
यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। इसमें कुछ दृश्य और चित्र पाठकों को विचलित कर सकते हैं। कृपया अपनी समझ से पढ़ें।
सिकंदर की गाड़ी मार्केट में आकर रुकी लेकिन वो गाड़ी से बाहर नहीं निकला, उसकी गहरी निगाहें इस वक्त सामने की तरफ घूम रही थी और फिर उसके होठों पर तिरछी मुस्कुराहट भी आ गई!






















Write a comment ...