
रिदांश की गुस्से भरी बातें सुनकर स्तुति ने अपना चेहरा झुका लिया था! रिदांश अब उसके एक्सप्रेशन देखकर तिरछी मुस्कुराहट के साथ बोला "अब काफी अच्छी और समझदार लग रही हो!”
स्तुति ने तुरंत नजरे उठाकर उसकी तरफ देखा, रिदांश अब अपनी जगह से खड़ा हुआ और बोला "ऑफिस Hours कितने बजे खत्म होते हैं?”
स्तुति ने चौंकते हुए उसकी तरफ देखा! रिदांश तुरंत बोला “एक सवाल पूछा है तुमसे, सिंपल सा सवाल! अगर जवाब है तुम्हारे पास तो जवाब दो, ऐसे टुकुर-टुकुर देख क्या रही हो?”
स्तुति बिल्कुल शांत होकर बोली "6:30 बजे सारा काम खत्म कर दिया जाता है और 6:45 पर सब लोग ऑफिस से निकलने लगते हैं!”
रिदांश हल्का सा मुस्कुरा कर बोला "बिल्कुल सही जवाब! लेकिन ये बताओ कि आज दोपहर को तुमने कितने घंटे की लीव ली थी?”
स्तुति के चेहरे का रंग अब थोड़ा फीका पड़ गया, रिदांश ने टेबल पर अपना हाथ रखा और उसके बिल्कुल सामने खड़े होकर बोला "पहली बात तो तुमने दिन में लीव ली, इस बात के लिए तुमने किसी को इन्फॉर्म तक नहीं किया! दूसरी बात तुमने आने के बाद भी नहीं बताया कि हां तुम बाहर गई थी, आज तुम्हारा पहला दिन था… किसी ने तुम्हें कुछ कहा नहीं! किसी ने तुम पर ज्यादा वर्क लोड नहीं दिया तो तुम्हें ऐसा लगा जैसे तुम कभी भी इस ऑफिस में आ जा सकती हो, पर ऐसा नहीं होगा मिसेज स्तुति वर्मा! अगर तुम्हें कोई काम है तो तुम लीव ले सकती हो लेकिन सिर्फ काम के लिए, आवारागर्दी के लिए नहीं!”
स्तुति चौंकते हुए बोली "आप ये क्या बोल रहे हैं सर? ऐसा कुछ भी नहीं है, मैंने जरूरी काम के लिए ही लिव…
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही रिदांश ने अपना हाथ दिखाकर उसे चुप करवाया और बोला "मुझे नहीं जानना तुमने लीव क्यों लिया? मुझे बस इतना बताओ कि तुम कितने घंटे ऑफिस से बाहर रही?”
स्तुति अब थोड़ा लड़खड़ा कर बोली "एक… एक घंटा!”
रिदांश की आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई! स्तुति एक गहरी सांस लेकर बोली "एक घंटा 10 मिनट!”
रिदांश मुस्कुराया और बोला "परफेक्ट! अब जब ऑफिस Hours में से आपने इतने टाइम का लीव लिया है जो किसी भी तरह से वाजिब नहीं है, तो आपको ये टाइम ऑफिस को एक्स्ट्रा देना पड़ेगा! जहां बाकी एम्पलाइज के लिए ऑफिस Hours 6:45 पर खत्म हो गए वहां आपके लिए ये ऑफिस Hours 7:55 पर खत्म होंगे, तब तक आप यहीं पर काम करेंगी! उसके बाद ही आप घर जा सकती हैं…
स्तुति तुरंत बोली "आई एम सो सॉरी सर! एक्चुअली सच में मैं झूठ नहीं बोल रही हूं, काम इतना ज्यादा इंपॉर्टेंट था कि उस वक्त मैं कुछ और देख ही नहीं पाई लेकिन आई प्रॉमिस आइंदा मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी! अगर मुझे लीव लेनी भी होगी तो मैं आपको या फिर वैभव सर को इन्फॉर्म कर दूंगी, लेकिन प्लीज आज के लिए मुझे इतनी बड़ी सजा मत दीजिए! मुझे एक्स्ट्रा काम करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है, एक्स्ट्रा Hours लगाने में कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन प्रॉब्लम ये है कि मेरा फिलहाल घर पर जाना बहुत ज्यादा जरूरी है बिकॉज़…
रिदांश ने एक बार फिर से अपना हाथ ऊपर किया, स्तुति तुरंत चुप हो गई! रिदांश उसे गहरी निगाहों से देखते हुए बोला "मुझे आपसे जो कहना था वो मैंने कह दिया, अगर आपको मेरी बातों पर कोई प्रॉब्लम है तो आप ये जॉब छोड़कर जा सकती हैं! मैं आपको कुछ नहीं कहूंगा लेकिन जाते-जाते 25 लाख रुपए का चेक आप मुझे देकर जाईएगा पेनल्टी के तौर पर, यहां सब लोग फ्री नहीं है कि इंटरव्यू लेंगे लोगों को सेलेक्ट करेंगे और फिर दूसरे ही दिन वो यहां से चलते बनेंगे और हम बेवकूफों की तरह दोबारा इंटरव्यू लेते फिरेंगे!”
