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7,8,9

संगम सामने चेयर पर बैठा था और चित्रांशी उसके सामने खड़ी थी, संगम का चेहरा अचानक से ही गुस्से से लाल होने लगा और उसने सामने टेबल पर रखी हुई कॉफी उठाई और उसे ज़ोर से चित्रांशी के चेहरे पर फेंक दिया!

अगले ही पल चित्रांशी का चेहरा जलने लगा और वो जोरों से चिल्लाई “मेरा चेहरा जल गया, मेरा चेहरा जल गया! कोई बचाओ मुझे मेरा चेहरा जल गया…

उसकी आवाज सुनते हुए ड्राइवर ने अचानक से गाड़ी रोक दी और चित्रांशी की तरफ देखने लगा! चित्रांशी इस वक्त गाड़ी की बैक सीट पर लगभग से लेटी हुई थी और जोरो से चिल्लाए जा रही थी, शायद वो कोई सपना देख रही थी!

ड्राइवर उसकी तरफ देखते हुए बोला “क्या हुआ मैडम? आप ठीक तो है ना?”

ड्राइवर की बात सुनकर भी चित्रांशी को होश नहीं आया, वो अभी भी लगातार चिल्लाए जा रही थी “कोई तो बचाओ मुझे, इस आदमी ने मेरा चेहरा जला दिया! मैंने पहले ही कहा था ये संगम मित्तल कोई राक्षस है राक्षस, प्लीज मुझे बचाओ प्लीज मुझे बचाओ!”

ये बोलते हुए वो लगातार अपने चेहरे को रगड़ रही थी और ड्राइवर को तो डर लगने लगा था कि आखिर चित्रांशी को हो क्या गया है? अगर गलती से भी चित्रांशी को कुछ हो गया तो सोमेश बंसल तो उसे कच्चा चबा जाएगा!

अब वो तुरंत अपनी गाड़ी से बाहर निकला और फिर हेल्प के लिए इधर-उधर देखने लगा क्योंकि वो खुद तो चित्रांशी को हाथ लगा नहीं सकता था।

तभी उसकी नजर सामने से गुजर रही एक गाड़ी पर गई, वो तुरंत उस गाड़ी के सामने जाकर खड़ा हो गया और उस गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठा हुआ शख्स ये देखकर हैरान रह गया! भला कोई ऐसे बीच रोड में आकर खड़ा होता है क्या? और वो इंसान कोई और नहीं खुद संगम मित्तल था।

उसने अब तुरंत गाड़ी की ब्रेक लगाई और फिर गुस्से से लाल होते हुए अपनी गाड़ी से बाहर निकला और अगले ही पल उसने उस ड्राइवर का गिरेबान पकड़ लिया था लेकिन वो कुछ कहता उससे पहले ही ड्राइवर अपने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए बोला "प्लीज मेरी मेमसाब को बचा लीजिए, प्लीज मेरी मेमसाब को बचा लीजिए!”

उसका गिड़गिड़ाना सुनकर संगम के कानों में स्नेहा की आवाज गूंजने लगी थी “बेशक से तुम जितना मर्जी एटीट्यूड रखो संगम लेकिन एक बात याद रखना, कभी भी तुम्हारा ये एटीट्यूड किसी की जान से बढ़कर नहीं होना चाहिए!”

स्नेहा की बात याद करते ही संगम का हाथ ड्राइवर के गिरेबान पर थोड़ा ढीला हो गया था, वो ड्राइवर अब उसके पैरों में गिरते हुए बोला "मेरी मेमसाब को अचानक से पता नहीं क्या हो गया है? वो जोरों से चिल्लाए जा रही है और चिल्लाते हुए बोल रही है कि कोई उन्हें संगम मित्तल से बचाए!”

उसके मुंह से अपना ही नाम सुनकर संगम की आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई थी, उसने ड्राइवर से कुछ नहीं कहा बल्कि गाड़ी की तरफ देखा और फिर जब बैक सीट का दरवाजा आकर खोला तो सामने ही सीट पर चित्रांशी को पूरी तरह से लेटे हुए देख और उसे सच में चिल्लाते हुए देख उसके होठों पर डेविल स्माइल आ गई थी।

वो मन ही मन बोला "अभी तो मैंने तुम्हें कुछ कहा भी नहीं था Wild Kitten और तुम तो वाइल्ड से बेचारी हो गई, सपने में भी मेरे बारे में सोचते हुए चिल्ला रही हो रो रही हो! कितना अफसोस हो रहा होगा ना इस वक्त तुम्हें कि तुमने संगम मित्तल से पंगा लिया, ऐसा ही अफसोस होना चाहिए सबको जो लोग संगम मित्तल से पंगा लेने का सोचते हैं! बट इट्स ओके तुम्हारी हेल्प मैं कर सकता हूं…

ये बोलकर अगले ही पल उसने चित्रांशी पर झुकते हुए उसे एकदम से अपनी बाहों में खींचा तो चित्रांशी होश में आई, उसकी आंखें पूरी तरह से खुल गई थी और वो हैरानी से संगम की तरफ देख रही थी।

वो घबराते हुए बोली “आपने… आपने मेरा पूरा चेहरा जला दिया!”

संगम ने बड़ी ही दिलकश आवाज में कहा “संगम मित्तल तो लोगों को पूरी तरह से जलाकर राख कर देता है, तुम खैर मनाओ कि तुम्हारा तो सिर्फ चेहरा ही जलाया है Wild Kitten!”

उसकी बात पर चित्रांशी चौकते हुए बोली "आपने मेरा पूरा चेहरा जला दिया और आप कह रहे है कि मैं खैर मनाऊं?” ये बोलते हुए उसने अपने चेहरे पर अपने हाथ रख लिए थे लेकिन फिर उसे अजीब सा फील हुआ!

