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4,5,6

रात का वक्त

तकरीबन 11 बजे

मित्तल मेंशन के पार्किंग एरिया में एक गाड़ी आकर रुकी और उसमें से संगम बाहर निकला, दूसरे ही पल वो गाड़ी की दूसरी तरफ आया और फिर दरवाजा खोलकर उसने सान्वी की तरफ देखा जो अपनी जगह पर बैठी बैठी आराम से सो रही थी!

उसे देखकर संगम हल्का सा मुस्कुराया और फिर उसने तुरंत सान्वी को अपनी गोद में उठा लिया, सान्वी रास्ते में ही सो गई थी और संगम बिल्कुल नहीं चाहता था कि उसकी नींद खराब हो इसलिए उसने उसे डिस्टर्ब नहीं किया और अब वो उसे अपनी गोद में उठाकर अंदर की तरफ आया!

अंदर आते ही उसकी नजर स्नेहा पर गई जो वही हॉल में इधर-उधर टहल रही थी और अब संगम और सान्वी को देखते ही वो तुरंत उन दोनों के पास आई….

सान्वी को संगम की बाहों में सोते हुए देख वो तुरंत बोली "हे भगवान एक तो ना ये लड़की पता नहीं कैसे गाड़ी में बैठे-बैठे ही सो जाती है? कितनी नींद आती है इसे, कितनी बार कहा है कि ऐसे गाड़ी में मत सोया करो! बस 10-15 मिनट की बात होती है, आखिर तो घर पहुंचना है ना? घर पर जाकर आराम से सो जाओ!”

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही संगम बोला "Stop it स्नेहा मां, आप ऐसे कैसे मेरी सान्वी को डांट रही हो? थैंक गॉड वो सो रही है वरना आपकी डांट सुनकर उसे कितना बुरा लगता!”

स्नेहा तुरंत बोली "उसका तो पता नहीं लेकिन उसकी जगह पर तुम्हें जरूर बुरा लग रहा है, पर तुम खुद सोचो ना! अभी तो तुम उसके साथ थे संगम, अगर तुम्हारे साथ वो सो भी गई तो कोई प्रॉब्लम नहीं लेकिन कभी वो किसी कैब में हो या फिर किसी दोस्त के साथ और ऐसे में अगर ये सो जाए तो तुम जानते हो ना आजकल दुनिया कैसी है?”

उसकी बात पर संगम मुस्कुराया और बोला "पहली बात तो मेरी सान्वी को कभी किसी कैब की या किसी दोस्त की जरूरत नहीं पड़ेगी, उसके लिए उसका भाई हमेशा है और दूसरी बात मेरी सान्वी बहुत समझदार है! उसे पता था कि वो अपने भाई के साथ है तो उसे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी इसलिए वो सोई है स्नेहा मां वरना वो कभी नहीं सोती और अब प्लीज आप चुप हो जाओ, आप मेरी सान्वी को ऐसे नहीं डांट सकती! मैं इसे इसके रूम में सुलाने जा रहा हूं और प्लीज मेरे लिए खाना मत लगाना, मैं सान्वी के साथ बाहर से खा कर आया हूं!”

उसकी बात सुनकर स्नेहा का चेहरा मायूस हो गया था, संगम जो सान्वी को लेकर वहां से जाने ही वाला था वो अचानक से रुका और बोला "अच्छा-अच्छा ठीक है लगा लीजिए, थोड़ा मैं खा लूंगा बाकी का आप! मुझे पता है आपने भी अभी तक कुछ नहीं खाया होगा!”

स्नेहा तुरंत बोली "तुम्हारे बिना खा सकती हूं क्या?”

संगम ने कुछ नहीं कहा, बस हल्का सा मुस्कुराया और फिर सामने की तरफ बढ़ गया जहां पर सान्वी का रूम था।

उसने सान्वी को आराम से बिस्तर पर लेटाया और फिर उसके बालों को सहलाते हुए उसके माथे पर चूमा और अच्छे से उस पर ब्लैंकेट डालकर रूम से बाहर निकल गया!

बाहर आते हुए उसने लाइट भी ऑफ कर दी थी और उसके जाते ही सान्वी ने एक गहरी सांस ली और फिर तुरंत बिस्तर पर उठकर बैठी!

उसने साइड टेबल पर लगा लैंप ऑन किया और फिर जल्दी से अपने पिलो की तरफ देखा जहां पर अभी-अभी संगम उसका फोन रख कर गया था।

उसने तुरंत अपना फोन लिया और उसका वाई-फाई ऑन किया तो उसके फोन पर कई सारे मैसेज एक साथ आए, अब वो उन मैसेज को देखकर परेशान हो रही थी!

ऐसा नहीं था कि वो हमेशा से जाग रही थी बल्कि उसकी आंख तो तब खुली थी जब संगम उसे लेकर अंदर आया था और स्नेहा उसे डांटने में लगी हुई थी।

अभी वो अपने फोन की तरफ देख ही रही थी कि उसका फोन बजा, उसने अपने फोन की स्क्रीन की तरफ देखा जहां पर Rudra लिखा हुआ था।

उसने तुरंत कॉल रिसीव किया और वो कुछ कहती उससे पहले ही सामने की तरफ से रुद्र की आवाज आई “फाइनली तुम अपने घर वापस आ गई और तुमने अपना नेट ऑन कर लिया, मैं तो सोच रहा था कि आज की रात मैं तुम्हें गुड नाइट भी नहीं बोल पाऊंगा!”

उसकी बात पर सान्वी जल्दी से बोली "आई एम सो सॉरी रूद्र, पर वो मैं संगम भाई के साथ थी तो मैंने अपना नेट ऑफ कर रखा था!”

रुद्र हंसते हुए बोला "मुझे तो ये समझ में नहीं आता कि तुम अपने संगम भाई से इतना डरती क्यों हो? अरे यार मैं तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं हूं, बॉयफ्रेंड तो तुम मुझे बनने ही नहीं दे रही हो वरना मैं तो कब का बन चुका होता! फिलहाल तो मैं तुम्हारा फ्रेंड हूं ना तुम्हारा बेस्ट फ्रेंड, फिर भी तुम उनके सामने मुझसे बात नहीं करती हो!”

