
चित्रांशी हैरानी से संगम की तरफ देख रही थी जिसके हाथ में चॉकलेट थी और वो बोल रहा था कि वो ये चॉकलेट चित्रांशी के लिए लेकर आया है, लेकिन चित्रांशी के चेहरे पर हैरानी के साथ-साथ डर भी झलक रहा था क्योंकि उसे घबराहट हो रही थी कि कहीं संगम एक बार फिर से उसके हाथों पैरों को बांध ना दे!
मुश्किल से तो वो थोड़ी देर आराम से सोई थी, वो तो सोच रही थी कि पूरी रात वो आराम से सोएगी लेकिन पता नहीं कैसे संगम लॉक खोल के अंदर आ गया था? जबकि चित्रांशी ने दरवाजा अच्छे से बंद किया था!





















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