
धड़कन सामने मंडप की तरफ देख रही थी जहां पर आग जल रही थी और अधिराज उसके साथ ही बैठा था और सिर्फ साथ नहीं अधिराज ने उसका हाथ भी कसकर पकड़ा हुआ था! हालांकि जब-जब अधिराज उसे हाथ लगाता था या फिर उसके करीब आने की कोशिश करता था तो धड़कन उसे खुद से दूर धक्का दे देती थी, वो उसे अपने करीब नहीं आने देती थी लेकिन अब वो अपना हाथ अधिराज से नहीं छुड़ा रही थी! वो चुपचाप वहां पर बैठी थी और पंडित जी शादी के मंत्र पढ़ रहे थे।
कुछ देर बाद पंडित जी उन दोनों की तरफ देखते हुए बोले “अब आप लोग फेरों के लिए खड़े हो जाइए!”





















Write a comment ...