स्तुति हैरानी से बोली “लेकिन 25 लाख रुपए सर? मेरा… मेरा मतलब है इतने पैसे मैं आपको कहां से दूंगी? अगर मेरे पास इतने पैसे होते तो मुझे ये जॉब करने की जरूरत ही क्या थी? और वैसे भी मैंने तो ऐसे किसी डॉक्यूमेंट पर साइन किया ही नहीं जहां पर ये क्लोज लिखा हो!”
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही रिदांश ने टेबल पर रखा हुआ एक पेपर उठाया और उसे स्तुति के सामने कर दिया, स्तुति हैरानी से उस पेपर की तरफ देख रही थी और उस पेपर के सेकंड पोर्शन पर ही ये बात लिखी हुई थी कि अगर स्तुति खुद से ये जॉब छोड़ती है तो उसे कंपनी को 25 लाख रुपए देने होंगे, पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसने इन पेपर पर कब साइन किया? पहले तो वैभव ये बोल रहा था कि अगर रिदांश उसे जॉब से निकालता है तो रिदांश को उसे दो सालों की सैलरी देनी होगी और अब अगर स्तुति ये जॉब छोड़ती है तो स्तुति को 25 लाख रुपए देने होंगे, वो पूरी तरह से कंफ्यूज हो गई थी।
रिदांश उसकी तरफ देखते हुए बोला "आई होप आपको मेरी बात अब पूरी तरह से समझ आ गई होगी, अब आप मुझे अपना फैसला बताइए! आप ये जॉब छोड़कर जा रही है या फिर आप अपने केबिन में जाकर अपना काम करने में इंटरेस्टेड है? क्योंकि आपके पास फालतू टाइम होगा इधर-उधर की बातों के लिए लेकिन मेरे पास आप जैसे फालतू इंसान के लिए 5 मिनट भी नहीं है!”
उसकी बातों पर स्तुति को बुरा लग रहा था! वही उसके कानों में मोहिनी जी की बातें गूंज रही थी, अगर वो वक्त पर घर नहीं गई तो मोहिनी जी पक्का तमाशा बना देती और अगर वो एक्स्ट्रा टाइम लगाने के लिए ऑफिस नहीं रुकी तो रिदांश उसे नहीं छोड़ने वाला था।
उसे देखते हुए रिदांश एक बार फिर से बोला "मैंने कहा ना आपको मेरे पास आप जैसे फालतू लोगों के लिए बिल्कुल भी टाइम नहीं है, तो कृपया आप मुझे अपना जवाब थोड़ा जल्दी दीजिए मिसेज स्तुति वर्मा!”
स्तुति ने एक गहरी सांस ली और बोली "ओके फाइन मैं एक्स्ट्रा टाइम लगाने के लिए तैयार हूं! आप मुझे बता दीजिए मुझे करना क्या है?”
रिदांश मुस्कुराया और बोला "कुछ नहीं बस आप अपने केबिन में जाइए, उसके बाद अगर मुझे आपकी जरूरत होगी तो मैं आपको बता दूंगा!”
स्तुति तुरंत बोली "लेकिन अगर आपको मुझसे कोई काम करवाना ही नहीं तो…
रिदांश अब बेहद गुस्से से बोला “गेट आउट!”
स्तुति और भी ज्यादा हैरान हुई लेकिन अब उसने कुछ नहीं कहा और चुपचाप केबिन से बाहर निकल गई!
रिदांश चेहरे पर डेविल एक्सप्रेशंस लिए बोला "तुम जैसे लोगों को औकात दिखाना मुझे बहुत अच्छी तरह से आता है, बहुत अच्छी तरह से पता है मुझे कि तुम्हे घर जाना है या फिर किसी के साथ अय्याशी करने और ऐसा भी नहीं है कि मुझे तुम्हारी अय्याशी करने से प्रॉब्लम है! मुझे तो तुम्हारे जीने मरने से भी फर्क नहीं पड़ता लेकिन जो तुमने मुझे पागल बनाने की कोशिश की है ना, वो मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता इसलिए अब तुम्हें सबक तो मैं सिखा कर रहूंगा!”
वहीं दूसरी तरफ
धड़कन अपनी गाड़ी ड्राइव कर रही थी! वो चौहान इंडस्ट्रीज से चौहान मेंशन जा रही थी, तभी अचानक से उसकी गाड़ी रुक गई! उसने दोबारा गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश की लेकिन गाड़ी स्टार्ट हो ही नहीं रही थी…
अगले ही पल वो गाड़ी से बाहर निकली और बोनट की तरफ आई, उसने बोनट उठाया तो वहां से धुआं निकलने लगा था! शायद इंजन गर्म हो गया था जिसकी वजह से ही ये प्रॉब्लम आ गई थी लेकिन उसकी गाड़ी तो ज्यादा कहीं चली ही नहीं तो ये प्रॉब्लम क्यों? खैर वो इन सब बातों के बारे में नहीं सोच सकती थी! उसे जल्दी घर जाना था क्योंकि अंधेरा ऑलरेडी हो चुका था और वो इस वक्त काफी सुनसान रास्ते पर थी।
उसने गाड़ी के अंदर से अपना पर्स निकाला और फिर अपने फोन से ड्राइवर को कॉल करने लगी ताकि ड्राइवर दूसरी गाड़ी लेकर वहां पर आ सके, लेकिन उसके फोन में नेटवर्क ही नहीं आ रहे थे!