सान्वी ने एक गहरी सांस ली और बोली "अब मैं तुम्हें क्या ही बताऊं रुद्र कि मैं उनके सामने तुमसे बात क्यों नहीं करती हूं? वो मुझे अभी भी छोटी बच्ची समझते हैं, उन्हें लगता है कि मैं लोगों को पहचान नहीं सकती! उन्हें लगता है कि कोई मेरा गलत फायदा ना उठाए, वो बस मेरे लिए थोड़े प्रोटेक्टिव है! खैर ये सब छोड़ो तुम मुझे ये बताओ कल तुम कॉलेज आओगे क्या?”

रुद्र मुस्कुराते हुए बोला "सिर्फ एक कॉलेज ही तो है जहां पर मैं तुमसे मिल सकता हूं सान्वी तो मैं कॉलेज आना स्किप कैसे कर सकता हूं? मैं कॉलेज जरूर आऊंगा और क्या तुम कल कैंटीन में मेरे साथ कॉफी पियोगी? प्लीज़ प्लीज़ मना मत करना यार, सिर्फ एक कॉफी पीने के लिए तो बोल रहा हूं मैं! कौन सा तुम्हें अपने साथ कहीं बाहर चलने के लिए कह रहा हूं?”

सान्वी जल्दी से बोली "अच्छा-अच्छा बाबा ठीक है कल हम दोनों कॉलेज में ही अपनी कॉफी डेट इंजॉय करेंगे! अब मैं फोन रखती हूं, अगर गलती से भी संगम भाई वापस आ गए तो प्रॉब्लम हो जाएगी! Good night…

ये बोलकर उसने जल्दी से कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया, रूद्र तो सामने से गुड नाइट भी नहीं बोल पाया लेकिन उसने तुरंत गुड नाइट का मैसेज टाइप किया और फिर साथ में एक हार्ट इमोजी लगाकर सान्वी को सेंड कर दिया!

सान्वी अब अपने फोन पर वो मैसेज देखकर मुस्कुरा रही थी।

वहीं दूसरी तरफ

संगम डाइनिंग टेबल पर बैठा था और स्नेहा उसके सामने बैठी थी, दोनों एक दूसरे के साथ खाना खा रहे थे!

संगम ने अब कुछ सोचते हुए पूछा “आप लोग आज बंसल हाउस गए थे ना? विहान और क्या नाम था उस लड़की का? अम्म…

इसके आगे वो कुछ कहता उससे पहले ही स्नेहा थोड़ा मुंह बनाते हुए बोली "लक्षिता!”

संगम तुरंत बोला "हम्म लक्षिता उन दोनों का रिश्ता फिक्स हो गया ना?”

स्नेहा ने एक बार फिर से मुंह बनाया और बोली "उन दोनों का रिश्ता तो फिक्स हो गया, लेकिन तुम्हारा शादी का कोई प्लान है या नहीं संगम? तुम विहान से लगभग 5-6 साल बड़े हो! वो शादी कर रहा हैं लेकिन तुम? तुम तो शादी के बारे में बात तक नहीं करते हो, ऐसा कब तक चलेगा संगम? प्लीज शादी के लिए हां कर दो ना! आई प्रॉमिस तुम जिस लड़की से कहोगे मैं उसी से तुम्हारी शादी करवा दूंगी, तुम कब तक ऐसे सिंगल रहने वाले हो? और एक-दो साल में सान्वी की शादी का भी टाइम आ जाएगा लेकिन मुझे नहीं लगता कि तुम तब तक भी शादी करोगे, प्लीज ऐसे मत करो ना संगम शादी के लिए हां बोल दो ना!”

वो बोले जा रही थी और संगम अब अपनी जगह से उठ गया था, वो नैपकिन से अपने हाथ साफ कर रहा था।

स्नेहा ने अब थोड़े गुस्से से कहा “मैं तुमसे कुछ पूछ रही हूं संगम, कम से कम मुझे जवाब तो दो! तुम शादी करोगे भी या नहीं? या फिर तुम्हारी शादी होते हुए देखने का मेरा ख्वाब ख्वाब ही रह जाएगा?”

संगम ने अब उसके गाल पर अपना हाथ रखा और बोला "क्या जवाब दूं मैं आपको स्नेहा मां? आप खुद बताओ मैं आपको क्या ही जवाब दूं? आप जानती है ना मुझे इन सब चीजों में कोई इंटरेस्ट नहीं है तो आप क्यों मेरी बात नहीं समझ रही? और क्यों बार-बार आप मुझसे शादी का सवाल करते हो? मुझे नहीं करनी शादी और फिलहाल अभी तो बिल्कुल भी नहीं, तीन-चार साल बाद!”

जैसे ही उसने कहा स्नेहा ने तुरंत उसका हाथ झटक दिया और बोली "तीन-चार साल बाद? तब तुम 30 के भी पार हो जाओगे, तब तुमसे कौन ही शादी करेगा? एक तो वैसे ही इतने खडूस हो तुम और तब तो बूढ़े हो जाओगे!”

उसकी बात कर संगम ने अब अपनी आईब्रो हल्की सी ऊपर की तरफ उठाई और बोला “जरा गौर से देखिए मुझे स्नेहा मां, आपको सच में लगता है 30 के बाद मैं बूढ़ा हो जाऊंगा?”

ये बोलते हुए वो खुद भी सामने लगे हुए आईने में खुद को देखने लगा था और उसकी बात सुनकर स्नेहा की बोलती बंद हो गई थी, वो तुरंत अपनी जगह से उठी और अगले ही पल उसने अपनी आंख से थोड़ा सा काजल लिया और फिर उसे संगम के कान के पीछे लगाते हुए बोली "एक तो तुम हो इतने हैंडसम कि मुझे डर लगता है, कहीं तुम्हें किसी की नजर ना लग जाए! थू थू…. हे भगवान मेरे बच्चे को बुरी नजरों से बचाना!”

