
लक्षिता हैरानी से चित्रांशी की तरफ देख रही थी जो अभी तक नाइट सूट में खड़ी थी, वो उसकी तरफ देखते हुए बोली "ये क्या है चित्रांशी? तुम अभी तक रेडी क्यों नहीं हुई? अभी बस 5 मिनट में वो लोग पहुंचने वाले हैं, मेरी अभी-अभी विहान से मैसेज पर बात हुई थी! उसने कहा कि वो लोग रास्ते में है और तुम? तुम अभी तक रेडी भी नहीं हुई?”
चित्रांशी आगे की तरफ आई और फिर लक्षिता का चेहरा अपने हाथों में थाम कर बड़ी ही मासूमियत से बोली "प्लीज दीदी ये शादी मत करो ना, मुझे आपसे दूर नहीं रहना! अगर आपकी शादी होगी तो आप तो ये घर छोड़ कर चली जाओगी, फिर मैं किसके साथ रहूंगी? कौन मुझे संभालेगा? आपको तो पता है ना मैं थोड़ी गुस्से वाली हूं थोड़ी जिद्दी हूं! हर बात पर बिगड़ जाती हूं, फिर मुझे मॉम की डांट से कौन बचाएगा? आप ही तो हो जो मुझे हर बात समझाती हो और अब आप ही चली जाओगी तो पता नहीं फिर मैं क्या-क्या गलतियां करूंगी? और बाद में पछताती रहूंगी!”
उसे नाइट सूट में देखकर पहले तो लक्षिता को उस पर गुस्सा आ रहा था लेकिन अब चित्रांशी की पूरी बात सुनने के बाद उसे उस पर सिर्फ प्यार आ रहा था।
उसने उसका हाथ अपने हाथ में अच्छे से कस कर पकड़ा और बोला "आई एम सो सॉरी चित्रांशी जो मैंने तुम पर गुस्सा किया, पर तुम फिक्र मत करो बेशक से मैं शादी करके इस घर से चली जाऊंगी! लेकिन तुम्हारी लाइफ से तो नहीं जाऊंगी ना? हम लोग फोन पर बात करेंगे, तुम्हें जो भी प्रॉब्लम हो वो तुम मुझे फोन पर बता दिया करना और तुम्हें पता है मेरे ससुराल वाले बहुत अच्छे हैं! अगर मैं तुमसे सारा सारा दिन फोन पर बात करूंगी ना तो भी उन लोगों को बिल्कुल बुरा नहीं लगेगा!”
चित्रांशी मुंह बनाते हुए बोली "रहने दो रहने दो दीदी! आपके ससुराल वाले कैसे हैं वो मुझे बहुत अच्छी तरह से पता है, बेशक से बाकी सब लोग अच्छे होंगे लेकिन वो गंदी आंटी? वो तो बिल्कुल भी अच्छी नहीं है! अगर उसने आपको परेशान करने की कोशिश की तो?”
लक्षिता जल्दी से बोली "अरे चित्रांशी क्या कर रही हो तुम? तुम बार-बार उन्हें गंदी आंटी मत बोलो यार, वो मेरी होने वाली चाची सास है! विहान भी बहुत प्यार करता है उनसे, वो मुझे हमेशा उनके बारे में बताता है कि उसकी स्नेहा चाची बहुत अच्छी है उससे बहुत प्यार करती है! उसे बिल्कुल अपने बच्चों की तरह रखती है और तुम हो कि उन्हें बार-बार गंदी आंटी बोल रही हो, प्लीज बार-बार उनके बारे में गलत मत कहो बेटा!”
ये बोलते हुए अब उसने चित्रांशी के गाल पर अपना हाथ रख दिया था, चित्रांशी मायूस होकर बोली "अब मैं कैसे बताऊं आपको दीदी कि उस दिन मैंने क्या देखा? उन्होंने जानबूझकर सीढ़ियों पर अपना पैर स्लिप करवाया और फिर नीचे गिर गई और इल्जाम किसी और पर लगा दिया, अगर आपके ससुराल जाने के बाद भी उन्होंने ऐसा ही कुछ किया! कहीं आप कुकिंग करो और वो सारा खाना जला दे और फिर इल्जाम आप पर… ओह गॉड ये सब तो मैंने सोचा ही नहीं!”
ये बोलते हुए उसने अपने माथे पर हाथ रख लिया था! लक्षिता जल्दी से बोली “अगर तुमने सोचा नहीं तो सोचने की जरूरत भी नहीं है, ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है! स्नेहा आंटी ऐसी बिल्कुल भी नहीं है, तुम प्लीज ये सब मत सोचो चित्रांशी तुम्हें मेरी कसम! अब तुम जाओ जल्दी से रेडी हो जाओ, किसी भी वक्त मॉम हमें बुलाने वाली होगी! मैंने कभी तुमसे कोई डिमांड नहीं की लेकिन आज मैं तुमसे रिक्वेस्ट करती हूं चित्रांशी प्लीज मेरी इंगेजमेंट अच्छे से हो लेने दो प्लीज प्लीज!”
ये बोलते हुए उसने लगभग से अपने हाथ जोड़ लिए थे, चित्रांशी तुरंत उसके हाथों को नीचे करते हुए बोली "आपको ये सब करने की जरूरत नहीं है दीदी! अगर आप कहती हो तो मैं रेडी हो जाती हूं लेकिन मुझे वो आंटी बिल्कुल नहीं पसंद, आप उनसे बचकर रहना हां! वो सच में अच्छी नहीं है…
ये बोलकर वो वहां से ड्रेसिंग एरिया की तरफ चली गई और लक्षिता ने अब राहत की गहरी सांस ली, वो खुद से ही बोली "अब मैं तुम्हें कैसे समझाऊं चित्रांशी कि जिसे तुम गलत समझ रही हो वो गलत हो ही नहीं सकती! अरे वो तो बहुत प्यारी है, मैंने बहुत से किस्से सुने हैं उनके बारे में! ऐसे इंसान को कोई गलत कैसे ही कह सकता है?” ये बोलते हुए उसके चेहरे पर अभी भी थोड़ी परेशानी झलक रही थी।
लगभग से 15 मिनट बाद यशोदा जी रूम में आई और उन्होंने लक्षिता की तरफ देखा जो पूरी तरह से रेडी थी और इंतजार ही कर रही थी कि कब कोई उसे बुलाने आए? आज वो बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।
उसे देखकर तो यशोदा जी बस उसकी तरफ देखती रह गई और अब ड्रेसिंग रूम से चित्रांशी बाहर निकली जो पूरी तरह से रेडी हो गई थी, बस उसके ब्लाउज की डोरियां नहीं बंध रही थी और अब वो हल्का सा मुंह बनाते हुए बाहर की तरफ आ रही थी।
‘दीदी ये डोरियां बांध दो ना!” लेकिन बोलते बोलते वो अचानक से बीच में ही रुक गई!
