
जैसे ही इश्क ने अग्नि के बिल्कुल करीब आकर अपने पंजों के बल खड़े होते हुए अपने होठ उसके होठों पर रखे एक पल के लिए अग्नि की नसें एकदम तन गई थी, उसे लग रहा था कि इश्क की जो हालत है उसके बाद इश्क उसकी बात मानने से इनकार कर देगी! ऐसी हालत में सेक्स पॉसिबल ही नहीं था, उसकी पीठ काफी हद तक जली हुई थी जहां पर उसने दवा तो लगा दी थी लेकिन दवा लगाने के बाद से ही इश्क से दूरी बनाकर खड़ा था!
अब उसकी इस हरकत पर अग्नि को उस पर प्यार नहीं बल्कि गुस्सा आ रहा था, उसे मना करने की बजाय वो तो खुद अपनी जगह से उठकर उसके करीब आ गई थी! लेकिन वो भी अब पीछे हटने वालों में से नहीं था वरना वो हार जाता और हारना अग्नि को मंजूर ही नहीं था!






















Write a comment ...