ये बोलते हुए उसने अपनी दो उंगलियों को पहले अपने माथे पर लगाया और फिर अपने होठों से छुआ!

संगम उसे देखकर मुस्कुराने लगा था, उसने अब एक बार फिर से स्नेहा के गाल पर अपना हाथ रखा और फिर उसके माथे को चूमते हुए बोला "मैं अपनी लाइफ में पूरी तरह से रिजर्व हूं स्नेहा मां! मेरे पास आप हो, मेरे पास सान्वी है, मेरे पास जितना भी प्यार है वो सिर्फ आप लोगों के लिए है और मैं ये प्यार किसी और के साथ बांट ही नहीं सकता इसलिए शादी और मैं? सवाल ही नहीं बनता! वेल अब गुड नाइट, कल सुबह मुझे एक कॉलेज में इवेंट पर जाना है तो मुझे जल्दी उठना होगा! आई लव यू सो मच…

ये बोलकर उसने अब स्नेहा का हाथ भी चूम लिया और फिर वहां से चला गया, स्नेहा तो बस उसकी तरफ देखती रह गई!

अब उसने एक गहरी सांस ली और बोली "अब मैं तुम्हें कैसे समझाऊं संगम कि हमारे लिए तुम्हारा जो प्यार है वो तुम्हारी बीवी के आने से बंट नहीं जाएगा! हमारी वजह से मैं तुम्हारी जिंदगी रुकते हुए नहीं देख सकती, कल को सान्वी की शादी हो जाएगी और वो अपने घर चली जाएगी! मेरा भी कोई पता नहीं कब तक हूं और कब तक नहीं? उसके बाद तुम्हारा क्या? हे भगवान आप ही कुछ करो ना, मेरे संगम को कोई लड़की पसंद करवा दो! किसी से तो उसे प्यार करवा दो, प्लीज भगवान मेरी इतनी सी बात सुन लो!”

ये बोलते हुए उसने अपने सीने पर अपना हाथ रखा हुआ था जैसे मेनिफेस्ट कर रही हो और अब वो डाइनिंग टेबल से बर्तन उठाकर किचन की तरफ चली गई!

सुबह का वक्त

लगभग से 9 बजे!

चित्रांशी आईने के सामने खड़ी थी और रेडी हो रही थी, तभी लक्षिता उसकी तरफ देखते हुए बोली "सुबह-सुबह कहां जा रही हो तुम?”

उसकी बात पर चित्रांशी झट से बोली "और कहां जाऊंगी दीदी? कॉलेज ही जा रही हूं!”

लक्षिता तुरंत बोली “लेकिन आज तो तुम कॉलेज से ऑफ लेने वाली थी ना? मेरी शादी फिक्स हो गई है तो हमें शॉपिंग शुरू करनी है!”

चित्रांशी मुंह बनाते हुए बोली "मुझे तो ऑफ लेना था लेकिन आज हमारे कॉलेज में इवेंट है तो डीन ने कहा है कि मुझे वहां पर प्रजेंट होना पड़ेगा और सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने कहा है कि मुझे चीफ गेस्ट का ख्याल भी रखना है, अब आप बताओ मैं क्या कोई केयर टेकर हूं जो उस चीफ गेस्ट का ख्याल रखूंगी? उसका ख्याल रखने के चक्कर में मुझे आज बेवजह कॉलेज जाना पड़ रहा है! मन तो कर रहा है कि काश मेरे पास उस चीफ गेस्ट का नंबर होता और मैं उसे फोन करके इतना सुनाती इतना सुनाती कि वो हमारे कॉलेज में आता ही नहीं और मुझे भी कॉलेज नहीं जाना पड़ता!”

उसकी बात सुनकर लक्षिता हंसते हुए बोली "अरे अरे शांत हो जाओ मेरी लेडी भीम! कोई बात नहीं अगर कॉलेज जाना है तो तुम आराम से कॉलेज जाओ, जब तुम कॉलेज से वापस आ जाओगी तब हम शॉपिंग पर चलेंगे!” ये बोलकर उसने प्यार से उसके गाल पर अपना हाथ रखा और वहां से चली गई!

चित्रांशी भी अब जल्दी से रेडी हुई, बेशक से वो लक्षिता के साथ शॉपिंग पर जाने का सोच रही थी लेकिन अंदर ही अंदर वो ये भी सोच रही थी कि वो कैसे लक्षिता और विहान की शादी तुडवाए? उसे लक्षिता की शादी विहान के साथ होती हुई नहीं देखनी थी पर फिलहाल तो उसने सब कुछ छोड़कर अपने मेकअप पर ध्यान दिया हुआ था और कुछ ही देर में रेडी होकर वो नीचे आई और फिर ब्रेकफास्ट कर कॉलेज के लिए निकल गई!

मुंबई यूनिवर्सिटी,

तकरीबन11 बजे,

कॉलेज के पार्किंग एरिया में संगम की गाड़ी आकर रुकी और वो गाड़ी से बाहर निकला आज यूनिवर्सिटी में एक खास इवेंट हो रहा था जहां संगम चीफ गेस्ट बनकर आया हुआ था उसके गाड़ी से निकलने के बाद दूसरी गाड़ी में से उसके गॉड्स वगैरा भी निकले और फिर संगम दो चार कदम आगे की तरफ आया जहां पर उसका वेलकम करने के लिए कॉलेज का स्टाफ खड़ा था और स्टाफ के बीचों बीच कुछ स्टूडेंट्स भी खड़े थे जिनमें एक लड़की ने अपने हाथों में आरती की प्लेट पड़ी हुई थी और उसमें कुछ फूल वगैरा

भी रखे हुए थे और वो लड़की कोई और नहीं चित्रांशी थी जो अब गुस्से से मुंह बनाते हुए संगम को देख रहीथी।

चित्रांशी गुस्से से संगम की तरफ देख रही थी, इस वक्त उसका मुंह बना हुआ था और वही संगम की नजरे डीन की तरफ थी! अभी फिलहाल वो चित्रांशी की तरफ नहीं देख रहा था लेकिन अचानक ही उसके चेहरे पर फूल आकर लगे तो एक पल के लिए वो हैरान रह गया!

