
मान्यता हैरानी से रिदय की तरफ देख रही थी जो उसका फोन मांग रहा था, वो तुरंत अपना फोन पीछे की तरफ करते हुए बोली "नहीं दूंगी मैं तुम्हें अपना फोन! भला मैं तुम्हें अपना फोन क्यों ही दूं? तुम होते कौन हो मुझसे मेरा फोन मांगने वाले? चुपचाप गाड़ी ड्राइव करो और मुझे चौहान मेंशन तक पहुंचाओ, वरना गाड़ी का दरवाजा खोलो मैं अभी गाड़ी से उतरने को तैयार हूं! मैं खुद ऑटो में बैठकर घर चली जाऊंगी…
उसकी बात पर रिदय ने कुछ नहीं कहा, वो कुछ पल खामोश रहा और उसे यूं खामोश देखकर मान्यता को अजीब सा डर लगने लगा था।





















Write a comment ...