उसने अपने फोन से ड्राइवर और सरगम दोनों को कॉल करने की कोशिश की पर नेटवर्क की वजह से किसी की कॉल भी नहीं लगी, अब उसे हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था!
उसने नजरे घुमाकर इधर-उधर देखा, अभी तो फिलहाल रोड पर काफी गाड़ियां चल रही थी लेकिन धीरे-धीरे रात और ज्यादा होती जा रही थी!
तभी एक गाड़ी उसके सामने आकर रुकी और अगले ही पल धड़कन की आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई, गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठे अधिराज को देखकर ही उसका मुंह बन चुका था!
उसने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया और दोबारा ड्राइवर को कॉल करने लगी, पर अभी भी उसके फोन पर नेटवर्क नहीं थे!
तभी अधिराज अपनी गाड़ी से बाहर निकल कर उसकी तरफ आया और बोला "गाड़ी खराब हो गई तुम्हारी?”
धड़कन गुस्से से मुंह बनाते हुए बोली "तुमसे मतलब?”
अधिराज बिल्कुल नॉर्मल होकर बोला "मैं कोई हेल्प कर दूं?”
धड़कन गुस्से से बोली "तुम्हारी मदद लेने से बेहतर मैं पूरी रात यहीं पर रहूं!”
अधिराज अब उसके बिल्कुल करीब आया और बोला "और ये बात तुम भी जानती हो मैं ऐसा नहीं होने दूंगा!”
धड़कन फ्रस्ट्रेटेड होकर बोली "आप प्लीज यहां से चले जाइए मिस्टर कपूर क्योंकि मैं नहीं चाहती कोई हमें यहां पर इस तरह से देखें, ऑफिस की बात अलग है! वहां हम बिजनेस पार्टनर है… हमारा एक साथ होना बनता है लेकिन यहां ऐसे बिल्कुल भी नहीं!”
अधिराज अब उसके और भी ज्यादा करीब हुआ और उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोला "क्या तुम्हें लगता है मुझे इन सब बातों की टेंशन होगी सीरियसली?”
धड़कन व्यंग्य से मुस्कुरा कर बोली "आपका तो क्या ही कहना मिस्टर कपूर? आपको कहां ही इन बातों से फर्क पड़ता है? ना खुद की इज्जत की फिक्र है ना मेरी, लेकिन मेरे लिए मेरी इज्जत बहुत मायने रखती है और मैं नहीं चाहती कोई मेरे कैरेक्टर पर उंगली उठाए इसलिए आई रिक्वेस्ट यू! प्लीज आप यहां से चले जाइए…
अधिराज एक गहरी सांस लेकर बोला "ओके फाइन मैं यहां से चला जाऊंगा लेकिन अकेले नहीं, तुम चलो मेरे साथ! मैं तुम्हें चौहान मेंशन ड्रॉप कर दूंगा, ड्राइवर को भेज देना तुम यहां पर वो गाड़ी ले जाएगा!”
ये बोलते हुए उसने धड़कन का हाथ अपने हाथ में पकड़ लिया तो धड़कन की आंखें बड़ी हो गई, उसने तुरंत अपना हाथ छुड़ाया और बोली "How dare you? आपकी हिम्मत भी कैसे हुई मेरी इजाजत के बिना मेरा हाथ पकड़ने की?”
अभी वो बोल ही रही थी कि अधिराज ने दोबारा उसकी कलाई पकड़ कर उसे अपने करीब खींचा और बोला "मुझे ज्यादा बातें नहीं करनी आती, साफ-साफ पूछ रहा हूं तुमसे! मेरे साथ चल रही हो या नहीं?”
धड़कन दांत पीसते हुए बोली "बिल्कुल भी नहीं!”
और जैसे ही उसने कहा अगले ही पल अधिराज ने सीधा उसे अपनी गोद में उठा लिया और उसे लेकर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया!
धड़कन चौक गई! वो उसके कंधों पर मुक्का मारते हुए बोली "छोड़िए मुझे! मुझे आपके साथ कहीं नहीं जाना और आप कोई नहीं होते मेरे साथ इस तरह से जबरदस्ती करने वाले, छोड़िए मुझे वरना मैं चिल्लाऊंगी…
अभी वो बोल ही रही थी कि अधिराज उसे गाड़ी में बिठाकर उसके ऊपर झुकते हुए बोला "मैं कौन हूं और कौन नहीं, You know better than me और तुम्हें कहीं किडनैप करके नहीं लेकर जा रहा हूं मैं! तुम्हारे ही घर छोड़ने जा रहा हूं और ये जो इज्जत की बात कर रही हो ना तुम, ये रोड कितना सुनसान है और यहां किस तरह के लोग हो सकते हैं ये भी तुम बहुत अच्छी तरह से जानती हो So keep quiet ताकि मैं भी शांत रहूं! वरना मेरा दिमाग सटका तो यू
नो वेरी वेल क्या-क्या हो सकता है?” ये बोलते हुए उसके चेहरे पर बड़ी ही सर्द एक्सप्रेशंस थे।
धड़कन गुस्से से अधिराज की तरफ देख रही थी जिसने जबरदस्ती उसे अपनी गाड़ी में बिठा लिया था क्योंकि धड़कन की गाड़ी अचानक से खराब हो गई थी और उसके फोन में नेटवर्क भी नहीं था जो वो चौहान मेंशन में किसी को कॉल करके गाड़ी के साथ बुला लेती!