उन फूलों को अपने चेहरे पर महसूस करते ही उसने अपना चेहरा झटक लिया था और वो हैरानी से चित्रांशी की तरफ देख रहा था जो अभी तक रुकी नहीं थी बल्कि लगातार उसके चेहरे पर फूल मारे जा रही थी।

उसे यूं देखकर कॉलेज का स्टाफ भी दंग रह गया था, सिर्फ चित्रांशी नहीं उसके आसपास जितने भी स्टूडेंट खड़े थे वो सब भी संगम पर फूल बरसा रहे थे लेकिन बेहद प्यार से पर चित्रांशी उन फूलों को संगम पर ऐसे बरसा रही थी जैसे वो उन फूलों से संगम का मुंह तोड़ देना चाहती हो!

डीन ने अब जल्दी से चित्रांशी के कंधे पर अपना हाथ रखा और बोले “बस बस! बस बस बहुत हुआ, अब तुम जल्दी से मिस्टर मित्तल की आरती उतारो ताकि वो अंदर की तरफ चले! इवेंट स्टार्ट हो गया है…

चित्रांशी ने उनकी बात सुनी और फिर संगम की आरती उतारने लगी, कॉलेज का सारा स्टाफ हैरानी से चित्रांशी की तरफ देख रहा था जो जोरों से उस प्लेट को घुमाए जा रही थी।

संगम को भी बहुत अजीब सा फील हो रहा था, तभी एक लड़की आगे की तरफ आई और चित्रांशी की तरफ देखते हुए बोली "मैं एक काम करती हूं, मैं ही सर की आरती उतार देती हूं!”

चित्रांशी ने गुस्से से उसकी तरफ देखा और बोली "क्यों मैं कौन सा प्लेट उनके मुंह पर मार दूंगी? मैं भी तो आरती ही उतार रही हूं!” ये बोलकर उसने उस आरती की प्लेट को और भी ज्यादा कसकर पकड़ लिया और संगम की आरती उतारने लगी!

संगम को अब गुस्सा आने लगा था, आज तक कभी किसी ने उसके साथ इस तरह से बिहेव नहीं किया था जैसे चित्रांशी कर रही थी।

अब तो डीन को भी डर लगने लगा था कि कहीं कोई प्रॉब्लम ना हो जाए, कहीं संगम नाराज ना हो जाए! उन्हें चित्रांशी पर गुस्सा आ रहा था, अगर उसे ये सब नहीं करना था तो वो इस इवेंट में शामिल ही क्यों हुई? उन्होंने कौन सा उसके साथ जबरदस्ती की थी?

आरती के बाद चित्रांशी हल्का सा साइड हुई और फिर आगे की तरफ संगम को रास्ता दिखाते हुए बोली "वेलकम!”

ये बोलते हुए उसने मुंह बनाया हुआ था और उसके शब्द और उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस एक दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे।

संगम को पहले तो लगा शायद वही कुछ ज्यादा सोच रहा है, लेकिन अब तो उसे कंफर्म हो गया था कि चित्रांशी उसका वेलकम कम और उसकी इंसल्ट ज्यादा कर रही है लेकिन फिलहाल उसने कुछ नहीं कहा और आगे की तरफ बढ़ गया!

चित्रांशी ने अब अपने हाथ में पकड़ी हुई प्लेट उस लड़की को दी जो पहले उसके हाथों से वो आरती की प्लेट ले रही थी और बड़बड़ाते हुए बोली "लो अब कर लो तुम्हें जितनी आरती करनी है हुंह!”

ये बोलकर वो भी वहां से आगे की तरफ जाने लगी!

तभी HOD उसकी तरफ देखते हुए थोड़े गुस्से से बोले “ये सब क्या है चित्रांशी? तुम गेस्ट के साथ इस तरह से बदतमीजी कैसे कर सकती हो?”

चित्रांशी ने अब मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा “मैंने कौन सी बदतमीजी की है? मैंने तो वही सब किया जो आप लोगों ने मुझे करने के लिए कहा, उनकी आरती उतारी उनका वेलकम किया! उन पर फूलों की बारिश की, मैंने तो कुछ भी गलत नहीं किया!”

HOD एक बार फिर से बोले “एक बार ये इवेंट खत्म हो जाए, उसके बाद तुम्हें तो मैं बहुत अच्छे से बताऊंगा तुमने क्या गलत किया और क्या नहीं?”

ये बोलकर वो तुरंत आगे की तरफ बढ़ गए ताकि देख सके कि अब आगे तो संगम को कोई प्रॉब्लम नहीं हो रही?

वहीं संगम अब अपनी जगह पर बैठ चुका था और सामने स्टेज की तरफ देख रहा था जहां पर कुछ परफॉर्मेंस चल रही थी।

चित्रांशी भी साइड में खड़ी हुई स्टेज की तरफ देख रही थी, उसे तो इस इवेंट में शामिल भी नहीं होना था! अगर लक्षिता की शादी फिक्स नहीं होती और उन लोगों को शॉपिंग पर नहीं जाना होता तो भी वो इस इवेंट में शामिल नहीं होने वाली थी बल्कि आज का दिन ऑफ लेने वाली थी ताकि अच्छे से अपनी नींद पूरी कर सके जो उसने पिछले कई दिनों से नहीं पूरी की, लेकिन अब वो बेमन से वहां पर खड़ी थी और स्टेज पर हो रही परफॉर्मेंस देख रही थी।

तभी एक प्रोफेसर वहां पर आए और चित्रांशी की तरफ देखते हुए बोले “सर ने कहा था कि सभी गेस्ट को ड्रिंक वगैरह तुम लोग ही सर्व करोगे!”

