! बहुत अच्छी तरह से जानता हूं लेकिन तुम रिदय चौहान को नहीं जानती, पर अब अच्छे से जान जाओगी जस्ट वेट एंड वॉच!” ये बोलकर उसने चुटकी बजाई और फिर वहां से चला गया!
मान्यता मुंह बनाते हुए उसे देख रही थी, वो अब व्यंग से हंसी और बोली "है तो ये झींगुर आदमी ही!”
वहीं दूसरी तरफ
स्तुति ऑफिस में थी और काम कर रही थी, कुछ देर पहले ही वैभव उसे काम देकर गया था! उसे कुछ फाइल्स कंप्लीट करनी थी और वो उन्हीं में लगी हुई थी!
अब उसने अपने हाथ में बंधी हुई घड़ी की तरफ देखा, उसका ऑफिस टाइम 6:45 पर ओवर हो जाता था और अब लगभग से 6:40 हो गए थे! उसने सारी फाइल्स को अच्छे से रखा और फिर लैपटॉप ऑफ कर दिया!
वो हल्का सा मुस्कुरा कर बोली "आज का दिन इतना अच्छा तो नहीं था, लेकिन इतना बेकार भी नहीं था! आई होप मैं रिदांश सर की मिस अंडरस्टैंडिंग दूर कर पाती लेकिन इट्स ओके, अगर मैं यहां पर जॉब करूंगी तो एक ना एक दिन तो उनकी मिसअंडरस्टैंडिंग दूर कर ही दूंगी! अब मैं चलती हूं… बाकी सारा स्टाफ भी बाहर निकल ही रहा होगा!” ये बोलकर वो अपना पर्स उठाकर बाहर की तरफ आई जहां पर बाकी सारा स्टाफ भी बाहर जा रहा था!
वहां टॉप फ्लोर पर सिर्फ 5-7 लोग ही थे, उसने मुस्कुराते हुए सब की तरफ देखा! तभी अचानक से ही उसका फोन बजा… उसके पास पहले एक ही फोन था लेकिन अब उसके पास दो फोन हो चुके थे जिसमें एक उसका पर्सनल था और दूसरा उसे वैभव ने दिया था ताकि जब भी रिदांश को उसे कॉल करनी हो तो वो उसके ऑफिशल नंबर पर करें!
वो फोन बजते हुए देख वो थोड़ा हैरान हुई क्योंकि उसके हिसाब से 6:45 के बाद तो उस नंबर पर कॉल आनी ही नहीं चाहिए थी, लेकिन लिफ्ट की तरफ बढ़ते हुए उसने कॉल रिसीव किया!
सामने से रिदांश की आवाज आई “अभी इसी वक्त मेरे केबिन में आओ!”
स्तुति जल्दी से बोली "लेकिन ऑफिस टाइम तो ओवर हो गया ना बॉस? मुझे अब जाना है!”
रिदांश बेहद एटीट्यूड से बोला "ओके फाइन अगर जाना चाहती हो तो जाओ, लेकिन अपना रेजिग्नेशन लेटर लेकर जाओ!”
स्तुति उसकी बात सुनकर हैरान रह गई, वो जल्दी से बोली "लेकिन वैभव सर ने कहा था आप मुझे जॉब से बाहर नहीं निकाल सकते तो…
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही रिदांश तिरछा मुस्कुराया और बोला "तुम शायद भूल रही हो कि ये ऑफिस मेरा ही है और अगर मैं चाहूं तो जब मर्जी यहां का कोई भी रूल बदल सकता हूं, कहीं ऐसा ना हो कि जहां मुझे तुम्हें दो महीने की सैलरी एडवांस देनी पड़ रही थी! वहां अब तुम्हें मुझे कंपनसेशन के तौर पर 20-25 लाख देने पड़े इसलिए या तो चुपचाप केबिन में आओ या फिर घर जाना चाहो तो जा सकती हो, तुम्हारा रेजिग्नेशन लेटर मैं तुम्हारे एड्रेस पर भी पहुंचा दूंगा! तुम वहीं से मुझे ₹25 लाख भेज देना…
स्तुति दंग रह गई! अगले ही पल उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया, रिदांश अपने फोन की तरफ देख रहा था और सोच रहा था कि वो वापस उसके केबिन में आएगी या नहीं? लेकिन उसकी सोच से भी ज्यादा स्पीड इस वक्त स्तुति के पैरों की थी!
वो तुरंत दरवाजा खोलते हुए अंदर आई और बोली "ये आप क्या कह रहे हैं सर? मैं आपको इतने पैसे कहां से दूंगी? और ऐसा तो कोई रूल था ही नहीं कि अगर ये जॉब मैं छोड़ती हूं या फिर आप मुझे जॉब से निकालते हैं तो मुझे आपको इतने पैसे…
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही रिदांश थोड़े गुस्से भरे लहजे में बोला "तुम्हारे अंदर बेसिक मैनर्स सच में नहीं है क्या? दिन में भी तुम्हें समझाया था कि जब भी मेरे केबिन में आओ तो परमिशन लेकर, अगर परमिशन दूं तो अंदर आना वरना वहीं से मुंह उठाकर बाहर चली जाना!”
स्तुति चौक गई… वही तो उसे अपने केबिन में बुला रहा था, क्या अभी भी परमिशन की जरूरत थी? वो गुस्से से खीझते हुए बाहर की तरफ गई और फिर दरवाजे पर खड़ी होकर उसे देखते हुए बोली "May I Come In Sir?”
रिदांश तिरछा मुस्कुराया और बोला "येस ऑफकोर्स मिसेज स्तुति वर्मा!”
स्तुति अब आगे उसके सामने आकर खड़ी हुई और बोली “देखिए सर आप प्लीज मेरे साथ ऐसा मत कीजिए, मुझे नहीं पता आप क्यों मुझसे इतना चिढ़ रहे हैं?”
उसकी बात सुनते हुए रिदांश की आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई थी, वो तुरंत बोला “व्हाट डू यू मीन बाय मैं तुमसे चिढ़ रहा हूं? तुम्हारे अंदर ऐसा खास है क्या जो मैं तुमसे चिढ़ूंगा? खुद को मिस यूनिवर्स समझती हो क्या तुम? शक्ल आईने में कभी देखी भी है तुमने या फिर नहीं?”
उसकी बातें सुनते
हुए स्तुति ने अपना चेहरा झुका लिया था, इस वक्त उसे हद से ज्यादा डर लग रहा था!





















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