यशोदा जी अब उसकी तरफ देख रही थी, उन्हें तो ये समझ में नहीं आ रहा था कि उनकी दोनों बेटियां इतनी बड़ी कब हो गई? आज वो दोनों ही बहुत प्यारी लग रही थी!
चित्रांशी अब लक्षिता के बिल्कुल पास आकर खड़ी हुई और यशोदा जी ने उन दोनों की नजर उतारी और फिर अपनी आंख से काजल का टीका लेकर उन दोनों के कान के पीछे लगाते हुए बोली "तुम दोनों को किसी की नजर ना लगे!”
चित्रांशी झट से बोली "ऐसे कैसे कोई हम दोनों को नजर लगाएगा? जिसने हम दोनों को नजर लगाने की कोशिश की ना उसके मुंह पर जोर से अपना सैंडल मारूंगी मॉम, देखना उसकी आंखें ही फोड़ दूंगी!”
उसकी बात सुनकर यशोदा जी हंसी और बोली "मैं तुम दोनों को नीचे ले जाने के लिए आई थी, चलो इंगेजमेंट की रस्म का टाइम हो गया है! सब लोग तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं…
ये बोलते हुए अब उन्होंने लक्षिता की तरफ देखा तो लक्षिता ने शर्माते हुए अपनी नज़रें झुका ली!
तकरीबन दो-तीन मिनट बाद ही,
गार्डन एरिया में
सब लोगों की नजरे मेंशन के अंदर वाले दरवाजे पर टिकी हुई थी जहां से लक्षिता बाहर आने वाली थी और फाइनली वो कुछ लड़कियों के साथ बाहर आई! चित्रांशी भी उसके साथ ही थी और अब धीरे-धीरे वो स्टेज पर पहुंच गई थी जहां पर विहान उसका इंतजार कर रहा था, सभी लड़कियां नीचे ही खड़ी रह गई थी।
सब लोग लक्षिता और विहान को देखकर मुस्कुरा रहे थे और उनके लिए हूटिंग कर रहे थे।
चित्रांशी भी बड़े प्यार से लक्षिता और विहान को देख रही थी, अभी तक तो उसे इस शादी से प्रॉब्लम थी लेकिन अब विहान और लक्षिता दोनों ही एक दूसरे के साथ इतने अच्छे लग रहे थे कि उसे भी यही लग रहा था कि वो दोनों एक दूसरे के लिए परफेक्ट है!
तभी सान्वी उसके पास आई और बोली "तुम दुल्हन की बहन हो ना?”
चित्रांशी ने इतराते हुए कहा “हां लक्षिता दीदी मेरी सगी बहन है!”
सान्वी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और बोली "और मैं दूल्हे की बहन, मेरा नाम सान्वी है सान्वी मित्तल!”
जैसे ही उसने कहा चित्रांशी का एकदम से मुंह बन गया, अगले ही पल वो थोड़े एटीट्यूड से बोली "मुझे थोड़ा काम है! वो क्या है ना दुल्हन की बहन हूं, बहुत से काम है मुझे तो इतना टाइम नहीं है कि ऐसे बातें कर सकूं, मैं तुमसे बाद में मिलती हूं!”
ये बोलकर वो वहां से चली गई और सान्वी बस उसकी तरफ देखती रह गई, उसे तो समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या? ऐसे भी चित्रांशी को कौन से काम थे कि वो उसे इस तरह से इग्नोर करके चली गई?
अब उसका चेहरा हल्का मायूस हो गया था लेकिन तभी उसकी नजर स्टेज पर गई जहां पर लक्षिता और विहान के ऊपर फूलों की बारिश हो रही थी और वो दोनों एक दूसरे को रिंग पहना रहे थे।
सान्वी अब उन दोनों के लिए तालियां बजाने लगी थी, उसकी आंखों में लगभग से आंसू आ गए थे! ये मित्तल मेंशन की इस जनरेशन की पहली शादी होने वाली थी और अब वो बस यही सोच रही थी कि जल्दी से वो अपने संगम भाई की शादी भी ऐसे होते हुए देखें!
तभी संगम उसके पास आया, उसकी नजर सीधा सान्वी की आंखों पर गई जहां पर आंसू थे! उसने तुरंत उसके गाल पर अपना हाथ रखते हुए उसके उन आंसुओं को साफ किया और पूछा “रो क्यों रही हो?”
सान्वी हंसते हुए बोली "अरे ये तो खुशी के आंसू है भाई, मैं तो आपकी शादी के बारे में सोच रही थी! एक दिन आपकी भी ऐसे ही इंगेजमेंट होगी शादी होगी, तब मुझे और भी ज्यादा मजा आएगा! प्लीज़ जल्दी से शादी कीजिए ना…
संगम ने बड़े ही प्यार से कहा “जिस चीज को देखकर मेरी सान्वी की आंखों में आंसू आए वो चीज मैं करूंगा ही क्यों? पहले तो फिर भी शादी कर लेता लेकिन अब तो बिल्कुल भी नहीं करूंगा!”
उसकी बात पर सान्वी ने मुंह बनाया और मुंह बनाते हुए वो बहुत क्यूट लग रही थी तो संगम हंसने लगा!
सान्वी अब उसके सीने से लगते हुए बोली "ऐसी बात मत कीजिए भाई, मुझे सच में आपकी शादी होते हुए देखनी है! मुझे मेरी छोटी सी प्यारी सी भाभी चाहिए एकदम क्यूट क्यूट…
उसकी बातें सुनते हुए अचानक ही संगम की नजर सामने की तरफ गई जहां पर चित्रांशी खड़ी थी और चित्रांशी भी उन दोनों को ही देख रही थी, उसके तो चेहरे का रंग उड़ा हुआ था! उसे समझ नहीं आ रहा था कि संगम मित्तल वहां पर क्या कर रहा है?
संगम ने अब चित्रांशी की तरफ देखते हुए ही सामने से पूछा “अभी-अभी ये लड़की तुम्हारे साथ थी ना? इसने तुमसे कुछ कहा क्या?”
उसका सवाल सुनकर सान्वी ने चित्रांशी की तरफ देखा और फिर जल्दी से बोली "अरे नहीं नहीं इन्होंने तो मुझे कुछ नहीं कहा बल्कि इन्होंने तो मुझसे बात ही नहीं की, मैंने इन्हें बताया मैं दूल्हे की बहन हूं तो ये बोली कि मुझे बहुत काम है इसलिए मुझसे बात नहीं कर सकती! मुझे थोड़ा अजीब लगा लेकिन इट्स ओके, कुछ लोग इंट्रोवर्ट होते हैं ना भाई तो जाने दीजिए!”
ये बोलकर वो वापस संगम की तरफ घूम गई!