चित्रांशी मुंह बनाते हुए बोली "हां मेरा तो काम ही यही है, कॉलेज से जाने के बाद मैं वेटर की जॉब ही तो करती हूं!”

तभी उसकी फ्रेंड सुनिधि बोली "अरे यार चित्रांशी क्यों मुंह बना रही है तू? बस 5 मिनट का ही तो काम है और वैसे भी वो चीफ गेस्ट है यार, उनके लिए ड्रिंक वगैरह हमें ही सर्व करनी पड़ेगी! आई नो तू एक अच्छी खासी फैमिली से बिलॉन्ग करती है तो तेरे लिए ये काम सही नहीं है, लेकिन अगर तुम्हारे घर में कोई आए और कभी सर्वेंट ना हो तो क्या तुम उसे पानी भी नहीं पिलाओगी? और वो संगम मित्तल है यार, तू समझ रही है? संगम मित्तल… वो कोई छोटी-मोटी चीज नहीं है, उसे यूं ही कोई ड्रिंक सर्व नहीं कर सकता!”

उसकी बात पर चित्रांशी दांत पीसते हुए बोली "बस बस ज्यादा भाषण देने की जरूरत नहीं है! कर रही हूं मैं ड्रिंक सर्व, तुम लोग ये स्नैक्स वगैरा ले आओ!”

ये बोलकर वो आगे की तरफ आई और फिर साइड में लगी हुई स्टॉल की तरफ देखने लगी जहां पर ड्रिंक और स्नैक्स रखे हुए थे।

अब उसने अपने हाथ में ट्रे उठाई और फिर आगे की लाइन में चली गई जहां पर सभी गेस्ट बैठे थे और सबके बीचों बीच ही संगम बैठा था।

संगम के साथ वहां पर कुछ और गेस्ट भी आए हुए थे तो चित्रांशी सबको ड्रिंक सर्व कर रही थी,

कुछ पल बाद वो संगम के सामने आकर खड़ी हुई और उसने अपने हाथ में पकड़ी हुई ट्रे उसकी तरफ बढ़ाई तो संगम ने एक नजर उसकी तरफ देखा और बोला "इट्स ओके, मुझे नहीं चाहिए!”

उसका जवाब सुनकर चित्रांशी उसे घूरते हुए मन ही मन बोली "एक तो मैं स्पेशली इसके लिए ड्रिंक लेकर आई हूं और इस महाशय को मुझे नखरे दिखाने हैं, पक्का ये चाहता होगा कि मैं पहले तो यहां से जाऊं और फिर HOD मुझे सुनाए कि मैंने अच्छे से ड्रिंक सर्व नहीं की और फिर मुझे दोबारा इसके सामने वेटर बनकर आना पड़े! अच्छा बच्चू इतनी लंबी प्लानिंग? तुम्हें तो मैं बताती हूं…

ये बोलकर उसने एकदम से अपनी ट्रे हिलाई तो उस पर रखा हुआ कांच का गिलास तुरंत नीचे गिरा और फिर सारी ड्रिंक संगम के ऊपर ही बिखर गई!

संगम की आंखें बड़ी हो गई और वो जोरों से चिल्लाया “What The Hell?”

चित्रांशी अब मासूम बनते हुए जल्दी से बोली “एम सो सॉरी सर वो पता नहीं कैसे मेरा हाथ थोड़ा सा हिल गया?” ये बोलते हुए उसने ट्रे को नीचे रखा और फिर सामने ही रखे हुए नैपकिन उठाकर जल्दी से संगम के कपड़ों को साफ करने लगी!

संगम गुस्से से उसे घूर रहा था क्योंकि वो बहुत अच्छी तरह से जानता था कि चित्रांशी ने ये सब कुछ जानबूझकर किया है!

प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल दोनों अपनी जगह से उठ चुके थे, प्रिंसिपल जल्दी से संगम की तरफ देखते हुए बोले “आपके तो सारे कपड़े खराब हो गए हैं मिस्टर मित्तल! आप एक काम कीजिए वॉशरूम जाकर इन्हें थोड़ा क्लीन कर लीजिए, एक काम करो चित्रांशी तुम मिस्टर मित्तल को वॉशरूम की तरफ ले जाओ!”

चित्रांशी ने गुस्से से मुंह बनाया और मन ही मन बोली "इस इंसान को मैं घर तक ना ड्रॉप कर आऊं? बस यही तो काम रह गया मेरी जिंदगी में, कभी इन्हें ड्रिंक सर्व करो तो कभी इनके कपड़े साफ करो!” ये बोलते हुए वो गुस्से से दांत पीस रही थी।

उसकी बातें संगम को सुन नहीं रही थी लेकिन उसकी नज़रें चित्रांशी के एक्सप्रेशंस पर ही थी, चित्रांशी ने अब इरिटेट होते हुए कहा “चलिए मेरे साथ!”

संगम ने एक गहरी सांस ली और चुपचाप उसके साथ चलने लगा!

तकरीबन 1 मिनट बाद वो दोनों वॉशरूम एरिया में आ चुके थे और संगम अब अंदर की तरफ जाने लगा, चित्रांशी बाहर ही खड़ी थी और सोच रही थी कि जब संगम अंदर चला जाएगा तो वो तुरंत वहां से भाग जाएगी! अब उसे इन फालतू की चीजों में और ज्यादा टाइम वेस्ट नहीं करना था लेकिन अचानक ही संगम ने उसके कलाई पकड़ी और उसे अंदर की तरफ ले गया!

चित्रांशी जोरों से चिल्लाई “ये क्या हरकत है? छोड़िए मुझे, आप मुझे अंदर कहां लेकर जा रहे हैं?”

संगम ने अब उसकी कलाई को मरोड़ते हुए अचानक से ही उसे पीछे दीवार से लगाया और फिर खुद पूरी तरह से उसके ऊपर झुक गया, चित्रांशी दंग रह गई!