अधिराज ने धड़कन का गुस्सा देखते हुए कहा “वैसे तो तुम हमेशा ही खूबसूरत लगती हो Heart, लेकिन तुम्हें पता है तुम गुस्से में कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लगती हो! ये जो तुम गालों पर इतना इतना ब्लश लगाती हो ना लगाने की जरूरत ही नहीं है, बस सारा दिन गुस्से में मुंह बनाती रहा करो… तुम सच में कयामत लगोगी!”
उसकी बातों पर धड़कन को और भी ज्यादा गुस्सा आ रहा था! वो दांत पीसते हुए बोली "मैंने आपसे ज्यादा बेशर्म इंसान अपनी पूरी जिंदगी में नहीं देखा मिस्टर कपूर!”
अधिराज गहरी मुस्कुराहट के साथ बोला "और देखोगी भी नहीं और फिलहाल तो मैं तुम्हारे साथ कोई बेशर्मी कर ही नहीं रहा हूं, सोचो अगर मैं बेशर्म होने पर आ गया तो तुम्हारा हाल क्या होगा? और यू नो व्हाट आई मीन…
उसकी बातों का मतलब धड़कन बहुत अच्छी तरह से समझ रही थी और अब उसका चेहरा ना सिर्फ गुस्से से बल्कि यूं भी लाल हो गया था!
उसने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया, उसके दिल में इस वक्त अजीब सी हलचल हो रही थी और धड़कने बहुत ज्यादा तेज हो गई थी! उसने अपनी मुट्ठियों को कसते हुए अपनी ड्रेस को अंदर की तरफ भींच लिया था!
अभिराज उसकी तरफ देखते हुए बोला "चेहरा दूसरी तरफ घूमाने से तुम्हारी धड़कने नॉर्मल नहीं हो जाएगी Heart जो इस वक्त बहुत ज्यादा तेज चल रही है! मुझे वो धड़कने बहुत अच्छी तरह से सुनाई दे रही हैं…
धड़कन ने अब गुस्से से उसकी तरफ देखा और बोली "एक्चुअली आप सिर्फ बेशर्म नहीं है मिस्टर अधिराज कपूर, आप निहायती बेवकूफ भी है! आपको लगता है कि मेरी धडकनें आपके लिए तेज होंगी सीरियसली? पहली बात तो आप में ऐसा कुछ खास है नहीं और फिर भी अगर आपको लगता है कि आप दुनिया के सबसे खास इंसान है तो मैं दुनिया के किसी भी बेकार इंसान के लिए कुछ फील करना मंजूर करूंगी लेकिन आपके लिए नेवर… ये बोलते हुए उसके चेहरे पर बेहद एटीट्यूड नजर आ रहा था और अधिराज की मुस्कुराहट और भी ज्यादा गहरी हो गई थी!
उसे यूं हंसते मुस्कुराते हुए देख धड़कन को और भी ज्यादा गुस्सा रहा था! वो दरवाजा खोलने की कोशिश करते हुए बोली "मुझे यहां पर रुकना ही नहीं है, आप बस दरवाजा खोलिए वरना मैं चलती गाड़ी से कूद जाऊंगी!”
अधिराज हैरानी से बोला “कैसी बात कर रही हो तुम Heart? अगर मैं दरवाजा खोल दूंगा फिर तो तुम पक्का कूद जाओगी तो मैं दरवाजा खोलूंगा क्यों? ये दरवाजा तो अब तभी खुलेगा जब चौहान मेंशन आ जाएगा और अगर उससे पहले तुम्हें दरवाजा खुलवाना है तो तुम मेरी जगह पर आकर यहां से लॉक खोल सकती हो!” ये बोलते हुए उसने वहां साइड में लगे हुए बटंस की तरफ इशारा किया तो धड़कन ने और भी ज्यादा मुंह बनाया!
अगर उसे उन बटन को दबाना था तो उसे अधिराज के बिल्कुल करीब होना पड़ता जो उसे बिल्कुल मंजूर नहीं था इसलिए उसने अपना चेहरा एक बार फिर से दूसरी तरफ घूमा लिया और अधिराज को अब दोबारा हंसी आ गई!
उसकी हंसी सुनकर धड़कन गुस्से से मुट्ठियां और भी ज्यादा कस रही थी, उसे सच में बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था और तकरीबन 10 मिनट यूं ही वो गुस्से से कांपती रही, अपने आप में बड़बड़ाती रही!
जैसे ही अधिराज ने चौहान मेंशन के बाहर गाड़ी रोकी धड़कन ने एक गहरी सांस ली, कम से कम अब उसे अधिराज को बर्दाश्त नहीं करना था!
उसने अधिराज की तरफ देखा! वो चाहती थी कि वो गाड़ी अनलॉक कर दे लेकिन अधिराज ने अभी भी गाड़ी अनलॉक नहीं की!
वो उसकी तरफ देखते हुए बोला "मुझे तुमसे कुछ कहना है!”
