
इति घूरते हुए उसे देख रही थी लेकिन उसकी नजरों का यज्ञ पर कोई असर नहीं हो रहा था। उसे अंदर लेकर आया और दरवाजा बंद कर सीधा उसे बेड पर पटक दिया और खुद भी उसके ऊपर झुक गया ।
इति उसकी तरफ देखते हुए बोली " तुम समझते क्या हो खुद को?? कभी भी कुछ भी करने लग जाते हो...दूर रहो मुझसे..."






















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