
मुंबई का एक मंदिर जहां स्तुति ने बाहर की तरफ अपने सैंडल उतारे और फिर मंदिर के अंदर आ गई, इस वक्त दिन के लगभग से 1 बज गए थे! हालांकि इस वक्त मंदिर में ज्यादा लोगों का आना-जाना नहीं था लेकिन फिर भी दरवाजे खुले थे और अब स्तुति ने पहले अच्छे से भगवान के आगे माथा टेका और फिर वही एक पिलर से लगकर बैठ गई!
इसके अलावा उसे और कोई जगह भी नजर नहीं आ रही थी जहां पर वो जा सके इसलिए वो चुपचाप वहीं पर बैठ गई थी और सोच रही थी कि वो कहां जाए और कहा नहीं? ना तो उसके पास इतने पैसे थे कि वो किसी और शहर में जाकर सेट हो जाए और ना ही वो किसी और शहर में जाना चाहती थी क्योंकि वो निशांत के पास रहना चाहती थी।





















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