वहीं चित्रांशी के चेहरे पर डर और परेशानी और भी ज्यादा झलकने लगी थी, वो खुद से ही बोली "ये लड़की इस भड़कीले इंसान को मेरी शिकायत लगा रही है क्या? और ये इंसान आखिर यहां पर कर क्या रहा है? क्या ये मॉम डैड से मेरी शिकायत लगाने आया है? ओह गॉड अगर मॉम डैड इसकी बातों में आ गए तो? नहीं नहीं मुझे इससे पहले ही इस इंसान को यहां से भगाना होगा, मुझे कुछ करना होगा!”
ये बोलते हुए वो दूसरी तरफ चली गई ताकि आराम से अपना दिमाग लगा सके कि आखिर वो संगम मित्तल को वहां से भगाए कैसे? पर उसने एक बार भी अपना दिमाग इस चीज में नहीं लगाया था कि उस इंसान का नाम संगम मित्तल है और जिस इंसान से उसकी दीदी की शादी हो रही है वो विहान मित्तल, मित्तल मित्तल मतलब एक ही फैमिली! उसकी तो बस डर से हालत खराब हो रही थी…
तभी उसकी नजर पानी पुरी वाली स्टॉल पर गई, वो खुद से ही बोली “एक काम करती हूं थोड़ी सी पानी पुरी खा लेती हूं, क्या पता इसके बाद थोड़ा दिमाग चल जाए और मैं इस इंसान को यहां से भगाने का तरीका सोच पाऊं!”
ये बोलकर अब वो उस स्टॉल की तरफ आई और फिर उसने पानी पुरी वाले को खुद को पानी पुरी खिलाने के लिए कहा वो भी एकदम देसी स्टाइल में, उसकी प्लेट में एक एक करके रखकर….
जैसे ही स्टॉल वाले ने एक पानी पुरी भरकर उसकी प्लेट में रखी उसने तुरंत उठाई और सीधा अपने मुंह में डाली, लेकिन अभी तक वो पानी पुरी अंदर भी नहीं गई थी कि संगम उसके सामने आकर खड़ा हुआ और उसे अपने गहरी निगाहों से देखने लगा!
उसने अपनी उंगलियां उसके मुंह के बिल्कुल आगे रखी और जो पानी पुरी चित्रांशी को अपने मुंह के अंदर लेकर जानी थी, अब वो संगम ने एकदम से बाहर निकाल
ली और फिर साइड में रखे हुए डस्टबिन में फेंक दी!
चित्रांशी तो बस उसकी तरफ देखती रह गई!
चित्रांशी ने अभी पानी से भरी एक पानी पुरी अपने मुंह के अंदर डाली ही थी कि संगम उसके सामने आकर खड़ा हुआ और अगले ही पल उसने चित्रांशी के होठों में फंसी वो पानी पुरी अपनी उंगलियों में कसकर पकड़ी और फिर उसे निकालकर डस्टबिन में फेंक दिया!
चित्रांशी हैरानी से उसकी तरफ देखने लगी, संगम हल्का सा मुस्कुरा कर बोला "एक्चुअली मुझे अभी-अभी पता चला कि तुम दुल्हन की बहन हो और तुम्हें बहुत से काम है! तुम बहुत बिजी हो, तुम्हारे पास तो इतना भी वक्त नहीं कि तुम किसी से हेलो हाय कर सको तो तुम ये गोलगप्पे खाने में अपना टाइम वेस्ट कैसे कर सकती हो? आई मीन ये गोलगप्पे तुम्हारा टाइम वेस्ट कैसे कर सकते हैं? इसीलिए मैंने इसे तुमसे दूर कर दिया, तुम्हें किसी भी तरह की डिस्टरबेंस नहीं होनी चाहिए! देखो मैं कितना ख्याल रखता हूं ना तुम्हारा?”
उसकी बात सुनते हुए चित्रांशी गुस्से से मुंह बना रही थी, उसका नाक एकदम फुला हुआ था! उसे पानी पुरी बहुत ज्यादा पसंद थी लेकिन संगम ने उसकी फेवरेट पानी पुरी डस्टबिन में फेंक दी थी।
उसने अब डस्टबिन की तरफ देखा जहां पर सिर्फ वही पानी पुरी रखी थी और अब उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो पानी पुरी रोते हुए उसकी तरफ देख रही हो और चिल्ला चिल्ला कर बोल रही हो कि ये तुमने मेरे साथ क्या किया दीदी? मेरी इतनी बेइज्जती कर दी, मुझे इस तरह से नीचे गिरा दिया! क्या मेरी तुम्हारे सामने बस यही कीमत है?
पानी पुरी के सवाल उसके दिमाग में गूंज रहे थे, तभी संगम उसकी तरफ देखते हुए बोला "अब तुम यहां खड़ी-खड़ी अपना टाइम क्यों वेस्ट कर रही हो? जाओ जाकर अपने इंपॉर्टेंट काम खत्म करो!”
चित्रांशी ने अब गुस्से से उसकी तरफ देखा और बोली "वो लड़की जो खुद को दूल्हे की बहन बता रही थी, वो मुझसे बात करना चाहती थी पर मैंने उससे बात नहीं की और मैं उससे बात करूं भी क्यों? क्योंकि मैं उसे नहीं जानती! वो होगी दूल्हे की छोटी बहन लेकिन वो मेरी छोटी बहन तो नहीं है ना जो मैं उसे पैंपर करती फिरूं और अगर उसे आपको शिकायत लगानी है तो बस से लगाती रहे, ऐसे लोगों का काम ही शिकायत लगाना होता है इसलिए तो मुझे ऐसे लोग बिल्कुल पसंद नहीं आते! हुंह भाड़ में जाएं ऐसे लोग…
ये बोलकर वो तुरंत अपना लहंगा संभालते हुए वहां से चली गई और संगम की गुस्से से मुट्ठियां कस गई थी, उसकी आंखें भी एकदम लाल हो गई थी! वो तो सान्वी के बारे में कोई छोटी सी बात भी बर्दाश्त नहीं कर सकता था और यहां चित्रांशी उसके सामने इतना सब कुछ बोल गई थी।
गुस्से से उसने तुरंत चित्रांशी का पीछा करना चाहा लेकिन तभी अचानक से उसका फोन बजा! उसने अपने फोन की तरफ देखा जहां पर सान्वी का ही कॉल आ रहा था।
वहीं दूसरी तरफ
चित्रांशी अब अचानक से रुक गई और खुद से बात करते हुए बोली "अरे मुझे तो इस खडूस इंसान से कहना था कि ये मेरे मॉम डैड से मेरी शिकायत ना करें, वो तो मैं कहना ही भूल गई और इधर-उधर की बातें बोलकर आ गई! मुझे दोबारा उस खडूस इंसान के पास जाना होगा…
ये बोलकर वो तुरंत संगम की तरफ घूमी लेकिन तब तक संगम वहां से जा चुका था।
वहीं दूसरी तरफ
संगम सान्वी के पास आया जो स्टेज पर विहान और लक्षिता के साथ खड़ी थी, वो उसके पास आकर थोड़ा परेशान होते हुए बोला "क्या हुआ सान्वी? तुम ठीक तो हो ना? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना बेटा?”