संगम उसे घूरते हुए बोला "मैंने आज तक तुम जैसी बदतमीज लड़की नहीं देखी, मैं यहां इस कॉलेज में चीफ गेस्ट बनकर आया हूं लेकिन तुम मेरे साथ ऐसे बिहेव कर रही हो जैसे मैं यहां जबरदस्ती आया हूं और तुम मुझे इंसल्ट करना चाहती हो!”

चित्रांशी की आंखों में आंसू आ गए थे, जैसे संगम ने उसकी कलाई को मरोड़ा हुआ था उसे दर्द होने लगा था।

वो भी तकलीफ भरी आवाज में बोली "जबरदस्ती तो मेरे साथ हो रही है, मैं इस इवेंट में आना नहीं चाहती थी लेकिन मुझे जबरदस्ती यहां पर आने के लिए कहा गया और फिर यहां आकर कभी आपकी आरती उतारूं! कभी आप पर फूल बरसाऊं कभी आपको ड्रिंक सर्व करूं, अरे मैं कोई आपकी नौकर हूं क्या? यहां पूरा स्टाफ है ये सब काम करने के लिए लेकिन नहीं किसी को ये सब काम स्टाफ से नहीं करवाना बल्कि मुझसे करवाना है! आपको पता है मेरी मॉम भी मुझसे कोई काम नहीं करवाती क्योंकि वो कहती है कि मैं प्रिंसेस हूं और यहां इस प्रिंसेस को कामवाली बाई बना कर रखा हुआ है, आप खुद ही बताइए मुझे देखकर कि क्या मैं आपको कहीं से कामवाली बाई लगती हूं? कितनी सुंदर तो हूं मैं, मुझ पर ये सब काम अच्छे लगते हैं क्या?”

ये बोलते हुए उसकी नाक एकदम लाल हो चुकी थी और आंखों में आंसू होने की वजह से उसकी आंखें भी बेहद खूबसूरत लग रही थी और होठों का तो कहना ही क्या, वो तो ऑल

रेडी एकदम पिंक पिंक थे।

उसकी बात सुनकर संगम कुछ पल तो उसकी तरफ देखता ही रह गया था।

जिस तरह मासूमियत से चित्रांशी ने अपनी बात कही और जितना क्यूट उसने अपना चेहरा बनाया संगम कुछ पल उसकी तरफ देखता रह गया, लेकिन उसकी नजरों में अट्रैक्शन बिल्कुल भी नहीं थी! वो यूं ही उसे देख रहा था और अब उसके होठों पर सारकास्टिक स्माइल आ गई…

वो चित्रांशी की तरफ देखते हुए ही बोला "अगर तुम्हें लगता है कि ये हरकतें करके तुम मुझे अपनी तरफ अट्रैक्ट कर लोगी तो तुम बहुत बड़ी गलतफहमी में हो, मैं जानता हूं उन लड़कियों को जो जानबूझकर लड़कों के सामने इस तरह की हरकतें करती है ताकि सामने वाले के दिमाग में वो अच्छे से बैठ जाए और फिर सामने वाला उनके लिए पागल हो जाए! लेकिन संगम मित्तल पागल होने वालों में से नहीं है, तुम्हारी इन हरकतों पर अभी तो फिलहाल मैं तुमसे कुछ नहीं कह रहा! तुम्हें माफ कर रहा हूं…

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही चित्रांशी बोली "सीरियसली? आप मुझे माफ कर रहे हैं? अच्छा जरा ये बताइए आप मुझे ये माफी मेरे किस क्राइम की दे रहे हैं? ऐसा भी क्या कर दिया मैंने जो आपको मुझे माफ करना पड़ रहा है?”

संगम गुस्से से बोला "मेरे सामने जुबान मत चलाओ, छोटी हो छोटी बनकर रहो!”

चित्रांशी तुरंत बोली "बिल्कुल भी छोटी नहीं हूं मैं, पूरे 19 साल की हूं इसलिए गलती से भी मुझे छोटी तो कह मत देना!”

संगम अब इरिटेट होकर बोला "सच में बहुत ज्यादा बदतमीज हो तुम, पता नहीं तुम्हारे घर वाले कैसे ही तुम्हें बर्दाश्त करते होंगे? लेकिन उनकी मजबूरी होगी तुम्हें बर्दाश्त करना! संगम मित्तल तुम जैसों को बर्दाश्त नहीं करता…

ये बोलकर उसने हल्के से उसकी कलाई को मरोड़ा तो चित्रांशी दर्द से चिल्ला उठी, संगम एक बार फिर से बोला “तुम्हारा तो पता नहीं तुम प्रिंसेस हो या नहीं! लेकिन संगम मित्तल एक किंग है और किंग के सामने किसी की औकात नहीं होती अपनी नज़रें और अपने सर को उठाने की इसलिए आइंदा अगर मेरे सामने आ भी जाओ तो अपनी नजरों को और अपने इस सर को नीचे रखना वरना बहुत पछताओगी तुम, आज छोड़ रहा हूं तुम्हें अगली बार नहीं छोडूंगा!”

ये बोलकर अब उसने एक झटके से चित्रांशी की कलाई को छोड़ भी दिया था और चित्रांशी गुस्से से मुंह बनाते हुए उसकी तरफ देख रही थी, गुस्से से उसका पूरा चेहरा लाल हो चुका था!

संगम अब पीछे की तरफ हटा और अगले ही पल अपनी पॉकेट में हाथ डालते हुए बोला "अपने कॉलेज वालों को बोल देना संगम मित्तल यहां से चला गया, जहां संगम मित्तल की रिस्पेक्ट ना हो वहां संगम मित्तल एक पल भी नहीं रुकता!”

