
स्तुति रिदांश की गाड़ी में आकर बैठी और अगले ही पल रिदांश ने गाड़ी आगे बढ़ा दी थी! स्तुति चुपचाप पैसेंजर सीट पर बैठी थी और अपने हाथों की तरफ देख रही थी और फिर अब तक तो उसने जैसे तैसे खुद को संभाल रखा था लेकिन अब अपने हाथों की मेहंदी देखते हुए वो खुद को और ज्यादा संभाल नहीं पाई और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे!
कुछ पल तो रिदांश को कुछ पता नहीं चला लेकिन जब उसे स्तुति का सुबकना सुनाई दिया तो उसने तुरंत उसकी तरफ देखा, उसे रोते हुए देख वो गुस्से से बोला “अब ये क्या ड्रामा है? अब तो सब कुछ बिल्कुल वैसे हो रहा है ना जैसे तुम चाहती हो तो अब क्यों रोने का ड्रामा कर रही हो? अब और क्या चाहिए?”





















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