
आराध्या का दम घुटने लगा था, अभी तो दक्षम ने उसके साथ कुछ करना भी शुरू नहीं किया था लेकिन अभी से उसे घबराहट होने लगी थी! उसे अपने बदन में कंपकंपी सी महसूस हो रही थी, उसे खुद पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था कि क्यों उसने दक्षम की बातों का यकीन किया? क्यों उसने उसके एक्सीडेंट को सच माना और मुंबई में रुक गई? अगर वो उस दिन वहां से भाग जाती तो भाग जाती लेकिन अब शायद वो कभी भी दक्षम के चंगुल से निकल नहीं पाएगी! क्यों उसका दिल भगवान ने मोम का बनाया जो किसी को जरा सी तकलीफ में देखकर पिघल जाता है? जबकि सामने वाला तो उसे तकलीफ देने से एक पल भी नहीं सोचता!
इस वक्त दक्षम का रूम नॉर्मल बिल्कुल भी नहीं था, वहां की रेड लाइट बहुत ज्यादा डेंजरस लग रही थी और रूम पूरी तरह से चेंज था! सामने दीवार पर हैंडकफ टंगे हुए थे, एक स्ट्रेचर टाइप बेड अलग से लगा हुआ था! उससे कुछ ही दूरी पर एक स्टूल टाइप टेबल भी लगा हुआ था…






















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