ये बोलते हुए उसका चेहरा एकदम सख्त हो चुका था और चित्रांशी बस उसकी तरफ देखे जा रही थी, गुस्से से वो काफी गहरी गहरी सांसे ले रही थी और उसका गुस्सा उसकी आंखों में साफ झलक रहा था।

संगम अब एक पल भी वहां पर नहीं रुका और वहां से चला गया, चित्रांशी ने अपनी कलाइयों की तरफ देखा जहां पर संगम की उंगलियों के निशान साफ विजिबल हो रहे थे।

वो रोते हुए बोली "दुनिया में कितने गंदे गंदे इंसान है, अरे नहीं करनी मुझे इनकी सेवा तो मैं क्यों करूं? होंगे ये कहीं के किंग पर मैं कोई इनकी दासी थोड़ी ना हूं जो इनकी सेवा में लग जाऊंगी! आए बड़े मुझे एटीट्यूड दिखाने वाले, मैं संगम मित्तल हूं मैं किंग हूं…

ये बोलते हुए वो संगम की मिमिक्री कर रही थी और अब उसने अपना नाक सिकोड़ते हुए कहा “भाड़ में जाए संगम मित्तल!” ये बोलकर उसने अपनी आंखों की नमी को साफ किया और फिर वॉशरूम से बाहर आ गई!

वो सीधा स्टेज की तरफ आई जहां पर कॉलेज का स्टाफ भी था और प्रिंसिपल के साथ वाइस प्रिंसिपल भी!

वो उन लोगों के सामने आकर खड़ी हुई और बिल्कुल नॉर्मल होकर बोली "संगम मित्तल यहां से चले गए!”

प्रिंसिपल चौंकते हुए अपनी जगह से उठे और बोले “क्या? संगम मित्तल यहां से चले गए लेकिन क्यों?”

 

HOD जो ऑलरेडी चित्रांशी को गुस्से से देख रहा था वो तुरंत बोला “अब इतना सब कुछ होने के बाद वो यहां पर रुकते भी कैसे? मुझे तो पहले ही समझ आ गया था कि वो बेशक से खुद को शांत रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यहां के कुछ बदतमीज स्टूडेंट उन्हें शांत रहने नहीं देंगे! इस कॉलेज के फ्यूचर के लिए उनके साथ रिलेशन होना कितना ज्यादा इंपॉर्टेंट था ये सिर्फ हम लोग जानते हैं, यहां के बदतमीज स्टूडेंट्स को इस चीज की क्या ही खबर?”

ये बोलते हुए वो चित्रांशी को ही देख रहे थे और चित्रांशी का मन कर रहा था कि जो फूल वो संगम के चेहरे पर नहीं मार सकी अब वो उस HOD के सिर पर मार दे!

प्रिंसिपल ने भी गुस्से से चित्रांशी की तरफ देखा और फिर तुरंत वहां से चले गए, अब चित्रांशी के चेहरे पर थोड़ा डर झलकने लगा था ये सोचकर कि कहीं इन सब बातों की खबर उसके मॉम डैड को ना कर दी जाए? वैसे तो सोमेश जी उससे बहुत प्यार करते थे! उसे कभी जरा सा डांटते तक नहीं थे लेकिन कल उसने पहले स्नेहा मित्तल के साथ बदतमीजी की और आज संगम मित्तल के साथ तो कहीं वो उससे सच में नाराज ना हो जाए!

हालांकि उसे ये नहीं पता था कि स्नेहा मित्तल और संगम मित्तल बेशक से दो नाम अलग-अलग है, लेकिन दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं!

वो भी अब अपना मायूस का चेहरा लेकर वहां से चली गई!

लगभग से 1 घंटे बाद

चित्रांशी कॉलेज से जाने की प्रिपरेशन कर रही थी, वो गाड़ी में कॉलेज आई थी! उसका ड्राइवर उसे सुबह छोड़कर चला जाता था और फिर दोपहर में लेने आता था और अब वो पार्किंग एरिया में खड़ी ड्राइवर का इंतजार कर रही थी कि एक स्टूडेंट उसके पास आया और उसकी तरफ देखते हुए बोला "तुम्हें प्रिंसिपल सर ने अपने केबिन में बुलाया है!”

चित्रांशी ने तुरंत पूछा “लेकिन क्यों?”

वो लड़का हंसकर बोला "आज तुमने जो किया है उसके बाद शायद उनका तुम्हें अवार्ड देने का मन कर रहा होगा, जाओ जाकर अपना अवार्ड ले लो!”

चित्रांशी मुंह बनाते हुए बोली "कहीं मैं तुम्हारा मुंह ना फोड़ दूं, भाग जाओ यहां से!” ये बोलते हुए उसने उस लड़के को मुक्का दिखाया और फिर खुद तुरंत प्रिंसिपल के केबिन की तरफ बढ़ गई!

तकरीबन 5 मिनट बाद वो प्रिंसिपल के सामने खड़ी थी और प्रिंसिपल चुपचाप उसकी तरफ देख रहे थे, चित्रांशी की आंखों में नमी थी! अभी-अभी प्रिंसिपल ने उसे जो कहा था उसे सुनकर उसे बहुत बुरा लग रहा था!

प्रिंसिपल उसकी तरफ देखते हुए बोले “इसके अलावा मेरे पास और कोई ऑप्शन नहीं है चित्रांशी, कॉलेज में तुम हमेशा अपने गुस्से की वजह से प्रोफेसर्स और स्टाफ के साथ बदतमीजी कर जाती हो! लेकिन तुम्हारे डैड की वजह से हमने कभी तुम्हें कुछ नहीं कहा पर इसका मतलब ये नहीं कि तुम कुछ भी करोगी और हम लोग बर्दाश्त करते रहेंगे, तुमने जो गलती की है तुम्हें उसकी भरपाई करनी ही पड़ेगी! तुम्हें मिस्टर संगम मित्तल से माफी मांगनी ही पड़ेगी वरना मजबूरन हमें तुम्हारे डैड को कॉलेज बुलाना पड़ेगा, आई ना वो तुमसे बहुत प्यार करते हैं तो शायद वो तुम्हें कुछ ना कहे लेकिन अगर उनका बच्चा किसी गलत ट्रैक पर जा रहा है! बदतमीजी कर रहा है तो उसकी इन गलतियों को कोई भी पेरेंट्स सपोर्ट नहीं करते और तुम्हारे पेरेंट्स भी नहीं करेंगे!”