अभी तक वो अपने चेहरे को रगड़ रही थी तो उसे ऐसा लग रहा था जैसे वहां पर कुछ गीला गीला है, लेकिन वो सपने में थी तो इसलिए उसे ऐसा फील हो रहा था पर अब उसे अपने चेहरे पर कुछ भी अजीब फील नहीं हो रहा था।

वो दंग रह गई और फिर अगले ही पल उसने अपने आसपास एक नजर घुमाई तो खुद को संगम के साथ सड़क के किनारे पर महसूस करते हुए वो और भी ज्यादा हैरान रह गई थी।

अब उसकी नजर अपने ड्राइवर पर गई, वो ड्राइवर तुरंत हाथ जोड़ते हुए आगे की तरफ आया और बोला "थैंक गॉड मैडम आप ठीक हो गई! वरना मुझे तो डर लगने लगा था, अगर आपको कुछ हो जाता तो आपके डैड मुझे छोड़ते नहीं! बचपन में एक बार मेरी वजह से आपके पैर पर चोट लग गई थी तो उन्होंने मुझे बहुत डांटा था!”

चित्रांशी कुछ कहती उससे पहले ही संगम ने ड्राइवर की तरफ देखते हुए पूछा “सिर्फ डांटा था?”

ड्राइवर ने अपना चेहरा हां में हिला दिया!

संगम थोड़े एटीट्यूड से बोला "अगर तुम्हारी वजह से उन लोगों को तकलीफ आई होती जो मेरी दुनिया है तो कसम से, अब तक तो तुम जिंदा भी नहीं रहते!”

उसकी बात सुनकर ड्राइवर की हालत तो खराब हुई ही, साथ में चित्रांशी भी हैरानी से उसकी तरफ देख रही थी! उसके भी रोंगटे खड़े हो चुके थे और अब संगम चित्रांशी को लेकर अपनी गाड़ी की तरफ आया!

अगले ही पल उसने अपने एक हाथ से बड़ी ही स्मूथली बैक सीट का दरवाजा खोला और फिर चित्रांशी को अंदर की तरफ फेंक दिया!

चित्रांशी की बैक पर जोरों से लगी और वो एकदम से चिल्लाई “आह्ह्ह्ह्ह…

वो गुस्से से बोली "मैं इंसान हूं कोई चीज नहीं जिसे आप ऐसे फेंक रहे हैं!”

अभी वो बोल ही रही थी कि संगम अपने दोनों हाथ गाड़ी के दरवाजे पर रखते हुए उसके ऊपर झुका और बोला "जो लोग संगम मित्तल के साथ बदतमीजी करें, संगम मित्तल उन लोगों को इंसान समझे इतना भी मासूम नहीं संगम मित्तल!”

चित्रांशी उसकी बात पर उसकी तरफ देखती रह गई और अब संगम ने तुरंत गाड़ी का दरवाजा बंद किया!

ड्राइवर अभी भी हैरानी से संगम की तरफ देख रहा था, उसे संगम से हेल्प चाहिए थी लेकिन यहां तो संगम ने उसकी मैडम को ही अपनी गाड़ी में डाल लिया था।

वो जल्दी से आगे आया और बोला "आप मेरी मैडम को कहां लेकर जा रहे हैं?”

संगम ने थोड़े सख्त एक्सप्रेशंस के साथ पूछा “तुम्हारी मैडम का एड्रेस क्या है?”

ड्राइवर लड़खड़ाती हुई आवाज में बोला "बंसल… बंसल हाउस, वो सोमेश बंसल है ना उन्हीं की बेटी है मेरी मैडम!”

उसकी बात सुनते हुए संगम के एक्सप्रेशन थोड़े से चेंज हो गए थे, वो बहुत अच्छी तरह से जानता था सोमेश बंसल को और ये बात भी उसे पता थी कि सोमेश बंसल की बेटी के साथ ही तो विहान की शादी हो रही है!

उसने जल्दी से पूछा “इसका नाम क्या है?”

ड्राइवर ने भी झट से जवाब दिया “चित्र… चित्रांशी… चित्रांशी बंसल!”

संगम ने अब राहत की एक सांस ली क्योंकि अगर उस लड़की का नाम लक्षिता बंसल होता तो शायद उसकी विहान से लड़ाई हो जाती क्योंकि ऐसी लड़की से वो विहान को शादी तो बिल्कुल नहीं करने देता और अगर बदले में लड़ाई होती तो हो जाती उसे घंटा फर्क नहीं पड़ता!

अब वो अपनी गहरी निगाहों से वापस चित्रांशी को देख रहा था जो गाड़ी से निकलने की कोशिश कर रही थी लेकिन गाड़ी में लॉक लगा हुआ था!

संगम ने अब थोड़ी गहरी आवाज में कहा “तुम जाओ वापस बंसल हाउस, तुम्हारे वहां पहुंचने से पहले तुम्हारी मैडम सही सलामत वहां पहुंच जाएगी!”

