
सरगम इंडस्ट्रीज
स्तुति को पता ही नहीं चला कब वो रोते रोते टेबल पर अपना सिर रखकर सो गई! उसकी आंखें जब खुली तब तक 5 बज चुके थे और अब उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें? क्या ना करें? पूरा दिन उसने कुछ नहीं किया था, सारा काम यूं ही पेंडिंग पड़ा था!





















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