चित्रांशी कुछ सोचते हुए बोली "क्या आप मुझे और कोई ऑप्शन नहीं दे सकते? नेक्स्ट जो इवेंट होगा उसमें मैं पक्का अच्छे से सब कुछ करूंगी, बेशक से आप मिस्टर मित्तल को ही दोबारा चीफ गेस्ट बनाकर बुला लीजिएगा लेकिन अभी के लिए तो ये सब छोड़ दीजिए सर!”

उसकी बात पर वाइस प्रिंसिपल ने अपना चेहरा ना में हिलाया और बोला "नहीं तुम्हारे लिए अब मेरे पास और कोई ऑप्शन नहीं है, मिस्टर मित्तल का एड्रेस मैं तुम्हें प्रोवाइड करवा दूंगा! तुम्हें या तो उनके घर जाकर उनसे सॉरी कहना होगा या फिर उनके ऑफिस जाकर, अब मुझे कुछ काम है तो मैं चलता हूं तुम सोच लो तुम्हें क्या करना है?”

ये बोलकर वो अपनी जगह से उठे और अपने केबिन से चले गए!

चित्रांशी मुंह बनाते हुए बोली "मिस्टर संगम मित्तल मेरा मन कर रहा है मैं सच में आपका मुंह तोड़ दूं, आपकी वजह से मुझे लोग ब्लैकमेल कर रहे हैं हुंह! क्या ही जरूरत थी आपको यहां से जाने की? जब इतना सब कुछ हो ही गया था तो 10-15 मिनट और यहां पर रुक जाते पर नहीं आपको तो एटीट्यूड दिखाना था! अब मैं क्या करूं?”

ये बोलते हुए वो सुबकने लगी थी!

लगभग से 3 घंटे बाद,

स्नेहा आभा और शारदा जी के साथ सोफे पर बैठी थी और सामने ही पंडित जी बैठे थे जो लक्षिता और विहान की कुंडली देख रहे थे!

पंडित जी कुछ सोचते हुए बोले “ये तो बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो गई!”

उनकी बात सुनकर शारदा जी के चेहरे पर परेशानी झलकने लगी थी, स्नेहा ने तुरंत पूछा “क्या हुआ पंडित जी? सब कुछ ठीक तो है ना?”

पंडित जी ने अपना सिर हां में हिलाया और बोले “वैसे तो सब कुछ ठीक है लेकिन शादी के शुभ मुहूर्त में गड़बड़ी आ रही है, वो क्या है कि अगले 3 महीने तक शादी के शुभ मुहूर्त नहीं है!”

जैसे ही उन्होंने कहा अब स्नेहा और आभा भी एक दूसरे की तरफ देखने लगी थी।

स्नेहा जल्दी से बोली "लेकिन कोई मुहूर्त तो होगा ना पंडित जी?”

पंडित जी ने अब एक बार फिर से कहा “हां एक मुहूर्त है! लेकिन वो काफी जल्दी हो जाएगा मतलब दो दिन बाद, ऐसे में तो आप लोग शादी की रस्में भी ढंग से नहीं कर पाओगे!”

आभा भी तुरंत बोली "ये बात तो आपने बिल्कुल सही कहीं पंडित जी!”

लेकिन तभी स्नेहा बोली "ऐसे कैसे शादी की रस्में नहीं होगी? पूरे 2 दिन है, इसमें शादी की रस्में भी अच्छे से हो जाएंगी और सारी तैयारी भी! आप एक काम कीजिए पंडित जी आप यही वाला मुहूर्त फाइनल कर दीजिए, बस मैं एक बार यशोदा जी से बात कर लूं! उनसे पूछ लूं उनकी क्या राय है? उसके बाद शादी इसी मुहूर्त पर होगी…

शारदा जी हैरानी से बोली "लेकिन इतनी सारी तैयारियां दो दिन में कैसे हो जाएगी स्नेहा? सबको न्यौता देना है! इतने सालों बाद इस घर में शादी हो रही है तो सारी तैयारियां अच्छे से करनी होगी, मैं चाहती हूं विहान की शादी धूमधाम से हो!”

स्नेहा ने उनके हाथ को अपने हाथ में थामा और बोली "सासू मां पहले आप मुझे ये बताइए कि आपके लिए धूमधाम से हुई शादी मायने रखती है या फिर विहान की खुशियां? अगर आप विहान के सामने ये दोनों ऑप्शन रखेंगी ना तो मैं पूरे यकीन के साथ कह सकती हूं कि विहान दो दिनों वाला शादी का मुहूर्त सेलेक्ट करेगा, अरे आप लोगों ने उसका चेहरा नहीं देखा क्या? उसके चेहरे पर साफ दिखाई देता है कि वो लक्षिता के बिना दो दिन तो क्या 2 मिनट भी नहीं रह सकता! ऐसे में हमें लोगों से क्या लेना देना? हमें बस विहान और लक्षिता की खुशियां देखनी चाहिए, अब आप पंडित जी को दान दक्षिणा दीजिए मैं जाकर यशोदा जी से बात करती हूं! आभा भाभी मैं उनसे बात कर लूं ना?”

आभा चौकते हुए बोली "ऑफकोर्स तुम ही उनसे बात करो, मुझे तो खुद इतनी एंजायटी हो रही है तो मैं तो उनसे क्या ही बात करूंगी?”

स्नेहा हंसते हुए बोली "ये सारी एंजायटी दूर हो जाएगी जब शादी की तैयारियां शुरू हो जाएगी, अब आप मुझे बस थोड़ा सा टाइम दीजिए!” ये बोलकर वो तुरंत अपनी जगह से उठी और फिर बाहर की तरफ चली गई, अब वो अपने फोन से यशोदा जी को कॉल कर रही थी।

वहीं दूसरी तरफ

संगम अपनी चेयर पर बैठा था और चित्रांशी उसके सामने खड़ी थी, अचानक से ही सं

गम को गुस्सा आया! उसने अपने टेबल पर रखी हुई हॉट कॉफी उठाई और सीधा चित्रांशी के मुंह पर दे मारी…

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