
स्नेहा अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से चित्रांशी की तरफ देख रही थी, उसने अपने मुंह में चम्मच डाला हुआ था और अब वो चम्मच भी उसके मुंह में ही अटक गया था! भला ये कैसा सवाल हुआ कि वो उसका बनाया हुआ हलवा क्यों खा रही है? उसका बेटा हद से ज्यादा खडूस था ही लेकिन उसकी बहू भी कम नहीं थी, दोनों एक दूसरे को टक्कर देने के लिए काफी थे!
उसे तो खुश होना चाहिए था कि वो उसका बनाया हुआ हलवा खा रही है और यहां वो उल्टा उससे सवाल कर रही थी लेकिन स्नेहा भी कम नहीं थी, उसने अब वो चम्मच अपने मुंह से निकाला और उसका हाथ पकड़ते हुए बोली "ये हलवा तुमने बनाया है?”





















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