
चित्रांशी की आंखों में इस वक्त आंसू थे! वो अपनी आंखों में आंसू लिए संगम और स्नेहा की तरफ देख रही थी, वो दोनों डाइनिंग टेबल तक पहुंच चुके थे!
स्नेहा को भी चित्रांशी के लिए बुरा लग रहा था क्योंकि एक तो पहली बार वो किचन में काम कर रही थी जिसकी वजह से उसका हाथ जल गया था और ऊपर से उसे संगम का रूड बिहेवियर भी बर्दाश्त करना पड़ रहा था, पर वो अब चित्रांशी के लिए कुछ नहीं कर सकती थी क्योंकि कल जिस तरह से स्नेहा ने संगम पर हाथ उठाया उसका गिल्ट अभी भी स्नेहा के दिल में था और वो नहीं चाहती थी कि संगम अब उससे और दूर चला जाए! उसे सब कुछ बर्दाश्त था बस संगम से दूरी बर्दाश्त नहीं थी…





















Write a comment ...