
चित्रांशी अभी भी सुबक रही थी! स्नेहा तो ये देखकर हैरान थी कि चित्रांशी लक्षिता से भी बात नहीं कर रही थी और उसे बोल रही थी कि वो अपनी सासू मां से बात कर लेगी, मतलब अब उसे चित्रांशी को संभालने में कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी! वरना अगर चित्रांशी ऐसे रो रही हो और स्नेहा उसे संभालने के लिए आगे आ जाए तो कोई पता नहीं चित्रांशी उसे ही दो-चार सुना दे!
स्नेहा ने अब उसका हाथ पकड़ते हुए कहा “तुम एक काम करो तुम मेरे साथ मेरे रूम में चलो!” ये बोलते हुए उसने एक नजर अंगद की तरफ देखा जिसकी आंखें बड़ी हो चुकी थी!





















Write a comment ...