सान्वी जल्दी से बोली "अरे भाई कोई प्रॉब्लम नहीं है, वो एक्चुअली मैंने आपको जल्दी-जल्दी यहां पर आने के लिए इसलिए कहा क्योंकि मुझे आपके साथ… आई मीन हम सब की एक प्रॉपर पिक्चर चाहिए, बाकी सब तो यहां मौजूद है! बस आप ही नहीं थे इसीलिए मैंने आपको यहां पर ऐसे बुलाया, आई एम सो सॉरी भाई! आप मेरी वजह से परेशान हो गए क्या?”
संगम ने अपना चेहरा ना में हिलाया और बोला "नहीं बिल्कुल भी नहीं, तुम्हारी वजह से मुझे कभी कोई परेशानी नहीं हो सकती!’ ये बोलकर उसने सान्वी के सिर पर अपना हाथ रखा और फिर प्यार से उसके बालों को सहलाया!
सान्वी अब उसे लेकर विहान और लक्षिता के करीब आई और फिर जल्दी ही उसने पूरी मित्तल फैमिली को वहां पर अच्छे से खड़ा किया और कैमरे वाले को उनकी एक पिक्चर लेने के लिए कहा!
वो खुद संगम के साथ खड़ी थी और संगम ने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा हुआ था! चित्रांशी जो स्टेज से नीचे खड़ी थी वो उन सब की तरफ देखे जा रही थी और अब वो खुद से सवाल करते हुए बोली "ये इंसान दी के होने वाले ससुराल के साथ इस तरह से पिक्चर क्यों क्लिक करवा रहा है? इसका भला इन सब लोगों से क्या ही रिश्ता होगा? कहीं ये भी तो इस फैमिली में इंवॉल्व नहीं? अगर ऐसा हुआ तो फिर तो दी की लंका ही लग जाएगी, इतना गंदा ससुराल और वो भी मेरी दी का? नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता! मुझे पता लगाना होगा, पहले वो गंदी आंटी और अब ये खड़ूस इंसान संगम मित्तल… 1 मिनट इस खडूस इंसान का पूरा नाम है संगम मित्तल और लक्षिता दी की जिससे शादी हो रही है वो है विहान मित्तल, कहीं वो दोनों भाई तो नहीं? कहीं ये भी उसी मित्तल फैमिली से तो नहीं? हे भगवान ये तो फिर बहुत गलत हो जाएगा, मेरी दी ऐसे परिवार में कैसे रहेगी जहां पर इतने गंदे गंदे लोग हैं? मुझे मेरी दी को बचाना ही होगा!” ये बोलते हुए वो ऐसे लग रही थी जैसे वो एक अकेला योद्धा जिस पर पूरे देश की जिम्मेदारी हो!
इंगेजमेंट की रस्म खत्म हो गई थी और अब सब लोग खाना खा रहे थे, मेहमान तो ऑलरेडी खाना खा भी चुके थे और धीरे-धीरे वहां से जाने भी लगे थे! अब ऑलमोस्ट वहां पर मित्तल फैमिली और बंसल फैमिली ही थी और सबके लिए एक स्पेशल टेबल लगाया गया था जिस पर अब सारी फैमिली एक साथ बैठकर लंच करने वाली थी।
एक सर्वेंट चित्रांशी को लंच के लिए बुलाने आई तो चित्रांशी चुपचाप उस सर्वेंट के साथ लंच टेबल की तरफ आ गई और वहां आते ही उसने देखा कि सान्वी लक्षिता के साथ बैठी है और लक्षिता की दूसरी तरफ विहान बैठा है!
उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसका तो सब कुछ उजड़ गया हो, लक्षिता हंस कर सान्वी से बातें कर रही थी और विहान के साथ अच्छे से अपना खाना एंजॉय कर रही थी!
तभी सान्वी की नजर चित्रांशी पर गई तो वो मुस्कुराते हुए बोली "अरे चित्रांशी तुम ऐसे क्यों खड़ी हो? तुम भी हमारे साथ आकर लंच करो ना, मुझे लक्षिता भाभी तुम्हारे बारे में ही बता रही है! यू आर सो क्यूट यार…
जैसे ही उसने कहा चित्रांशी का मुंह और भी ज्यादा बन चुका था, अगले ही पल वो नाक सिकोड़ कर बोली "मुझे नहीं करना कोई लंच, जिसे ज्यादा भूख लगी है वही खाए!”
ये बोलकर वो तुरंत अंदर की तरफ चली गई और सब लोग उसकी तरफ देखते रह गए, यशोदा जी के चेहरे के तो रंग उड़े हुए थे! पहले रोका सेरिमनी पर चित्रांशी ने स्नेहा के साथ बदतमीजी की और अब सान्वी की बातों का ऐसा जवाब, उन्हें तो डर लग रहा था कि कहीं चित्रांशी की हरकतों से लक्षिता की शादी ही ना टूट जाए!
वही संगम के चेहरे पर भी गुस्सा झलक रहा था, लक्षिता सान्वी की तरफ देखते हुए बोली "शायद चित्रांशी का कुछ खाने का मन नहीं होगा या फिर उसका मूड खराब होगा, प्लीज तुम उसकी बातों को दिल पर मत लेना!”
सान्वी जल्दी से बोली "इट्स ओके भाभी आपको इतनी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, मुझे उसकी बातों का बिल्कुल बुरा नहीं लगा!”
ये बोलते हुए उसने एक नजर संगम की तरफ देखा, बेशक से उसे बुरा नहीं लगा लेकिन संगम का गुस्सा बता रहा था कि वो चित्रांशी से नाराज जरूर है! पहले उसका सान्वी के लिए वो सब बातें कहना और अब सबके सामने यू उसकी इंसल्ट करके अंदर जाना, भला ये सब संगम कैसे ही बर्दाश्त कर सकता था?
वो सब की तरफ देखकर मुस्कुरा कर बोला "आप सब लोग अपना लंच इंजॉय कीजिए, एक्चुअली मुझे एक इंपॉर्टेंट कॉल करनी है तो मैं बाद में आप लोगों को ज्वाइन करता हूं!” ये बोलकर वो तुरंत साइड में चला गया लेकिन साइड से अब वो घूमते हुए बंसल हाउस के अंदर आया और अगले ही पल उसकी नज़रें चित्रांशी को ढूंढ रही थी।
वही सब लोग अपना लंच इंजॉय कर रहे थे, स्नेहा का कुछ भी खाने का मन नहीं कर रहा था क्योंकि वो बार-बार संगम की तरफ ही देख रही थी कि कब संगम आए और वो भी लंच शुरू करें ताकि वो भी आराम से खा सके लेकिन अंगद ने उसके गाल पर अपना हाथ रखकर कहा “अरे वो चार साल का नहीं है स्नेहा जिसके लिए तुम हर बार डाइनिंग टेबल पर इंतजार करोगी! वो अपना लंच खुद कर लेगा, तुम प्लीज अपना खाना खत्म करो उसके बाद तुम्हें दवाई भी लेनी है! वरना रात को मेहंदी का फंक्शन मैं तुम्हें अटेंड नहीं करने दूंगा…
उसकी बात सुनकर स्नेहा ने उसे घूर कर देखा और फिर चुपचाप अपना लंच करने लगी!