धड़कन तुरंत बोली “लेकिन मुझे आपकी कोई भी बात नहीं सुननी!”
अधिराज हल्का सा उसके करीब आया और बोला "लेकिन सुननी पड़ेगी और तुम जानती हो जब बात डोमिनेंस की आती है तो नो वन कैन बीट अधिराज कपूर, I m hella Dominating!!”
धड़कन ने एक बार फिर से अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया और अब अधिराज ने उसकी कलाई को कसकर पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया!
धड़कन ने जोर से उसे धक्का दिया और चिल्ला कर बोली "खबरदार अगर मुझे मेरी इजाजत के बिना हाथ भी लगाया तो….
जैसे ही उसने कहा अधिराज ने एक बार फिर से उसकी कलाई को कसकर पकड़ा और इस बार अपनी तरफ खींचने की बजाय उसने उसकी कलाई को मरोड़ कर उसकी पीठ से लगा दिया और उसके चेहरे पर झुका!
अधिराज और धड़कन दोनों ही इस वक्त एक दूसरे को बेहद इंटेंस नजरों से देख रहे थे, जहां धड़कन की नजरों में बेहिसाब गुस्सा था वही अधिराज की नजरे गहरी थी! उसके होठों पर तिरछी मुस्कुराहट थी तो आंखों में बेइंतहा जिद्द भी नजर आ रही थी!
वो धड़कन की तरफ देखते हुए बोला "मैं लास्ट बार कह रहा हूं तुमसे… अगर मैं तुमसे ढंग से पेश आता हूं! तुमसे कुछ कहता नहीं हूं, पोलाइट रहने की कोशिश करता हूं तो Respect It Otherwise तुम जानती हो कि गुस्सा मेरे अंदर भी कम नहीं है! A for Attitude and A for Adhiraaj Kapoor, दोनों में बिल्कुल फर्क नहीं है!”
धड़कन अपनी कलाई उससे छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली "ये है आपका प्यार जो दूसरों को सिर्फ तकलीफ देता है!”
अधिराज तुरंत बोला "मैं तो प्यार से ही अपने पास खींच रहा था, तुमने मजबूर किया मुझे खुद को तकलीफ देने के लिए!”
धड़कन व्यंग्य से हंसकर बोली "जो लोग सामने से कुछ कर नहीं पाते हैं ना मिस्टर कपूर, वो यूं ही इधर-उधर के बहाने बनाते हैं लेकिन बात तो ये होती है कि उनकी बातें अलग होती है, उनकी हरकतें अलग होती हैं! चेहरे पर नकाब ओढ़ कर रखते हैं वो और फिर कहते हैं कि हम तुमसे प्यार से पेश आते हैं… अरे ऐसे लोग अपने एक हाथ में गुलाब का फूल और दूसरे में खंजर रखते हैं!”
उसकी बातें सुनते हुए अधिराज की नजरे उस पर और भी ज्यादा इंटेंस हो गई थी और अब उसकी नज़रें धड़कन के फड़फड़ाते हुए होठों पर गई!
अगले ही पल वो उसके होठों पर झुकने लगा, धड़कन ने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया! इस वक्त उसकी सांसे बेहद गहरी चल रही थी जो उसके ऊपर की तरफ उठ रहे सीने से ही पता चल रही थी और अब अचानक ही अधिराज ने उसकी कलाई को छोड़ दिया और फिर दूसरे ही पल बटन प्रेस करते हुए गाड़ी को अनलॉक कर दिया!
धड़कन ने एक नजर हैरानी से उसकी तरफ देखा और फिर तुरंत गाड़ी से बाहर निकल गई, बाहर निकलते हुए उसकी आंखों की नमी अधिराज साफ देख सकता था! उसकी चेहरे पर अब एक बार फिर से गहरी मुस्कुराहट तैयार गई थी…
वहीं दूसरी तरफ
सरगम इंडस्ट्रीज
स्तुति अपने कैबिनेट में बैठी थी और यूं ही फ्री बैठी थी, वो कोई काम नहीं कर रही थी और उसे इस बात पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था! अगर रिदांश को उससे कोई काम नहीं था तो उसे यूं रुकवाने का क्या मतलब बनता था? वो कभी अपने फोन की तरफ देख रही थी तो कभी ऊपर सीलिंग की तरफ और कभी नीचे जमीन की तरफ और इन सब चीजों के अलावा उसके पास काम भी क्या था? और अब उसकी नजर अपने हाथ में पकड़े हुए फोन पर गई जहां टाइम हो रहा था 7 बजकर 5 मिनट….
अगर वो अभी ऑफिस से निकलती तो उसे घर पहुंचने में लगभग से आधा घंटा लगता और अगर वो 10 मिनट भी ऑफिस में और रुकी तो ये टाइम और भी ज्यादा बढ़ता जाएगा और अगर गलती से रास्ते में ट्रैफिक हुआ फिर तो मोहिनी जी उसकी जान ही ले लेंगी क्योंकि वो बेशक से कुछ भी कह ले, लेकिन मोहिनी जी उस पर यकीन नहीं करने वाली थी!
