
प्रणय ने पाखी का हाथ अपने हाथ में थामा हुआ था और उसके हाथ पर लगी हुई मेहंदी देख रहा था, उसे जब उसके एक हाथ पर अपना नाम लिखा हुआ कहीं दिखाई नहीं दिया तो उसने अब उसका दूसरा हाथ भी अपने हाथ में थाम लिया था लेकिन वहां पर भी उसका नाम कहीं नहीं था।
पाखी ने अपनी नजरों को हल्का सा दूसरी तरफ घुमाया हुआ था, वो जानती थी कि अब प्रणय किसी भी वक्त भड़क सकता है पर वो भी अपने जवाबों के साथ तैयार थी कि जब वो दूसरों के साथ बातें करने में बिजी है तो वो अपने नाम की मेहंदी भी दूसरों के हाथों पर लगवाएं और अब प्रणय ने उसे घूरना शुरू किया!





















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