वही चित्रांशी अपने रूम में थी और बेड पर बैठी तरह-तरह के मुंह बना रही थी, उसे ऐसा लग रहा था जैसे एक ही पल में उससे उसका सब कुछ छीन लिया गया हो!
तभी उसके रूम का दरवाजा खुला, वो बिना दरवाजे की तरफ देखे ही बोली "मुझे कुछ नहीं खाना! आप लोग यहां से चले जाइए…
ये बोलते बोलते अचानक से उसकी हार्टबीट स्किप हो गई जब उसने दरवाजा बंद होने की आवाज सुनी और सामने संगम को देखा!
संगम जो अब धीरे-धीरे उसकी तरफ ही आ रहा था, उसे यूं अपने रूम में देखकर चित्रांशी की आंखें हैरत में फैल गई!
अब वो जोरों से चिल्लाई “आप यहां मेरे रूम में क्या कर रहे हो?” ये बोलते बोलते वो एकदम से चुप हो गई क्योंकि संगम उसके बिल्कुल करीब आकर उसके ऊपर झुक चुका था।
अब उसकी गहरी सांसों का शोर कमरे में गूंज रहा था और संगम ने अब उसकी कमर पर अपना हाथ रखा, चित्रांशी एकदम से सिहर उठी! उसे ऐसा लगा जैसे उसके पूरे बदन में करंट दौड़ गया हो और फिर दूसरे ही पल संगम ने उसे एकदम से घुमाया और फिर ऊपर उठाते हुए सीधा जमीन पर खड़ा किया और वो भी खुद के एकदम करीब…
जैसे ही उसने चित्रांशी की कलाई को हल्का सा मरोड़ा और उसकी पीठ से लगाया चित्रांशी की आह निकल गई!
संगम अब एक बार फिर से उसके ऊपर झुका हुआ था, वो उसकी तरफ देखते हुए बोला "तुम्हारी हिम्मत भी कैसे हुई मेरी बहन से इस तरह से बात करने की?”
उसकी बात पर चित्रांशी झट से बोली “लेकिन मैंने आपकी बहन से कब बात की? मैं तो आपकी बहन को जानती तक…
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही संगम ने एक बार फिर से उसकी कलाई को मरोड़ा, चित्रांशी को अब और भी ज्यादा दर्द हुआ!
संगम दांत पीसते हुए बोला "अभी-अभी तुम बाहर जिस लड़की से बदतमीजी करके आई हो वो मेरी बहन सान्वी मित्तल है और मुझे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं अगर कोई उससे जरा सी भी बदतमीजी करे तो!”
चित्रांशी मुंह बनाते हुए बोली "पहली बात तो मैंने उसके साथ कोई बदतमीजी की नहीं, उसने मुझसे लंच का पूछा और मैंने साफ-साफ बोल दिया कि मुझे लंच नहीं करना! जिसे करना है वो करें और दूसरी बात अगर आपको इतनी ही प्रॉब्लम है तो आप एक काम क्यों नहीं करते? आप अपनी बहन को घर पर बिठाकर क्यों नहीं रखते? ना वो कभी किसी के सामने जाएगी और ना ही कोई उससे बदतमीजी करेगा!”
संगम ऑलरेडी बहुत ज्यादा गुस्से में था और अब उसका गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ चुका था, उसने अब चित्रांशी की कलाई को और भी ज्यादा कसकर मरोड़ा तो चित्रांशी लगातार दर्द से चिल्लाने लगी!
संगम ने सारकास्टिक लहजे में पूछा “क्या हुआ? दर्द हो रहा है क्या?”
चित्रांशी ने रोते हुए अपना चेहरा हां में हिलाया और गिड़गिड़ाते हुए बोली "प्लीज मेरा हाथ छोड़ो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है!”
संगम दांत पीसते हुए बोला "एक काम क्यों नहीं करती तुम? अपनी कलाई को संभाल कर क्यों नहीं रखती? ना वो किसी के हाथ में जाएगी और ना ही तुम्हें इतना दर्द हो
गा!”
उसकी बातें सुनते हुए चित्रांशी की आंखों से आंसू और भी ज्यादा तेजी से बहने लगे थे।
पहली बात कुछ महान लोग इसलिए रेटिंग गिरा रहे हैं क्योंकि उन्हें चित्रांशी पसंद नहीं तो मुझे उन महान लोगों से पूछना है कि अगर आप लोग रेटिंग गिराओगे तो क्या मैं चित्रांशी का कैरेक्टर बदल दूंगी ? बिल्कुल भी नहीं, तो बेटा इसलिए एक काम करो, चुपचाप निकल जाओ यहां से क्योंकि तुम्हारे रेटिंग गिराने से ना तो मैं कुछ बदलने वाली हूं और ना ही मैं यह स्टोरी बंद करूंगी! तुम रोज मुंह उठा कर आओगे और रेटिंग गिरा कर चले जाओगे इससे तुम बस अपने ही कर्म खराब कर रहे हो, दूसरों की मेहनत पर पानी डालकर जिसके लिए मैं तो अब तुम्हें कुछ नहीं कहूंगी लेकिन कहीं ना कहीं तुम्हारा हिसाब तो बराबर होगा ही और दूसरी बात अगर कहानी में कुछ अच्छा बुरा होता है तो वह कहानी में होता है इसके लिए आपको राइटर पर भड़कने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कुछ बुरा नहीं होगा तो बाद में अच्छा भी नहीं होगा... जिसका एग्जांपल है अंगद मित्तल अगर वह पहले खडूस था तो बाद में अच्छा भी हुआ था, अब आप लोग क्या चाहते हैं कि पहले ही चैप्टर में सब अच्छा-अच्छा कर दूं? इसलिए अपने दिमाग के कीड़े थोड़े शांत रखिए और चुपचाप स्टोरी पढ़िए और जिन्हें नहीं पढ़नी वह लोग यहां से जा सकते हैं, उन्हें मैंने स्पेशली घर जाकर इनवाइट नहीं किया है अपनी कहानी पढ़ने के लिए, फालतू में बेकार के कमेंट और नेगेटिव रेटिंग करके दूसरों का मूड मत खराब कीजिए! खुद अच्छे नहीं है तो दूसरे का बुरा तो मत कीजिए!
और अब बढ़ते है कहानी की तरफ....
संगम ने चित्रांशी की कलाई को कसकर मरोड़ा हुआ था और चित्रांशी की आँखों से आँसू बह रहे थे, उसे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था!