वो सब सोचते हुए उसकी आंखों में नमी तैर रही थी! क्या पता अगर वो रिदांश को प्यार से अपनी बात समझाने की कोशिश करें तो रिदांश मान जाए? ये सोचकर अब वो अपने केबिन से निकली और रिदांश के केबिन की तरफ बढ़ गई!
उसने जैसे ही हल्का सा दरवाजा खोला उसकी नजर सामने रिदांश पर गई जो अपनी चेयर पर बैठा स्मोक कर रहा था, उसे देखते हुए स्तुति ये समझने की कोशिश कर रही थी कि रिदांश का मूड ठीक है या नहीं? कहीं ऐसा ना हो कि उसका मूड हो एकदम ज्वालामुखी की तरह फटने वाला और वो उसके सामने जाकर अपनी बात करेगी तो रिदांश और भी ज्यादा चिढ़ जाएगा!
और तभी रिदांश का फोन बजा, वो फोन पर बेहद गुस्से से बात कर रहा था इसलिए स्तुति तुरंत अपने केबिन में वापस आ गई! वो उसके गुस्से को और ज्यादा बढ़ावा नहीं देना चाहती थी और अब लगभग से 20 मिनट और बीत गए, अब घड़ी में टाइम 7:30 हो रहा था!
स्तुति अब एक बार फिर अपने केबिन से बाहर निकली, उसने दोबारा रिदांश के केबिन में चेक किया तो इस बार रिदांश अपने केबिन में नहीं था!
स्तुति हैरान हुई, वो अंदर की तरफ आई और उसने रिदांश को आवाज़ लगाई लेकिन रिदांश वहां पर था ही नहीं तो उसकी आवाज क्या ही सुनता?
स्तुति को अब उस पर गुस्सा आने लगा, वो यहां पर ऑफिस में बेफालतू बैठी थी और रिदांश वहां से जा भी
चुका था!
अब वो भी वहां पर 1 मिनट नहीं रुकी और तुरंत बाहर की तरफ आ गई….
स्तुति अपने केबिन से बाहर निकली तो उसने देखा कि रिदांश अब अपने केबिन में नहीं है, उसे रिदांश की इस बात पर गुस्सा आ रहा था! उसे ऑफिस में रोक कर वो खुद ऑफिस से जा चुका था…
वही रिदांश ऑफिस से निकलने तो नहीं वाला था, लेकिन कुछ देर पहले ही सरगम का उसे कॉल आया था और वो उसे घर बुला रही थी क्योंकि वो सबके साथ डिनर करना चाहती थी! वो चाहती थी कि आज पूरी फैमिली एक साथ हो क्योंकि कई दिनों से पूरी फैमिली ने एक साथ डिनर नहीं किया था।
रिदांश ने पहले तो बोल दिया कि वो नहीं आ पाएगा क्योंकि उसे काम है, लेकिन सरगम ने एक दो इमोशनल बातें कहीं तो वो मना नहीं कर पाया और अब वो चौहान मेंशन ही जा रहा था!
रास्ते में उसे एक बार फिर से कॉल आया जो कि उसके फ्रेंड मानव का कॉल था! मानव उसे क्लब में बुला रहा था, उसे उससे कुछ इंपॉर्टेंट बात करनी थी।
रिदांश ने फोन पर उस बात के बारे में पूछा लेकिन मानव ने बोल दिया कि जब तक वो क्लब नहीं आता तब तक वो उसे नहीं बता पाएगा और बात बहुत ज्यादा सीरियस है और इंपॉर्टेंट भी, रिदांश उसे भी मना नहीं कर पाया और अब उसने अपनी गाड़ी क्लब की तरफ घुमा दी थी।
वहीं दूसरी तरफ
स्तुति ऑफिस से बाहर निकली और अपने फ्लैट के लिए निकल गई!
तकरीबन 10 मिनट बाद जिस ऑटो में वो बैठी थी वो अचानक से खराब हो गया, वो ऑटो वाले की तरफ देखते हुए बोली "क्या हुआ भैया? आपने ऑटो क्यों रोक दिया?”
ऑटो वाला तुरंत बोला "पता नहीं मैडम क्या हुआ? लगता है ऑटो खराब पड़ गया है, आप एक काम कीजिए आप दूसरे ऑटो में चली जाइए!”
स्तुति परेशान होते हुए बोली "लेकिन ऐसे कैसे भैया? अगर मुझे दूसरा ऑटो नहीं मिला तो?”
वो ऑटो वाला सामने की तरफ देखते हुए बोला "आप फिक्र मत कीजिए आपको ऑटो मिल जाएगा, बेशक से आप मुझे मेरे पैसे मत दीजिए!”
स्तुति ने कुछ नहीं कहा, वो ऑटो से उतरी और जितने पैसे ऑटो वाले के बनते थे उसकी तरफ बढ़ाते हुए बोली "यहां तक लाने के लिए शुक्रिया!”
उस ऑटो वाले ने वो पैसे लिए और स्तुति आगे बढ़ गई, अभी वो मुश्किल से दो-तीन कदम आगे आई थी कि अचानक से एक लड़का उसके सामने आकर खड़ा हुआ और उसे देखते हुए बोला "चलोगी क्या?”
स्तुति ने अपना सिर हिलाया!