ये बोलकर वो एक पल रुका और फिर ड्राइविंग सीट की तरफ बढ़ गया, जैसे ही वो ड्राइविंग सीट पर आकर बैठा चित्रांशी दांत पीसते हुए बोली "मैं तुम्हारा मुंह नोच लूंगी! अभी इसी वक्त मुझे गाड़ी से बाहर निकालो, तुम कहां लेकर जा रहे हो मुझे? मैंने तो सोचा था संगम मित्तल बहुत बड़ा बिजनेसमैन है! पक्का उसका बहुत नाम होगा तभी वो हमारे कॉलेज में चीफ गेस्ट बनकर आया, लेकिन तुम तो एक नंबर के आवारा निकले! तुम मुझे किडनैप कर रहे हो? चुपचाप मुझे अपनी गाड़ी से नीचे उतारो वरना मेरे डैड छोड़ेंगे नहीं तुम्हें, बेशक से उन्होंने मेरे पैर पर चोट लगने पर ड्राइवर से कुछ नहीं कहा लेकिन वो मुझसे बहुत प्यार करते हैं! वो तुम्हारी जान ले लेंगे…

वो बोलती रह गई और संगम ने गाड़ी स्टार्ट कर दी थी, चित्रांशी उसके पीछे झुकी हुई उसके कंधों पर अब अपने हाथ रख चुकी थी और उसकी गर्दन को दबाने लगी थी।

वो उसे धमकी दे रही थी कि अगर अभी इसी वक्त संगम ने गाड़ी नहीं रोकी तो उसका गला दबा देगी और उसकी धमकियां सुनते हुए संगम का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ चुका था।

अचानक ही उसने गाड़ी की ब्रेक लगाई और फिर तुरंत गाड़ी से बाहर निकल कर चित्रांशी की तरफ आया, उसने जैसे ही गाड़ी का दरवाजा खोला उसकी नजर चित्रांशी पर गई जिसकी आंखों में आंसू थे।

बेशक से वो संगम से लड़ रही थी लेकिन उसे डर भी लग रहा था और अब अचानक से संगम ने अपने गले में पहनी हुई टाई को खींचा और फिर अगले ही पल चित्रांशी के हाथों की तरफ बढ़ाया तो चित्रांशी और भी ज्यादा डर गई!

वो रोते हुए बोली "ये क्या कर रहे हो तुम मेरे साथ? तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो? तुम तो दिखने में इतने अच्छे खासे हो, इतना रुतबा है तुम्हारा फिर भी तुम मेरे साथ इतनी गंदी हरकत…

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही संगम ने अपनी आईब्रो हल्की सी ऊपर की तरफ उठाते हुए पूछा “जब पता है कि मेरा बहुत ज्यादा रुतबा है तो कॉलेज में मेरी इंसल्ट करने की हिम्मत भी कैसे हुई थी तुम्हारी?”

उसके सवाल पर चित्रांशी एकदम से खामोश हो गई और अब संगम ने उसके हाथों को अपनी टाई से पूरी तरह से बांध दिया था ताकि अब जब वो गाड़ी चलाए तो चित्रांशी उसे परेशान ना कर सके!

चित्रांशी अब तक तो गुस्से में लाल हो रही थी लेकिन अब उसका चेहरा किसी रैबिट की तरह एकदम से मासूम हो गया था, उसका लाल हो चुका नाक उसे और भी ज्यादा मासूम बना रहा था और वो और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी लेकिन संगम की आंखों को उसकी खूबसूरती कहां दिखाई दे रही थी? वो तो बस अब दोबारा ड्राइविंग सीट पर बैठा और अगले ही पल उसने

गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी थी।

चित्रांशी अपने हाथों की तरफ देखे जा रही थी और रोने लगी थी।

बंसल हाउस के बाहर एक गाड़ी आकर रुकी और उस गाड़ी में से संगम बाहर निकला, बाहर आते ही उसने बैक सीट का दरवाजा खोला और फिर चित्रांशी की तरफ देखा जो मुंह बनाते हुए अपनी जगह पर बैठी थी और अब वो संगम को घूर घूर कर देख रही थी! जिस तरह से संगम ने उसके हाथों को बांधा उसे उस पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था।

उसे बहुत ज्यादा डर लग रहा था कि कहीं संगम उसे किडनैप तो नहीं कर रहा? कहीं वो उसे किसी ऐसी जगह ना ले जाए जहां से वो कभी वापस ही ना आ पाए? लेकिन अपने सामने बंसल हाउस को देखकर उसने राहत की एक सांस ली और अब संगम हल्का सा उस पर झुका और बोला "क्या बात तुम्हें अपने घर पहुंचने की खुशी नहीं हो रही क्या?”

चित्रांशी नाक फूलाते हुए बोली "यू नो व्हाट मेरे प्रिंसिपल ने कहा था कि मुझे तुमसे सॉरी बोलनी है, उन्होंने मुझे तुम्हारे ऑफिस का एड्रेस भी दिया था ये बोलकर कि मुझे उस एड्रेस पर आपसे सॉरी बोलने जाना है!”

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही संगम बोला "पहले तुम ये डिसाइड कर लो कि तुम्हें मुझसे तुम कह कर बात करनी है या फिर आप?”

चित्रांशी एक बार फिर से मुंह बनाते हुए बोली "वैसे तो आप मुझसे उम्र में बड़े हैं तो मुझे आपको आप कह कर बुलाना चाहिए, लेकिन आप बहुत गंदे है इसलिए मैं आपको तुम कह कर बुलाऊंगी!”

संगम ने कुछ नहीं कहा, बस यूं ही चित्रांशी को देखता रहा और अब चित्रांशी एक बार फिर से बोली "लेकिन अब मैं अपने प्रिंसिपल को जाकर कहूंगी कि मैं बेशक से उस कॉलेज को छोड़ सकती हूं! उन्हें अगर मेरे पेरेंट्स को कॉलेज बुलाना है और मेरी शिकायत करनी है तो वो बेशक से कर सकते हैं लेकिन मैं तुमसे तो सॉरी बिल्कुल नहीं कहूंगी! तुम बहुत-बहुत ज्यादा गंदे हो…

ये बोलते हुए अब वो आगे की तरफ हुई और फिर खिसक खिसक कर सीट से नीचे उतरने लगी, उसके हाथ अभी भी बंधे हुए थे तो वो उन्हें इस्तेमाल नहीं कर पा रही थी और अब वो संगम के बिल्कुल सामने खड़ी थी।

उसकी नज़रें बंसल हाउस पर थी और वो वहां से जाने ही वाली थी कि अचानक से संगम ने उसके हाथों को पकड़कर उसे रोक लिया!