संगम उसे अपनी डेविल नजरों से देख रहा था और चित्रांशी अब दर्द से तड़पते हुए बोली "प्लीज मेरा हाथ छोड़िए, मुझे सच में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है! मुझे लग रहा है मेरा हाथ टूट गया, प्लीज प्लीज प्लीज मेरा हाथ छोड़ दीजिए!”
ये बोलते हुए वो लगातार गिड़गिड़ा रही थी और संगम ने अब एकदम डेविल एक्सप्रेशंस के साथ कहा "मैं तब तक तुम्हारा हाथ नहीं छोड़ने वाला Wild Kitten जब तक तुम मुझसे ये प्रॉमिस नहीं कर देती कि तुम बाहर जाओगी और मेरी बहन से सॉरी बोलोगी!”
चित्रांशी रोते हुए ही बोली "लेकिन मैं उससे सॉरी क्यों कहूं? मेरी गलती ही क्या है?"
संगम तुरंत बोला "तुम्हारी गलती ये है कि तुमने मेरी बहन के साथ बदतमीजी की! इससे बड़ी गलती तुम क्या ही करोगी? जिस तरह से तुम्हें अपनी कलाई बहुत प्यारी है ना उसी तरह से मुझे मेरी बहन बहुत प्यारी है, बहुत ज्यादा और उसके साथ कोई भी बदतमीजी करे ये मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता! अब अगर तुम मुझसे प्रॉमिस करती हो कि तुम जाकर सान्वी से सॉरी कहोगी तो मैं तुम्हारा हाथ छोड़ दूंगा, वरना इट्स ओके यूँ ही दर्द बर्दाश्त करती रहो!”
ये बोलकर उसने एक बार फिर से अपने हाथ को हल्का सा दबाव दिया तो चित्रांशी की दर्द से अब जान निकलने लगी! उसकी कलाई के साथ-साथ वो खुद भी पूरी तरह से घूम चुकी थी और दर्द से उसका पूरा बदन ही तड़पने लगा था।
वो जल्दी से बोली "ठीक है ठीक है! मैं आपकी बहन से सॉरी बोलने के लिए तैयार हूँ पर प्लीज आप मेरा हाथ छोड़ दीजिए!”
जैसे ही उसने कहा संगम ने अब एक झटके से उसका हाथ छोड़ दिया! चित्रांशी अपनी कलाई की तरफ देख रही थी जहाँ पर संगम की उँगलियों के निशान साफ नजर आ रहे थे।
चित्रांशी ने अब अपनी आँसुओं से भरी आँखों से संगम की तरफ देखा और बोली "कोई इतना बेरहम भी होता है क्या? बेशक से मैंने आपके हिसाब से आपकी बहन के साथ बदतमीजी की, लेकिन क्या मेरी बदतमीजी से उसे इस कदर तकलीफ हुई थी जैसे आपने मुझे परेशान किया मुझे तकलीफ दी? सच में आप मित्तल फैमिली के लोग बहुत गंदे हो बहुत ज्यादा गंदे, काश मेरी बहन की शादी आपकी फैमिली में ना हो और रही बात आपकी बहन की तो मैंने नहीं कहा था उसे कि वो मेरे पास आए और मुझसे बात करे! वो खुद मेरे पास आई और अगर मेरा किसी से बात करने का मन नहीं है तो मैं नहीं करूँगी!”
अभी वो बोल ही रही थी कि संगम ने अब एक बार फिर से अपना हाथ उसकी कलाई की तरफ बढ़ाया तो अगले ही पल चित्रांशी उछलते हुए बोली "लेकिन… लेकिन मैं उसे सॉरी… सॉरी जरूर कह दूँगी और ये भी कहूँगी कि आइंदा से वो जब भी कभी मुझसे बात करना चाहेगी तो मैं उससे बात जरूर करूँगी, फिर बेशक से मेरा मन हो या ना हो!’
संगम के चेहरे पर एक्सप्रेशंस अब एकदम ठीक हो गए थे, वरना अब तक तो वो गुस्से से लाल हुए जा रहा था।
चित्रांशी अब रूम से बाहर जाने लगी, वो बाहर जाते हुए भी अपनी कलाई की तरफ ही देख रही थी जहाँ रेडनेस बढ़ती ही जा रही थी।
संगम उसे जाते देख बोला "और खबरदार अगर तुमने अब सान्वी से और कोई बदतमीजी की तो! तुम्हें बस उसे सॉरी कहना है और सॉरी कहकर वहाँ से निकल लेना है! अगर गलती से भी तुमने अपनी जुबान खोली और कुछ इधर-उधर का कहा तो आई प्रॉमिस, इस बार मैं सिर्फ तुम्हारी कलाई नहीं मरोड़ूँगा तुम्हारी गर्दन ही मरोड़ कर रख दूँगा! ना रहोगी तुम और ना रहेगी तुम्हारी बदतमीजी…
उसकी धमकी सुनकर चित्रांशी पलट कर उसकी तरफ देख रही थी और उसने अब गुस्से से मुँह बनाया!
जैसे ही संगम ने उसे तिरछी नजरों से देखा वो तुरंत अपने एक्सप्रेशंस सुधारते हुए वहाँ से भाग गई!
बाहर आकर वो गुस्से से मुँह बनाते हुए बोली "इन्हें क्या लगता है कि मैं कोई इनके हाथ की कठपुतली हूँ जो ये मुझे जैसे चलाएंगे मैं चलती रहूँगी? ये मुझे किसी को सॉरी बोलने के लिए कहेंगे और मैं चुपचाप बोल दूँगी? अरे मैं तो कभी अपनी बात भी नहीं मानती, उनकी बातें तो मैं क्या ही मानूँगी? मुझे सॉरी कहना है ना? सॉरी तो मैं जरूर कहूँगी, लेकिन वो सॉरी मुझे कैसे कहनी है ये मैं खुद देख लूँगी!"
ये बोलते हुए वो सान्वी को ढूँढ रही थी जो वही उसे सामने अपनी सेल्फी लेते हुए नजर आई! अब वो चुपचाप उसकी तरफ बढ़ गई…
जैसे ही वो सान्वी के सामने आकर खड़ी हुई सान्वी मुस्कुराई, उसे अच्छा लग रहा था कि चित्रांशी उससे बात करने आई है!
उसने अपना फोन तुरंत नीचे किया और चित्रांशी की तरफ देखते हुए बोली "हेलो!"
चित्रांशी मुँह बनाते हुए बोली "सॉरी!”
सान्वी ने अपनी आइब्रो ऊपर उठाते हुए कहा "सॉरी? लेकिन किस लिए?"