अगले ही पल उस लड़के के होठों पर तिरछी मुस्कराहट तैर गई थी! उसने तुरंत सामने खड़े अपने दोस्त की तरफ देखा जो ऑटो की ड्राइविंग सीट पर बैठा था, उसने तुरंत ऑटो स्तुति की तरफ घुमाया!
स्तुति चुपचाप ऑटो में बैठ गई, उस लड़के ने स्तुति से ऑटो के हिसाब से नहीं पूछा था! वो उससे दूसरे तरीके से पूछ रहा था जिसमें वो स्तुति के साथ रात बिताने का सोच रहा था।
वही स्तुति को लगा वो शायद ऑटो के बारे में पूछ रहा है तो उसने हां बोल दिया, स्तुति जैसे ही ऑटो में बैठी दो लड़के और आकर ऑटो में बैठ गए! वो अजीब सी नजरों से स्तुति की तरफ देख रहे थे…
स्तुति हैरान होते हुए बोली "भैया आपने तो और भी लोगों को ऑटो में बिठा लिया, मुझे लगा आप सिर्फ मुझे छोड़ने जाएंगे! आप एक काम कीजिए आप इन लोगों को ड्रॉप कर दीजिए, मैं दूसरा ऑटो…
अभी वो बोल ही रही थी कि उस आदमी ने ऑटो स्टार्ट कर दिया और वो आदमी जिसने स्तुति को चलने के लिए पूछा था, वो भी आगे की तरफ बैठा था और बार-बार पलट कर पीछे स्तुति की तरफ देख रहा था!
स्तुति को अब बहुत ज्यादा डर लगने लगा था! वो एक बार फिर से ऊंची आवाज में बोली "आप ऑटो रोक दीजिए भैया, मुझे आपके साथ कहीं नहीं जाना! आप प्लीज मुझे यहीं पर उतार दीजिए!”
वो ऑटो वाला गहरी मुस्कुराहट के साथ बोला "अब तो ये ऑटो वही रुकेगा जहां हम लोग चाहते हैं!”
जैसे ही उसने कहा स्तुति की नजर एक-एक कर सब लोगों पर गई, सबके चेहरे की तिरछी मुस्कुराहट बता रही थी कि वो सब लोग आपस में मिले हुए हैं!
स्तुति की आंखों में नमी तैर गई लेकिन अगले ही पर उसके दिमाग में कुछ आया, वो यूं ही उन लोगों से हार नहीं मान सकती थी! एक तो उसे घर जाने की इतनी टेंशन हो रही थी और ऊपर से उन घटिया लोगों की वजह से उसे और भी ज्यादा परेशानी हो रही थी!
वो पहले वाले आदमी की तरफ देखते हुए बोली "मैं समझ गई तुम लोग मुझे कहां पर लेकर जाना चाहते हो? मुझे भी तुम लोगों के साथ जाने में कोई प्रॉब्लम नहीं है, लेकिन क्या तुम लोग मेरे लिए एक छोटी सी चीज कर सकते हो? एक्चुअली मुझे बहुत भूख लगी है और बहुत प्यास भी लग रही है! क्या तुम लोग मुझे कुछ खाने का दे सकते हो और साथ में पीने का पानी भी? यहां वो सामने ही दुकान भी है, मैं रोज आते-जाते रास्ते में देखती हूं!”
उसकी बात सुनकर वो सभी लड़के एक दूसरे की तरफ देखने लगे थे, तभी सबसे पहले वाले लड़के वीरू ने ड्राइवर के कंधे पर अपना हाथ रखा और इशारा किया तो ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी!
वीरू ने पीछे बैठे दो आदमियों में से एक को अपने साथ चलने का इशारा किया तो वो दोनों सामने की तरफ बढ़ गए जहां पर एक एल्कोहल शॉप थी और उसके साथ ही खाने की स्टॉल भी लगी हुई थी, जहां पर चिकन वगैरह मिल रहा था! वो दोनों बात करते हुए आगे बढ़ने लगे…
वीरू अपने साथी के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला "आज तो मजा आएगा, पहले तो मुझे लग रहा था कि हमें इसके साथ जबरदस्ती करनी पड़ेगी लेकिन अब तो ये खुद साथ देने की बात कर रही है! अब तो हमारी रात और भी ज्यादा रंगीन हो जाएगी…
उसका साथी भी तुरंत बोला “अरे मुझे तो पहले ही पता था वो हम चारों के साथ अच्छे से मजे करेगी! बस यूं ही नखरे दिखा रही है, साली शक्ल से ही चालू लग रही थी!”
ये बोलते हुए उसने पलट कर पीछे ऑटो की तरफ देखा जहां पर स्तुति अभी भी ऑटो में बैठी थी, वो लोग एल्कोहल शॉप के बाहर खड़े थे और वहीं पर रिदांश भी खड़ा था!
उसने उन दोनों की पूरी बात तो नहीं सुनी लेकिन वीरू के साथी की बात उसने अच्छी तरह से सुनी थी और अब उसकी नज़रें स्तुति पर थी! उसे देखते हुए उसने गुस्से से अपने जबड़े कस लिए, मतलब किसी के साथ अपनी मर्जी से इस तरह से जाना और वो भी चार-चार लोगों के साथ ये सोचते हुए रिदांश को हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था!
