
ज़ारा की बातें सुनते हुए नाज़नीन को इतना ज्यादा गुस्सा आया कि उसने एक जोरदार तमाचा उसके गाल पर जड़ दिया था, उसके हाथ की उंगलियों के निशान ज़ारा के गाल पर छप गए थे और ज़ारा का चेहरा भी गुस्से से बेहद लाल हो रहा था।
उसकी गुस्से भरी नजरे नाज़नीन पर ही थी, नाज़नीन अपनी जगह से उठी और बोली "मैंने तुम जैसी बदतमीज बेशर्म और बेहया लड़की आज तक नहीं देखी और तुम मुझे क्या बता रही हो कि मैंने क्या किया और क्या नहीं? पहले अपने आप को देखो कि तुम क्या कर रही हो? सिकंदर साहब के आगे पीछे घूम रही हो, उन्हें अपनी तरफ अट्रैक्ट करने की कोशिश कर रही हो! घटिया हरकतें कर रही हो और तुम मुझे पाठ पढ़ा रही हो कि मैंने क्या किया? मैंने जो भी किया वो शायद मेरी किस्मत थी लेकिन तुम जो कर रही हो वो तुम्हारी नियत है! पहले तो मुझे लगा कि शायद सिकंदर साहब कुछ ज्यादा ही कर रहे हैं, लेकिन अब मुझे लग रहा है कि उन्होंने तुम्हारे साथ जो भी किया बिल्कुल सही किया! तुम्हारी घटिया हरकतों का जवाब वैसे ही देना बनता था…






















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