चित्रांशी चिल्लाने को हुई पर संगम ने एक हाथ उसकी कमर और दूसरा हाथ उसके मुंह पर रखते हुए उसे चिल्लाने से भी रोक लिया था, चित्रांशी को अब एक बार फिर से डर लगने लगा था।

कहीं ऐसा ना हो कि वो अपने घर तक पहुंचने के बाद भी अपने घर के अंदर ना जा पाए और अब संगम ने उसे वापस अपनी तरफ घुमाया और बोला “मेरी दो बातें तुम कान खोल कर सुनो! वैसे तो मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ता, कोई मेरे बारे में क्या सोच रहा है और क्या बोल रहा है I Just Don't Care लेकिन अगर तुमने अपने मुंह से मुझे तुम कह कर बुलाया तो… You Wild Kitten तुम बहुत पछताओगी! जब भी दोबारा मैं कभी तुम्हारे सामने आऊं तो तुम मुझे आप कह कर ही बुलाओगी और अगर गलती से भी तुम्हारे मुंह से तुम निकला ना तो तुम्हारी ये जो जुबान है!”

ये बोलते हुए उसने अपना अंगूठा चित्रांशी के होठों पर रखा और फिर कभी अपने अंगूठे को ऊपर तो कभी नीचे की तरफ ले जाने लगा!

जैसे-जैसे वो अपना अंगूठा ऊपर नीचे कर रहा था वैसे-वैसे चित्रांशी का चेहरा भी कभी ऊपर की तरफ उठता तो कभी नीचे हो जाता!

संगम बेहद डोमिनेटिंग वॉइस में बोला "अब अगर तुमने कहीं पर भी मेरी इंसल्ट करने की कोशिश की तो, तुम्हारी इस जुबान को मैं तुम्हारे हलक से खींच लूंगा!”

उसकी धमकी सुनकर चित्रांशी एकदम से डर गई और दूसरे ही पल उसने अब उसके हाथों में बंधी हुई अपनी टाई को खोला और बोला "मैं अपनी चीजें यूं ही किसी को नहीं देता! संगम मित्तल और उससे जुड़ी हर एक चीज बहुत स्पेशल लोगों के लिए होती है!” ये बोलकर उसने वो टाई अब बैक सीट पर फेंक दी!

कुछ पल वो यूं ही चित्रांशी को देखता रहा, उसने उसके चेहरे पर से अपना हाथ हटा लिया था और चित्रांशी भी मुंह बनाते हुए उसकी तरफ देख रही थी।

संगम अब गाड़ी की ड्राइविंग सीट की तरफ बढ़ने लगा लेकिन चित्रांशी एकदम से घूम कर वापस उसके सामने आकर खड़ी हुई और बोली "आप मिस्टर संगम मित्तल शायद खुद को कुछ ज्यादा ही समझते हैं, लेकिन आपको पता है आप बेशक से होंगे इस दुनिया के भगवान या Whatever लेकिन मेरे लिए आप कुछ भी नहीं है तो आपको तो मैं इज्जत देने से रही! ये तो मेरी मॉम ने मुझे सिखाया है कि किसी से भी बदतमीजी से बात नहीं करते इसलिए मैं आपको आप कह कर बुलाऊंगी, वरना मैं डरती नहीं हूं आपसे!”

ये बोलते हुए उसकी आवाज लड़खड़ा रही थी और साफ पता चल रहा था कि वो अपनी मॉम की सिखाई हुई बातों को मान रही है या फिर उसे संगम से डर लग रहा है!

संगम अपनी तिरछी निगाहों से उसे देखता रहा और चित्रांशी अब अपने घर के अंदर की तरफ चली गई थी, वो चल भी ऐसे रही थी जैसे ना जाने कितने गुस्से में हो! उसकी मटकती हुई कमर संगम को बहुत अच्छी तरह से नजर आ रही थी और वो अब मुंह बनाते हुए बोला "जाहिल कहीं की!”

ये बोलकर वो तुरंत ड्राइविंग सीट पर बैठा और अगले ही पल उसकी गाड़ी वहां से निकल गई थी, चित्रांशी भी अंदर की तरफ आई!

अंदर आते ही उसकी नजर लक्षिता पर गई जो अपनी मॉम की बातें सुन रही थी, उसकी मॉम उसे बता रही थी कि अब उसकी शादी कोई दो-चार महीने बाद नहीं बल्कि 2 दिन बाद ही होने वाली है और लक्षिता का तो मन कर रहा था कि वो जल्दी से अपने रूम में जाए और वहां पर जाकर जोरों से नाचे गए! आज तक किसी बात को सुनकर उसे इतनी खुशी नहीं हुई थी जितनी आज अपनी शादी की तारीख सुनकर हो रही थी और वो भी सिर्फ दो दिन बाद…

अब चित्रांशी वहां पर आई और मुंह बनाते हुए बोली "मॉम इस दुनिया में गंदे गंदे लोग क्यों होते हैं?”

यशोदा जी हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए बोली "अब किस्से पंगा हो गया तुम्हारा?”

चित्रांशी मायूस सी होकर बोली "आपको भी ऐसा लगता है क्या कि मैं लोगों से पंगे लेती हूं? आपको भी यही लगता है क्या कि हर बार सिर्फ मेरी ही गलती होती है? सामने वाले की तो कोई गलती होती ही नहीं!”

उसकी बात पर यशोदा जी हंसकर बोली "अरे तुम तो नाराज हो गई, मैं तो बस यूं ही बोल रही थी! अच्छा ये सब छोड़ो मैं तुम्हें एक गुड न्यूज़ देती हूं…

चित्रांशी ने जल्दी से पूछा “क्या दीदी की शादी टूट गई?”