वो स्तुति की तरफ देखते हुए बोला "ओह गॉड तुम इतनी ज्यादा बेशर्म हो ये तो मैं सोच भी नहीं सकता था और ऐसी लड़की को मैंने सरगम इंडस्ट्रीज में जॉब दे दी? बहुत बड़ी गलती कर दी मैंने! बहुत ज्यादा बड़ी… अब तो मैं तुम्हें वहां पर जॉब भी नहीं करने दूंगा, कल ही मैं तुम्हें धक्के मार कर वहां से बाहर निकालूंगा!”
ये बोलते हुए उसके चेहरे पर गुस्सा था, उसके हाथ में वाइन की बोतल थी जो लेकर अब वो अपनी गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठा और वहां से निकल गया!
वहीं दूसरी तरफ
ड्राइवर और दूसरा आदमी स्तुति की तरफ देख रहे थे और स्तुति अब उन दोनों की तरफ देखते हुए बोली "क्या मैं अपने घर पर मैसेज कर दूं कि मैं आज रात अपनी फ्रेंड के घर रहने वाली हूं? अगर मैं मैसेज नहीं करूंगी तो कहीं वो लोग मुझे ढूंढने ना निकल जाए और अगर उन लोगों को आपके बारे में पता चल गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी ना?”
उन दोनों आदमियों ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर एक ने अपना सिर हिला दिया और बोला "हमसे ज्यादा चालाकी करने की कोशिश मत करना, वरना बहुत पछताओगी तुम!”
स्तुति तुरंत बोली "अगर मुझे आपके साथ चालाकी करनी होती तो क्या मैं अब तक चुपचाप यहां पर बैठी होती? अब तक तो मैं शोर मचा चुकी होती, जब मैं खुद आपसे कह रही हूं कि मैं आप सब लोगों के साथ चलने के लिए तैयार हूं तो आपको मुझ पर शक करने की जरूरत नहीं! मैं आपके साथ जरूर जाऊंगी… ये बोलकर अब उसने बैग से अपना फोन निकाला और फिर उस पर एक मैसेज टाइप कर एक नंबर पर सेंड कर दिया!
जैसे ही उसने अपना फोन अपने बैग में वापस डाला वीरू और उसका साथी भी वापस आ गए, उनके हाथ में शराब की बोतल के साथ एक पानी की बोतल और साथ में चिकन था!
वो सब देखते ही स्तुति को उल्टी आने को हो गई क्योंकि उसे ये सब चीज बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती थी!
वीरू स्तुति की तरफ देखते हुए बोला "हम तेरे लिए खाना ले तो आए, लेकिन ये तू हमारे अड्डे पर चलकर खाना! चल अब जल्दी यहां से निकले… ये बोलकर उसने ड्राइवर की तरफ देखा और वो लोग तुरंत वहां से निकल गए!
स्तुति ने अपना लोअर लिप अंदर की तरफ दबा लिया था, उसके चेहरे पर नर्वसनेस और परेशानी साफ झलक रही थी लेकिन वो किसी तरह खुद को शांत रखने की कोशिश कर रही थी।
वहीं दूसरी तरफ
रिदांश क्लब पहुंच चुका था! जैसे ही वो क्लब में अंदर की तरफ आया उसकी नजर मानव पर गई जो वही बार काउंटर पर बैठा था और ड्रिंक कर रहा था!
रिदांश उसके सामने आकर बैठा और बोला "अब बता तूने मुझे यहां क्यों बुलाया?”
मानव उसे देखते हुए बोला "यार मेरा जीने का मन नहीं कर रहा!”
रिदांश हैरानी से उसकी तरफ देख रहा था, लेकिन अगले ही पल वो गुस्से से बोला “तो फिर मर जा! अगर जीने का मन नहीं कर रहा तो ओबवियस सी बात है तेरा मरने का मन कर रहा होगा, इतना वक्त क्यों लगा रहा है? शराब की जगह जहर पी और काम खत्म कर!”
उसकी बात सुनकर मानव उसकी तरफ देखता ही रह गया, उसकी आंखों में लगभग से आंसू आ गए थे।
रिदांश अब अपनी जगह से उठा और बोला "अगर मुझे पहले पता होता कि तूने मुझे ये बकवास बात कहने के लिए यहां पर बुलाया था तो मैं कभी नहीं आता, लेकिन अब मैं एक पल भी यहां पर नहीं रुक सकता इसलिए मैं जा रहा हूं!”
ये बोलकर वो जैसे ही वहां से जाने लगा मानव ने तुरंत उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया और बोला "तू सही कहता था, वो मेरे मतलब की लड़की नहीं है! वो धोखेबाज निकली और अब तू भी मुझे छोड़ कर जा रहा है? ऐसे तो मैं सच में मर जाऊंगा….
रिदांश ने पलट कर उसकी तरफ देखा और बोला "और अगर दोबारा तूने एक बार और ये मरने की बात की ना तो कसम से तू खुद तो नहीं मरेगा, लेकिन मैं तुझे जरूर मार दूंगा!”
रिदांश की इस बात
पर अब मानव की आंखों से आंसू बह गए और अगले ही पल रिदांश ने मानव के गाल पर सच में एक चमाट जड़ दिया!





















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