
सिकंदर और नाज़नीन के बीच जो बातें चल रही थी उसमें नाज़नीन का दिल जोरो से धड़क रहा था और वो सिकंदर की बातों को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं कर पा रही थी, उसे ना चाहते हुए भी इस वक्त सिकंदर पर प्यार आ रहा था और जिस तरह से सिकंदर ने उसके सीने पर अपना चेहरा रख दिया सिर्फ वही जानती थी कि उस वक्त उसकी धड़कनों में कैसा तूफान आया!
उसने अपने हाथ सिकंदर के कंधों पर तो रख ही रखे थे लेकिन अब उसने धीरे-धीरे अपने हाथ उसकी पीठ और उसके सिर पर पूरी तरह से कस दिए और फिर देखते ही देखते उसे अपनी बाहों में समेट लिया!






















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