उसकी बात पर लक्षिता ने गुस्से से मुंह बनाया और अगले ही पल उसके कंधे पर अपना हाथ रखकर उसे हल्का सा धक्का देते हुए बोली "तुम्हें मेरी शादी से प्रॉब्लम हो रही है क्या जो तुम मेरी शादी तुड़वाना चाहती हो?”

चित्रांशी नाक सिकोड़कर बोली "मुझे आपकी शादी से प्रॉब्लम नहीं है, मुझे उस आंटी से प्रॉब्लम है! वो आंटी जिसने सबसे पहले आपका तिलक किया था, मुझे वो आंटी बिल्कुल नहीं पसंद इसलिए मैं नहीं चाहती कि आप उनके घर में शादी करके जाओ!”

लक्षिता खुश होते हुए बोली "लेकिन मैं तो उन्हीं के घर शादी करके जाऊंगी और वो भी सिर्फ दो दिन बाद, तुम्हें पता है मेरी शादी फिक्स हो गई और वो भी सिर्फ दो दिन बाद! मुझसे तो अब इंतजार नहीं हो रहा, कब मैं शादी के मंडप में विहान के साथ बैठूंगी और सात फेरे लूंगी! वैसे मैंने कुछ और ही सोचा था लेकिन अब इन सब चीजों के लिए भी मैं बहुत ज्यादा एक्साइटेड हूं, मैं अभी जाकर विहान को कॉल करती हूं!”

ये बोलकर वो तुरंत ऊपर की तरफ भाग गई, यशोदा जी उसे देखकर हंसते हुए बोली "हे भगवान!”

ये बोलते हुए उन्होंने चित्रांशी की तरफ देखा जिसका चेहरा अब और भी ज्यादा मायूस हो गया था, अगले ही पल उन्होंने चित्रांशी का हाथ अपने हाथ में थाम लिया और बोली "मुझे नहीं पता तुम्हें स्नेहा जी क्यों नहीं पसंद? लेकिन वो बहुत अच्छी औरत है चित्रांशी बेटा! जितना हमने उन्हें जाना है समझा है वो सच में बहुत ज्यादा प्यारी है, आभा जी विहान की मां है लेकिन विहान अपनी चाची को भी बहुत रेस्पेक्ट और प्यार देता है और स्नेहा जी भी विहान को बिल्कुल अपने बच्चों की तरह ट्रीट करती हैं, ऐसे में खबरदार अगर तुमने उनसे कभी भी कोई बदतमीजी की तो! उन्होंने उस दिन तो तुमसे कुछ नहीं कहा और तुम्हारे डैड ने भी तुम्हें कुछ नहीं कहा, बिल्कुल नहीं डांटा लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा और मैं तो कहती हूं कि जब भी अब हम लोगों की उनसे दोबारा मुलाकात होगी ना तो तुम उनसे तुरंत माफी मांग लेना!”

चित्रांशी जो पहले ही इरिटेट थी वो अब पूरी तरह से फ्रस्ट्रेटेड होते हुए बोली "हां हां मैं तो बस माफी मांगने के लिए ही पैदा हुई हूं, कभी तो उस एटीट्यूड के खंभे से माफी मांगू तो कभी उस गंदी सी आंटी से! लेकिन मैं किसी से माफी नहीं मांगूंगी बिल्कुल भी नहीं, अगर आपको मुझे शादी में शामिल करना हो तो ठीक है वरना मैं तो शादी में भी नहीं आऊंगी! वैसे भी मुझे दीदी की शादी होते हुए नहीं देखनी और वो भी उस फैमिली में…

ये बोलकर वो रोते हुए ही सीढ़ियां चढ़कर ऊपर अपने कमरे में चली गई और फिर बेड पर आकर तरह-तरह के मुंह बनाने लगी! उसकी आंखों में आंसू भी थे और इस वक्त और भी बहुत कुछ उसके चेहरे पर नजर आ रहा था, एक इनसिक्योरिटी गुस्सा फ्रस्ट्रेशन सब कुछ!

तकरीबन पूरा दिन यूं ही बीत गया!

और अब शाम का वक्त,

मित्तल मेंशन में

सब लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे थे लेकिन स्नेहा अभी फिलहाल हॉल में ही थी और इधर-उधर टहल रही थी, उसकी नज़रें बार-बार दरवाजे की तरफ जा रही थी।

डाइनिंग टेबल पर बैठी शारदा जी उसकी तरफ देखते हुए बोली "अरे आ जाएगा वो, उसने कॉल पर कहा था ना कि वो बस 5-10 मिनट में आ रहा है! कम से कम तब तक तुम तो डिनर कर लो, तुम यहां उसका इंतजार कर रही हो! वो बेशक से बाहर से कुछ खा कर आ जाए…

उनकी बात पूरी होती उससे पहले ही संगम दरवाजे पर आकर खड़ा हुआ और फिर स्नेहा की तरफ देखते हुए बोला "बिल्कुल भी नहीं! जब मुझे पता है मेरी स्नेहा मां डिनर पर मेरा इंतजार कर रही है तो बाहर से कुछ खाने का मतलब ही नहीं बनता दादी!”

ये बोलते हुए वो अंदर की तरफ आया, स्नेहा के होठों पर मुस्कुराहट थी! वो जल्दी से उसके पास आई और उसके हाथों से उसका कोट लेते हुए बोली "तुम जल्दी से जाकर अपने हाथ धो लो, मैं तुम्हारी प्लेट लगाती हूं!”

संगम ने अपना चेहरा हां में हिलाया तो स्नेहा ने वो जैकेट साइड में रखा और फिर डाइनिंग टेबल पर आ गई!