चित्रांशी गुस्से से बोली "वो तो मुझे भी नहीं पता क्योंकि जहाँ तक मैं जानती हूँ, मैंने कोई गलती नहीं की थी लेकिन फिर भी मुझे तुम्हें सॉरी कहने के लिए मजबूर किया गया है तो तुम्हें सॉरी कह रही हूँ! लेकिन मुझे एक बात बताओ जब तुम्हें इतनी ही प्रॉब्लम है लोगों से कि लोग तुम्हारे साथ बदतमीजी कर रहे हैं या फिर लोग तुम्हें इधर-उधर की बातें बोल रहे हैं तो तुम लोगों के पास आ ही क्यों रही हो? तुम्हें किसी के पास मुँह उठाकर जाना ही नहीं चाहिए ताकि सामने वाला तुम्हारे साथ बदतमीजी ना करे! पहले तो तुम खुद उनके पास जाती हो और फिर जब कोई तुम्हारे साथ बदतमीजी करता है, तो तुम मुँह उठाकर अपने भाई के पास चली जाती हो और फिर उसे लोगों के खिलाफ भड़काती हो और वैसे ही तुम्हारा भाई एक नंबर का खडूस इंसान है! आग की तरह जलता रहता है और ऊपर से तुम उस पर पेट्रोल छिड़कती रहती हो! वैसे दोनों भाई-बहनों का काम अच्छा है, लोगों को बेवजह टॉर्चर करना…
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही सान्वी की आँखों से आँसू बहने लगे थे लेकिन जल्दी ही उसने खुद को संभाला और बोली "देखिए आपको मेरे बारे में जो कहना है आप कह सकती हैं लेकिन प्लीज मेरे भाई के बारे में कुछ मत कहिए, मैं उनके बारे में कुछ नहीं सुन पाऊँगी!”
चित्रांशी और भी ज्यादा गुस्से से बोली "तुम अपने भाई के बारे में कुछ सुन नहीं सकती, तुम्हारा भाई तुम्हारे बारे में कुछ नहीं सुन सकता! तुम दोनों भाई-बहनों का बहुत अच्छा है कि एक-दूसरे से प्यार के नाम पर लोगों को टॉर्चर करो! अरे अगर इतना ही प्यार है तुम्हें अपने भाई से तो अपने भाई को अपने पास रखो ना! मेरे पीछे किसी खुले सांड की तरह क्यों छोड़ रखा है? चलो माना मैंने गलती की जो उनके साथ बदतमीजी की, लेकिन वो तो हाथ धोकर ही मेरे पीछे पड़ गए हैं! देखो अब मैं तुम्हें साफ शब्दों में समझा देती हूँ, अगर अब तुम्हारे भाई ने या तुमने मुझे जरा सा भी परेशान करने की कोशिश की ना तो मैं अपनी बहन को बोल दूँगी कि वो तुम्हारे भाई से शादी नहीं करेगी! फिर बैठी रहना अपने दोनों भाइयों को लेकर हाँ नहीं तो!"
ये बोलकर वो तुरंत वहाँ से दूसरी तरफ चली गई और सान्वी बस उसे जाते देखती रह गई, वो जल्दी से बोली "शायद तुम्हें कोई गलतफहमी होगी चित्रांशी जो तुम मेरे भाई को गलत समझ रही हो! मेरे संगम भाई तो बहुत अच्छे हैं, वो तो कभी किसी को बेवजह कुछ नहीं कहते तो वो तुम्हें टॉर्चर क्यों ही करेंगे? और भाई ने तुम्हें मुझसे सॉरी कहने के लिए कहा तो मुझे समझ में आता है कि उन्होंने क्यों कहा? लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्होंने तुम्हें टॉर्चर किया होगा या परेशान किया होगा! वो मुझसे प्यार करते हैं इसलिए मेरे साथ कुछ गलत होते हुए नहीं देख सकते लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो मेरे लिए किसी और के साथ यूँ ही गलत करेंगे! आई होप तुम मेरे भाई को गलत ना समझो और हमारे बीच कोई गलतफहमी ना हो, मैं नहीं चाहती कि विहान भाई की शादी में कोई भी प्रॉब्लम हो!”
ये बोलते हुए उसके चेहरे पर परेशानी झलक रही थी, तभी संगम उसके पास आया और उसे देखते हुए बोला "तुम ठीक हो ना? और वो लड़की क्या कह रही थी तुमसे?"
ये बोलते हुए संगम ने दूर खड़ी चित्रांशी की तरफ देखा, सान्वी उसे बिल्कुल नहीं बता सकती थी कि चित्रांशी अभी-अभी उसे कितना सुनाकर गई है!
वो जल्दी से बोली "कुछ नहीं भाई! वो बस यूँ ही मुझे अपनी पसंद-नापसंद के बारे में बता रही थी और मैंने भी उनसे बहुत बातें की, वो दिल की काफी अच्छी हैं! पहले तो थोड़ी खडूस लगी थी लेकिन अब जब उनसे इतनी बातें की तो समझ में आया कि वो कितनी प्यारी है!”
उसकी बातें सुनते हुए संगम उसे घूरने लगा था, सान्वी ने डर के मारे अब अपनी नज़रें झुका ली!
संगम गुस्से से बोला "मुझे नहीं पता था कि मेरी प्रिंसेस मुझसे झूठ भी बोलती है!"
सान्वी तुरंत बोली "प्लीज भाई आप उनसे कुछ मत कहिएगा, शायद आज उनका मूड थोड़ा खराब है इसलिए वो इस तरह से बिहेव कर रही हैं! वरना मैंने सच में सुना है कि वो काफी अच्छी हैं, प्लीज अब आप उनसे कुछ मत कहिएगा आपको मेरी कसम!”
उसकी बात पर संगम को गुस्सा तो आ रहा था, लेकिन फिलहाल उसने सान्वी से कुछ नहीं कहा क्योंकि सान्वी को वो कुछ कह भी नहीं सकता था! उस पर गुस्सा करना तो दूर की बात वो कभी किसी और को भी उसे डाँटना नहीं देता था!
अब उसने उसके सिर पर अपना हाथ रखा और बोला "सब लोग निकल रहे हैं यहाँ से, तुम भी जाओ जाकर गाड़ी में बैठो! मैं थोड़ी देर में आता हूँ…
उसकी बात पर सान्वी ने अपना चेहरा हां में हिलाया और फिर तुरंत गाड़ियों की तरफ बढ़ गई!
वही पूरा मित्तल परिवार ही अब बंसल फैमिली से अलविदा ले रहा था! संगम की नज़रें चित्रांशी पर टिकी हुई थी जो एक तरफ मुँह बनाकर खड़ी थी, जैसे सोच रही हो कि जैसे ही सब लोग वहाँ से जाएंगे वो तुरंत अपनी फैमिली को कहेगी कि वो अभी इसी वक्त ये शादी तोड़ दें और वो लोग उसकी बात सुनकर शादी तोड़ भी देंगे!
संगम का मन तो बहुत कर रहा था कि वो अभी जाकर उसे सबक सिखाए, लेकिन फिलहाल उसने कुछ नहीं कहा और चुपचाप पूरी फैमिली के साथ अपनी गाड़ी की तरफ आ गया! जहाँ अब विहान संगम और सान्वी तीनों एक गाड़ी में बैठे और वहाँ से निकल गए और उनके पीछे-पीछे बाकी की गाड़ियाँ भी!
