
संगम हैरानी से चित्रांशी की तरफ देख रहा था जो अपनी साड़ी को अपने हाथों में संभाले हुए उसकी तरफ आ गई थी और अब उसने अपनी साड़ी को लगभग से अपने बदन पर से हटा ही दिया था! उसकी कमर उसकी पीठ उसकी गर्दन उसके ब्लाउज की हुक सब कुछ संगम के सामने थी और उसे यूं देखते हुए संगम के होश उड़े हुए थे! उसका गला सूख रहा था…
वो कुछ कहता उससे पहले ही चित्रांशी एक बार फिर से बोली “आप ऐसे क्या देख रहे हैं मुझे? आपने कभी कोई लड़की देखी नहीं है क्या या फिर मैं कुछ ज्यादा ही खूबसूरत हूं? हां आई नो खूबसूरत तो मैं बहुत हूं लेकिन मुझे ऐसे देखना बंद कीजिए, मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आता जब लड़के मुझे ऐसे टुकुर-टुकुर देखते हैं! कहीं ऐसा ना हो कि गुस्से में मैं अपना हाथ आप पर उठा दूं, वैसे भी मुझे अभी आपकी जरूरत है तो मैं आपको कुछ कह भी नहीं सकती!”





















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