अंगद चुपचाप ये सब देख रहा था, आजकल स्नेहा उसके साथ कहां खाती थी? बस उसे तो संगम की टेंशन रहती थी! जब संगम रात को घर आएगा वो तभी डिनर करेगी, फिर बेशक से संगम रात के 8 बजे आए या फिर 2 बजे कोई फर्क नहीं पड़ता था!

संगम अब अपनी चेयर पर आकर बैठा और स्नेहा भी तुरंत उसके साथ वाली चेयर पर बैठ गई, संगम के चक्कर में उसे अंगद से बहुत दूर बैठना पड़ता था क्योंकि वहां पर दो हेड चेयर थी और एक पर अंगद बैठता था तो दूसरी पर संगम!

हालांकि और भी बहुत सारे लोग थे मित्तल मेंशन में जो वहां हेड चेयर पर बैठना डिजर्व करते थे लेकिन जिस तरह से संगम ने सब कुछ संभाला हुआ था सब चाहते थे कि उस हेड चेयर पर वो ही बैठे!

विहान संगम की तरफ देखते हुए बोला "मैं सोच रहा था आज आपकी लक्षिता से एक मीटिंग करवाता, लेकिन आपको पता है भाई अब मेरी शादी सिर्फ दो दिन बाद होने वाली है! अब अलग से मीटिंग की तो जरूरत ही नहीं पड़ेगी, कल से शादी के फंक्शन शुरू हो जाएंगे तो आप वहीं पर लक्षिता से मिल सकते हैं और आपको पता है लक्षिता की एक छोटी बहन भी है चित्रांशी! मैं उससे भी आपको मिलवाऊंगा बहुत प्यारी है वो…

जैसे ही उसने कहा संगम जिसने निवाला अपने मुंह के अंदर डाल लिया था, अचानक से उसे धसका लग गया! चित्रांशी और प्यारी? No, Not Possible!!

और फिर अचानक ही उसकी नज़रें स्नेहा पर गई जो ये बात सुनते हुए ऐसे खुश हो रही थी

जैसे विहान उसे चित्रांशी से सिर्फ मिलवा नहीं रहा उन दोनों की शादी की बात फाइनल हो रही हो!

मित्तल मेंशन,

संगम अपने रूम में था और अपने लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था! इस वक्त वो सोफे पर बैठा था, अचानक ही उसके कानों में अभी थोड़ी देर पहले जो डाइनिंग टेबल पर हुई वो बातें गूंजने लगी और अगले ही पल उसने मुंह बनाया और बोला "मैं और उस लड़की से शादी करूंगा सीरियसली? अगर मॉम के दिमाग में ऐसा कोई ख्याल भी है तो मुझे मॉम को पहले ही बोल देना चाहिए कि ऐसा ख्याल वो अपने दिल में भूल कर भी ना लाए! वैसे तो मुझे शादी ही नहीं करनी लेकिन अगर सामने लड़की वो हो तो फिर तो इस जन्म में क्या मैं अगले आने वाले सात जन्मों में भी शादी नहीं करूंगा!”

ये बोलकर उसने एक गहरी सांस ली और फिर लैपटॉप पर अपनी उंगलियां तेजी से चलाने लगा! तभी रूम का दरवाजा खुला और स्नेहा अंदर की तरफ आई!

उसने पहले बेड की तरफ देखा और अगले ही पल उसके चेहरे पर थोड़ा गुस्सा झलकने लगा और अब वो मुंह बनाते हुए सोफे की तरफ देख रही थी, उसे पता था संगम सोया नहीं होगा! अभी भी अपने काम में लगा हुआ होगा…

जैसे ही संगम ने उसे देखा वो जल्दी से लैपटॉप बंद करते हुए बोला "मैं बस सोने ही जा रहा था स्नेहा मां!”

स्नेहा हल्के गुस्से से बोली "रहने दो तुम संगम! मैं बहुत अच्छी तरह से जानती हूं, अगर मैं यहां पर नहीं आती ना तो तुम एक-दो घंटा यूं ही अपने काम में लगे रहते! सोने में एक बजा देते और फिर सुबह 5 बजे उठ भी जाते, मुझे तो समझ में नहीं आता तुम अपनी नींद पूरी क्यों नहीं करते हो बेटा? तुम्हारी तबीयत खराब हो जाएगी, तुम्हारी आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स आ जाएंगे और फिर कौन लड़की तुमसे शादी करेगी?”

उसकी बात पर संगम हंसा और बोला "ओह रियली? आपको लगता है कोई लड़की मुझे रिजेक्ट कर सकती है? पहली बात तो मुझे शादी ही नहीं करनी और दूसरी बात अगर चाहूं तो दुनिया की किसी भी खूबसूरत लड़की से एक पल में शादी कर सकता हूं मैं और सामने वाले की औकात नहीं होगी संगम मित्तल को रिजेक्ट करने की, पर ये संगम मित्तल यूं ही किसी के लिए अवेलेबल नहीं होने वाला!”

स्नेहा अब उसके थोड़ा करीब आई और बोली "वो मैं कुछ सोच रही थी संगम, अगर तुम इजाजत दो तो…

उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही संगम बोला "आप जो सोच रही हैं वो मुझे ऑलरेडी पता है स्नेहा मां, आप मां है मेरी! कहते हैं ना एक बच्चे के बारे में उसकी मां को सबसे ज्यादा पता होता है और ये बात परफेक्ट है, मेरे बारे में सबसे ज्यादा आप ही जानती हैं लेकिन आपके बारे में भी सबसे ज्यादा मैं ही जानता हूं! आप कब क्या सोचती हैं मुझे बहुत अच्छी तरह से पता होता है इसलिए प्लीज जो आप सोच रही हैं वो मत सोचिए क्योंकि ऐसा पॉसिबल नहीं, वो लड़की मुझे एक नजर देखना भी बर्दाश्त नहीं उससे शादी तो दूर की बात!”