अब सिर्फ बंसल फैमिली ही वहाँ पर रह गई थी और उनके जाने के बाद सब लोग अंदर आ गए, अभी सभी लोग हॉल में थे कि चित्रांशी अचानक से ऊँची आवाज में बोली "मुझे आप लोगों से कुछ कहना है!”
यशोदा जी ने सवालिया नजरों से उसकी तरफ देखते हुए कहा "क्या हुआ? तुम इतने गुस्से में क्यों हो?"
चित्रांशी मुँह बनाते हुए बोली "गुस्सा ना करूँ तो और क्या करूँ? ये देखो मेरे साथ क्या हुआ?” ये बोलकर वो तुरंत आगे बढ़ गई और उसने अपनी कलाई यशोदा जी के सामने कर दी!
यशोदा जी उसकी कलाई को गौर से देख रही थी क्योंकि वहाँ पर उन्हें देखने लायक कुछ भी नहीं मिल रहा था!
उसके हाथों में चूड़ियाँ थीं जो खूबसूरत लग रही थीं! वो मुस्कुराते हुए बोली "काफी खूबसूरत लग रही है तुम्हारी ये चूड़ियाँ!”
चित्रांशी गुस्से से दाँत पीसते हुए बोली "अरे मॉम मैं आपको चूड़ियाँ नहीं दिखा रही हूँ बल्कि अपनी कलाई दिखा रही हूँ! क्या आपको मेरी कलाई पर ये लाल निशान नजर नहीं आ रहे क्या?"
ये बोलते हुए वो खुद भी उन लाल निशानों को ढूँढ रही थी क्योंकि अब तक तो वो निशान उसकी कलाई से जा चुके थे।
यशोदा जी ने अपना चेहरा हाँ में हिला दिया!
चित्रांशी ने गुस्से भरी एक गहरी साँस ली और बोली "आपको पता है आज विहान जीजू के भाई संगम मित्तल ने मेरे साथ बहुत बदतमीजी की, उन्होंने मेरी कलाई को मरोड़ दिया था!”
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही सोमेश जी गुस्से से बोले "चुप बिल्कुल चुप! कब से देख रहा हूँ मैं तुम्हें, तुम्हारी बदतमीजी बढ़ती ही जा रही है! पहले तो तुमने स्नेहा जी से बदतमीजी की और फिर पूरी फैमिली के सामने उनकी बेटी सान्वी मित्तल की इंसल्ट की और अब तुम मिस्टर संगम मित्तल पर इल्जाम लगा रही हो! तुम जानती भी हो मिस्टर संगम मित्तल कौन है? क्या चीज़ हैं? लगता है ज्यादा फोन चला चला कर दिमाग खराब हो गया है तुम्हारा, अभी इसी वक्त अपना दिमाग सही कर लो! वरना हम बता रहे हैं कि अब तक तो हमने तुमसे कुछ नहीं कहा लेकिन कहीं ऐसा ना हो कि हमें तुम्हें इस शादी से दूर करना पड़ जाए! फिर हम तुम्हें तुम्हारी मासी के यहाँ भेज देंगे और वहीं से तुम वीडियो कॉल पर अपनी दीदी की शादी इंजॉय करना!”
उनकी बात सुनकर चित्रांशी हैरान रह गई! वो रोते हुए बोली "आप लोग मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? अरे मैं झूठ क्यों बोलूँगी? मैं सच कह रही हूँ! मिस्टर संगम मित्तल ने…
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही सोमेश जी ने एक बार फिर से चिल्लाते हुए कहा "चुपचाप अपने कमरे में जाओ, वरना अभी इसी वक्त तुम्हारा यहाँ से जाने का इंतजाम कर देंगे!"
उनकी धमकी सुनकर चित्रांशी की आँखों से आँसू और भी ज्यादा तेजी से बहने लगे थे और वो रोते हुए तुरंत अपने रूम की तरफ भाग गई!
लक्षिता के चेहरे पर भी डर झलक रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर चित्रांशी को मित्तल फैमिली से प्रॉब्लम क्या हो रही है? क्यों वो उसकी शादी तुड़वाने में लगी हुई है? अब वो भी अपने कमरे में चली गई!
कमरे में आकर उसने चित्रांशी की तरफ देखा जो बेड पर बैठी हुई रो रही थी, लक्षिता उसके सामने आकर बैठी और बोली "प्लीज चुप हो जाओ चित्रांशी!”
उसकी बात पूरी होती उससे पहले ही चित्रांशी पूरी तरह से बेड पर लेट गई और फिर अपने ऊपर ब्लैंकेट लेते हुए बोली "मुझे किसी से कोई बात नहीं करनी!”
ये बोलकर उसने अपनी आँखें बंद कर ली और लक्षिता बस उसकी तरफ देखती रह गई, अभी तो फिलहाल उसका मूड खराब था इसलिए वो सोच रही थी कि वो थोड़ी देर बाद ही चित्रांशी से बात करेगी और यूँ ही पूरा दिन बीत गया था और अब रात का वक्त था!
रात के लगभग 8 बजे
बंसल हाउस में,
सब लोग रेडी हो रहे थे! इंगेजमेंट का फंक्शन बंसल हाउस में हुआ था लेकिन संगीत और मेहंदी का फंक्शन मित्तल मेंशन में होने वाला था और फिर सब लोग रेडी होकर मित्तल मेंशन के लिए निकल गए थे।
सबके चेहरे पर खुशी झलक रही थी, बस एक चित्रांशी का मुँह बना हुआ था और वो किसी से बात भी नहीं कर रही थी।
जैसे-तैसे वो लोग 8:30 के आसपास मित्तल मेंशन पहुँचे, मित्तल फैमिली उनका वेलकम कर रही थी और हर किसी की नज़र ही चित्रांशी पर जा रही थी।
जब कोई चित्रांशी की तरफ देखता भी तो चित्रांशी मुँह बनाते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लेती थी और इस बात पर खुद बंसल फैमिली को पछतावा हो रहा था कि वो लोग चित्रांशी को लेकर ही क्यों आए? लक्षिता को तो डर लगने लगा था कि कहीं उसकी शादी ही ना टूट जाए?
कुछ ही देर में सब लोग इधर-उधर बिजी हो गए थे, चित्रांशी एक जगह खड़ी थी और उसका चेहरा एकदम एक्सप्रेशनलैस था! ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसे मारपीट कर वहाँ पर लाया हो…
तभी स्नेहा उसके सामने आकर खड़ी हुई और उसकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली "नाराज हो तुम?"
चित्रांशी ने जैसे ही उसका
सवाल सुना उसने नज़रें घुमाकर स्नेहा की तरफ देखा, अगले ही पल उसका चेहरा गुस्से से और ज्यादा लाल होने लगा था।
_______________





















Write a comment ...