ये बोलकर उसने अपना लैपटॉप साइड में रखा और फिर अपनी जगह से उठकर बिस्तर की तरफ बढ़ने लगा, लेकिन फिर अचानक से स्नेहा के सामने रुका और फिर अगले ही पल उसने स्नेहा के सिर के पीछे अपना हाथ रखते हुए बड़े ही प्यार से उसका माथा चूम लिया और बोला "आई लव यू स्नेहा मां!”

स्नेहा पहले तो मुस्कुराई और फिर मुंह बनाते हुए बोली "कब तक मुझे ही आई लव यू बोलते रहोगे संगम? अब तो विहान भी शादी कर रहा है, प्लीज तुम भी शादी कर लो ना!”

संगम ने उसकी बात सुनी लेकिन कोई जवाब नहीं दिया, वो बिस्तर पर जाकर लेटा और फिर ब्लैंकेट खुद पर डालते हुए अपनी आंखें बंद कर बोला "जाते-जाते दरवाजा बंद कर दीजिएगा स्नेहा मां, मुझे नींद आई है!” 

उसकी ये बात सुनकर अब स्नेहा कहां आगे कुछ कह सकती थी? वो कुछ पल यूं ही अपनी जगह पर खड़ी रही और फिर संगम के पास आई, उसने उसके ऊपर झुक कर बड़े ही प्यार से उसके बालों को सहलाया और फिर उसके सर को चूमकर पीछे की तरफ हो गई!

वो बोलना तो बहुत कुछ चाहती थी लेकिन उसे पता था संगम सोने का सिर्फ बहाना कर रहा है ताकि उसे स्नेहा की बातें ना सुननी पड़े, पर वो भी यूं ही चुपचाप तो वहां से जाने वाली नहीं थी!

वो संगम की तरफ देखते हुए बोली "एक ही बेटा है मेरा और सब की तरह मेरा भी ख्वाब है कि मेरे बेटे की बीवी आए मेरी बहू आए, मैं कभी उसकी प्यारी वाली सासू मां बनूं तो कभी एकदम गुस्से वाली सासू मां! मैं अपने हर ख्वाब पूरे करूं, जब तुम्हारे बच्चे….

उससे पहले ही संगम ने तुरंत वहां का साइड लैंप ऑफ कर दिया जिसकी वजह से अब रूम में बिल्कुल अंधेरा हो गया था!

स्नेहा अब एक बार फिर से खामोश हो गई, उसने मुंह बनाया और तुरंत रूम से निकल गई!

उसके जाने के बाद संगम ने राहत की एक गहरी सांस ली, शादी तक तो ठीक था लेकिन जब स्नेहा ने बच्चों की बात की तो वो खुद हैरान रह गया था कि स्नेहा इतना लंबा सोच भी कैसे सकती है?

अब फिलहाल वो आराम से अपनी आंखें बंद कर चुका था और फिर कुछ ही देर में उसे नींद भी आ गई थी।

सुबह का वक्त

मित्तल मेंशन,

सुबह से ही मित्तल मेंशन में एकदम चहल पहल मची हुई थी क्योंकि आज विहान और लक्षिता की इंगेजमेंट होने वाली थी! दिन में इंगेजमेंट और फिर रात को मेहंदी और संगीत का फंक्शन होने वाला था! हालांकि किसी के पास इतना टाइम नहीं था कि वो अपनी डांस परफॉर्मेंस वगैरा रेडी कर सके इसलिए बस नॉर्मल संगीत ही होने वाला था।

स्नेहा और आभा इस वक्त हॉल में खड़ी थी और सामने की तरफ देख रही थी जहां पर बहुत सारे गिफ्ट बॉक्स वगैरा रखे हुए थे, आगे की तरफ कुछ ज्वेलरी बॉक्स थे और साथ में मिठाई के बॉक्स वगैरा भी! कपड़ों का बहुत बड़ा बैग साइड में रखा हुआ था, ये सारा सामान आज वो लोग अपने साथ बंसल हाउस में लेकर जाने वाले थे क्योंकि वहीं पर विहान और लक्षिता की इंगेजमेंट होने वाली थी।

आभा परेशान होते हुए बोली "हमने सारा सामान रख तो लिया है ना स्नेहा? कुछ छूट तो नहीं गया?”

स्नेहा ने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा और बोली "क्यों परेशान हो रही हो आप भाभी? मैंने कहा ना मैंने सब कुछ रख लिया है, आप फिक्र मत कीजिए! आप मुझे ये बताइए कि विहान कब तक रेडी हो जाएगा? मैं संगम को कहती हूं, संगम और विहान एक गाड़ी में आएंगे और हम सब अलग गाड़ियों में!”

तभी सान्वी वहां पर आई और जल्दी से बोली "मैं भी भाई के साथ जाऊंगी!”

ये बोलते हुए वो अंगड़ाई ले रही थी और साथ में उबासी भी, वो अभी-अभी उठकर आई थी।

स्नेहा और आभा उसे ऐसे देख रही थी जैसे उन्होंने कोई अजूबा देख लिया हो, स्नेहा जल्दी से बोली “ये क्या है सान्वी? तुम अभी तक रेडी नहीं हुई! तुम्हारा दिमाग खराब है क्या? टाइम देखो क्लॉक में 11 बज गए और 12 बजे तो हमें वहां पहुंचना है और अभी तक मुझे नहीं लगता तुमने मुंह भी धोया है! इतनी इररिस्पांसिबल कैसे हो सकती हो तुम?” ये बोलते बोलते वो एकदम से चुप हो गई जब उसने पीछे से संगम को वहां पर आते हुए देखा!

सान्वी भी चौंकते हुए उसकी तरफ देख रही थी और फिर उसकी नजरों को पीछे की तरफ देख उसने तुरंत अपना चेहरा घुमाया और वहां संगम को देख वो वापस स्नेहा की तरफ घूमी और बोली "क्या हुआ? अब आप चुप क्यों हो गई मॉम? अभी भी बोलिए ना आप, सुनाइए सुनाइए मुझे सुनाइए डांटिए मुझे! मैं तो बस आप लोगों की डांट खाने के लिए ही पैदा हुई हूं, जाइए मुझे नहीं जाना कहीं पर!”

ये बोलकर वो मुंह बनाते हुए अपने रूम में जाने लगी लेकिन तभी संगम ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोका और फिर स्नेहा की तरफ देखने लगा!

स्नेहा जल्दी से बोली "मैंने ऐसा भी कुछ नहीं कहा इसे जो ये इतना ज्यादा मुंह बना रही है संगम, तुम जानते नहीं हो इसे! ये आजकल बहुत ज्यादा चालाक होने लगी है…

संगम ने सान्वी को पूरी तरह से अपने सीने से लगाया और बोला “प्लीज मॉम अब चुप हो जाइए ना, इतना क्यों डांट रही है आप उसे? अगर वो रेडी नहीं हुई है तो कोई बात नहीं!”

स्नेहा चौंकते हुए बोली "कोई बात नहीं सीरियसली? हमें 12 बजे वहां पर पहुंचना है, 12:30 बजे इंगेजमेंट का मुहूर्त है और तुम कह रहे हो कि कोई बात नहीं?”

संगम ने सान्वी के सिर पर अपना हाथ रखते हुए कहा “तो कोई बात नहीं मुहूर्त एक घंटा लेट भी हो जाएगा, लेकिन मेरी प्रिंसेस को कोई नहीं डांट सकता!”

सान्वी अब थोड़ा मुस्कुरा कर बोली "बस एक आप ही प्यार करते हो मुझे भाई और तो मुझे कोई प्यार नहीं करता, मॉम तो बिलकुल भी नहीं!”

स्नेहा मुंह बनाते हुए बोली "तुमने ही इसे बिगाड़ रखा है संगम वरना मैं तो अब तक इसकी शादी करा चुकी होती! ये जाती अपने ससुराल और वहां जाकर इतनी देरी से उठती ना तो इसकी सास इसकी अकल ठिकाने ला देती!”

संगम जल्दी से बोला "इसलिए तो मैं मेरी प्रिंसेस की शादी कर नहीं रहा हूं क्योंकि मैं अपनी प्रिंसेस की शादी वहां पर करूंगा जहां वो लोग उसे क्वीन की तरह रखेंगे, मेरी प्रिंसेस को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी और अगर फिर भी किसी ने उसे प्रॉब्लम देने की कोशिश की तो मेरी प्रिंसेस मेरे पास वापस आ जाएगी और फिर उन लोगों को तो संगम मित्तल से भगवान भी नहीं बचा पाएगा!”

उसकी बातें सुनते हुए स्नेहा और आभा उसे हैरानी से देख रही थी!

आभा अब हंसते हुए बोली "तुम तो गई स्नेहा, तुम्हारे तो दोनों बच्चों की शादी होने से रही! इसी शादी में हम दोनों अपने सारे ख्वाब पूरे कर लेते हैं क्योंकि इन दोनों भाई बहनों का तो शादी का मुझे कोई प्रोग्राम लग नहीं रहा!”

स्नेहा मुंह बनाते हुए बोली "मुझे तो इन दोनों से कोई बात ही नहीं करनी, मैं जा रही हूं भाभी जल्दी से रेडी होने! तब तक आप ये सारा सामान गाड़ियों में रखवा दीजिएगा…

ये बोलकर वो तुरंत अपने रूम में चली गई, उसके पास रेडी होने के लिए सिर्फ 10 मिनट थे!

वही संगम ने सान्वी को बड़े ही प्यार से कहा “जाओ जाकर रेडी हो जाओ!”

सान्वी ने अपना चेहरा हां में हिलाया और फिर तुरंत अपने रूम में चली गई!

लगभग से आधे घंटे बाद सब लोग ऑलमोस्ट रेडी हो गए थे और सब लोग गाड़ियों में बैठ रहे थे, सान्वी भी जल्दी से भागते हुए बाहर की तरफ आई! भागते हुए ही वो अपने कान में इयररिंग्स पहन रही थी और अब उसने अपनी नजरों को इधर-उधर घुमाया!

वो ढूंढ रही थी कि उसे कौन सी गाड़ी में बैठना है? क्योंकि वो तो संगम के साथ ही जाने वाली थी, तभी संगम ने अपनी गाड़ी का होरन बजाया तो सान्वी तुरंत उसकी गाड़ी की तरफ भाग गई जहां आगे की तरफ विहान बैठा था और अब वो आराम से बैकसीट पर बैठी थी और फिर सारी गाड़ियां एक साथ मित्तल मेंशन से निकल गई थी और उनकी मंजिल थी बंसल हाउस जहां पर ऑलमोस्ट सब कुछ रेडी हो चुका था और लक्षिता भी आईने के सामने बैठी खुद को मुस्कुराते हुए देख रही थी।

आज वो बहुत खूबसूरत लग रही थी और तभी चित्रांशी वहां पर आई और मुंह बनाते हुए बोली "दीदी आप सच में आज इंगेजमेंट करोगी क्या?”

लक्षिता ने उसकी त

रफ देखा और फिर दूसरे ही पल उसकी आंखें बड़ी हो गई, चित्रांशी तो अभी तक अपने नाइट सूट में थी।

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